निगरानी समितियों के आगे घुटने टेक रहा करोना, जानिए कैसे

करोना के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई को बल मिलता है

By: Ritesh Singh

Published: 28 May 2021, 04:30 PM IST

लखनऊ ,निगरानी समितियों के गठन की पहल जो प्रदेश सरकार द्वारा की गयी थी। उसका अब ज़मीन पर असर दिखने लगा है।जिले और ग्रामीण स्तर पर करोना की स्थिति में सुधार हो रहा है। क्योंकि निगरानी समिति के ये सदस्य डोर टू डोर जाकर लोगों के बीच जागरुकता लाने का प्रयास करते है। अपने ही बीच के लोगों की बात भी ग्रामीणों को आसानी से समझ आ जाती है जिससे करोना के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई को बल मिलता है

बात अगर उतर प्रदेश के हरदोई की करें तो जिले में कोविड से संक्रमित होने वालों की तुलना में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। पिछले 24 घंटे में 5576 लोगों की सैंपलिंग की गई,जिसमें से मात्र 21 व्यक्ति ही पॉजिटिव पाए गए। पाजिटिविटी रेट जो अप्रैल में 8 प्रतिशत था। अब गिरकर 2 प्रतिशत तक पहुँच गया है। हरदोई की 1306 गाँव पंचायतो और 243 नगर के वार्डो में इन निगरानी समितियों का गठन कर 6000 मेडिकल किट प्रतिदिन बाटी जा रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहर के वाडो का साफ-सफाई ,सैनिटाइजेशन अभियान जोरों पर चलाया जा रहा है।

जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने निगरानी समिति के सदस्यों का धन्यवाद करते हुये कहा है कि इस पहल के सकारात्मक परिणाम गांवों में देखने को मिले है।जिससे जिले मे पाजिटिव रेट में कमी आयी है।उन्होंने कहा कि डोर टू डोर संपर्क से लोगों में जागरुकता आय़ी है। जिससे वो टीकाकऱण के साथ साथ कोविड प्रोटोकाल के फायदे भी समझने लगे है। रविशंकर शुक्ला, ईओ नगर पालिका हरदोई ने बताया कि ग्रामीण स्तर पर बड़ी संख्या में सैनिटाइजेशन किया जा रहा है।इसके अलावा सार्वजनिक जगहों जैसे बस स्टेशनो और रेलवे स्टेशनों पर प्रतिदिन सैनिटाइजेशन किया जाता है।

जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की कि कोरोना को हराने में सभी लोग सहयोग करें। टीका लगने के बाद यदि हल्का बुखार हो जाता है तो घबराए नहीं और जो दवाएं टीकाकरण के समय दी गई हैं। उनके सेवन से बुखार चला जाएगा। सभी ग्रामीण नि:संकोच जांच एवं टीकाकरण कराएं। निगरानी समिति से कहा कि 45 वर्ष आयु से ऊपर के व्यक्तियों को शतप्रतिशत टीका लगवाएं। गांवों में नियमित सफाई और सैनिटाइजेशन कराया जाए। जांच में पुष्टि पर होम आइसोलेशन में रखा जाता है और गंभीर रोगियों को ही चिकित्सालय में भर्ती किया जा रहा है।

Ritesh Singh
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