इम्युनिटी बूस्टर से नहीं संतुलित आहार और जीवन शैली में सुधार से भागेगा कोरोना

कोरोना से बचाव करना है तो इम्युनिटी अर्थात शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना जरूरी है।

By: Neeraj Patel

Published: 26 Aug 2020, 01:53 PM IST

लखनऊ. कोविड-19 वायरस से पूरा विश्व परेशान है। अब कोरोना ने एक महामारी का रूप ले लिया है। केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम प्रयासों और प्रतिबंधों के बावजूद यह रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक इसे रोकने के लिए अनगिनत दिशा निर्देश जारी किये जा चुके हैं, फिर इसका प्रसार बढ़ता जा रहा है। पूरा विश्व इससे बचने के लिए वैक्सीन की खोज में लगा है। कई कंपनियों ने इम्युनिटी बूस्टर औषधि लांच की है। कुल मिलाकर अब तक के सभी उपाय वायरस से खुद को सुरक्षित रखने तक ही सीमित हैं।

माधवबाग के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. आशुतोष पाठक का कहना है कि कोरोना वायरस से खुद को सुरक्षित रखना है तो उसके लिए उपाय जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि वायरस से सबसे ज्यादा संक्रमित कौन हो रहा है। जिनकी मृत्यु वायरस के संक्रमण से हो रही है उन लोगों को पहले से कुछ रोग था क्या? अभी तक विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों से जो सूचनाएं प्राप्त हुई हैं उसमें यह देखा गया है कि जिनकी इम्युनिटी कम है एवं जिनको पहले से कोई रोग जैसे हाई बीपी, मधुमेह, हृदय रोग, थायरॉयड, मोटापा, श्वसन संबंधी विकार, कैंसर, किडनी डिसीज़, डिप्रेशन आदि समस्या है, उनकी इम्युनिटी कम हो सकती है। जिसके कारण उनमें कोरोना वायरस का संक्रमण होने की संभावना बहुत ज्यादा पायी गयी है।

बढ़ानी होगी रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता

डॉक्टर सभी से इम्युनिटी बढ़ाने की बात करते हैं। इम्युनिटी अर्थात शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता अगर कम है तो कोरोना ही नहीं शरीर किसी भी प्रकार के अन्य संक्रमण से लडऩे में सक्षम नहीं होता। इसके कारण व्यक्ति को बार-बार सर्दी, जुकाम, बुखार होता रहता है, जिससे बचने के लिए एन्टी-वायरल या एंटीबायोटिक मेडिसिन का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में यदि संक्रमण से बचना है या भविष्य में आने वाले अन्य प्रकार के वायरस से खुद का बचाव करना है तो वैक्सीन का इंतज़ार करने से अच्छा है अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाए। और शरीर से जिन रोगों को कम कर सकते हैं उनको कम करने का प्रयास किया जाए।

आयुर्वेद के पांच सूत्रों का करें पालन

जीवनशैली संबंधित विकार जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदयरोग, मोटापा, तनाव, थायरॉइड आदि रोगों के बारे में यह सर्वविदित तथ्य है कि इन्हें आयुर्वेद की सहायता से और जीवनशैली में आवश्यक सुधार करके रिवर्स (रोग मुक्त) हुआ जा सकता है। इस प्रकार के रोग को नियंत्रण में रखकर ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ायी जा सकती है। ऐसे में जरूरी है कि जीवनशैली संबंधित रोगों को जड़ से खत्म करने एवं इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए कुछ उपाय करने होंगे।

जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

डॉ. आशुतोष पाठक कहते हैं कि आयुर्वेद पांच सूत्रों पर काम करता है-आहार, विहार, विचार, पंचकर्म एवं औषधि। इसमें आहार का मतलब संतुलित आहार से है। यानी आपके रोग के अनुसार आहार। विहार यानी प्रतिदिन अपने रोग के अनुसार व्यायाम। विचार यानी सकारात्मक विचार एवं ध्यान। फिर पंचकर्म। यानी सम्पूर्ण हृदय शुद्धिकरण चिकित्सा जिससे शरीर का शोधन होता है फिर आती है औषधि। यानी आयुर्वेदिक औषधि रोगों का शमन करने के लिये। यदि इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को बढ़ाना है और कोरोना वायरस से संक्रमित होने से बचना है, तो जीवनशैली को सुधार कर रोगों को शरीर से भगाने का उपाय करना होगा न कि वैक्सीन या अन्य प्रकार के इम्युनिटी बूस्टर औषधि की। इस तरह से जीवनशैली में बदलाव कर रोगों से मुक्त होने के साथ ही साथ अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी कामयाब होंगें।

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