लखनवाइट्स ने जनता कर्फ्यू का किया स्वागत, दिन भर ऐसा रहा पूरे शहर का नजारा

जनता कर्फ्यू के चलते शहर के जिन चौराहों पर किसी भी वक्त खड़े होने की जगह नहीं मिलती थी, आज सुनसान थे

By: Hariom Dwivedi

Updated: 22 Mar 2020, 06:39 PM IST

लखनऊ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनता कर्फ्यू के आह्वान पर लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में रविवार को सन्नाटा पसरा रहा है। नवाबों की नगरी में सुबह से ही लोग घरों से बाहर नहीं निकले। लोग घरों में और पुलिस सड़कों पर नजर आई। पत्रिका उत्तर प्रदेश की टीम ने लखनऊ के सबसे व्यस्ततम चौराहों में से एक हजरतगंज (अटल चौक) और पुराने लखनऊ के चौक चौराहे सहित कई प्रमुख स्थानों का जायजा लिया। शहर के जिन चौराहों पर किसी भी वक्त खड़े होने की जगह नहीं मिलती थी, आज सुनसान थे। चारबाग सहित लखनऊ के सभी रेलवे स्टेशनों पर जनता कर्फ्यू का असर साफ दिख रहा था। सब शांत था, बस बीच-बीच में रेलवे का अनाउंसमेंट ही सन्नाटे को चीर रहा था। शाम पांच बजे राजधानी के लोगों ने कहीं शंख, कहीं थाली तो कहीं ताली बजाकर धरती के भगवानों का शुक्रिया कहा। जनता कर्फ्यू की सफलता और कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में 25 मार्च तक लॉकडाउन घोषित कर दिया गया।

हजरतगंज का अटल चौक
हजरतगंज के अटल चौक से चार प्रमुख मार्ग जाते हैं। एक परिवर्तन चौक की ओर, दूसरा विधानसभा की ओर, तीसरा राजभवन की ओर और चौथा सिकंदराबाद की ओर। रविवार को सभी मार्गों पर सन्नाटा पसरा था। सिर्फ पुलिस और मीडियाकर्मी ही मौजूद थे। बीच-बीच में एक-दुक्का एम्बुलेंस की गाड़ियां गुजर रही थीं, लेकिन वह भी बिना सायरन के। मानो चुपचाप निकल जाना चाहती हों। हालांकि, ऐसा इसलिए था क्योंकि सड़कों पर सिर्फ सन्नाटा और सन्नाटा था।

पुराने लखनऊ का चौक
चिकनकारी, मक्खन और लस्सी के लिए मशहूर चौक चौराहे पर आज पीने का पानी भी नहीं मिल रहा था। शहर के प्रमुख मार्गों पर लाइव के दौरान दोपहर दो बजे पत्रिका टीम को प्यास लगी तो चौराहे पर खुले मेडिकल स्टोर पर कर्मचारियों ने पीने का पानी मुहैया कराया। चौराहे पर पुलिस मुस्तैद थी। अनाउंस कर लोगों को भी घर न निकलने को आगाह किया जा रहा था। यहां इक्का-दुक्का लोग सड़कों पर निकल रहे थे, जो इमरजेंसी में जा रहे थे।

चारबाग समेत प्रमुख रेलवे स्टेशनों का हाल
लखनऊ के सभी रेलवे स्टेशनों पर जनता कर्फ्यू का असर दिखा। चाहे वह चारबाग हो या लखनऊ स्टेशन, ऐशबाग हो या गोमतीनगर का स्टेशन। लखनऊ के सभी 16 रेलवे स्टेशनों का यही हाल रहा। रेल कर्मचारी, रेल पुलिस, कुली और कुछ यात्री जो रविवार सुबह लखनऊ पहुंचे और सवारी की तलाश में इधर-उधर तलाश करते रहे। थककर लोग पैदल ही घर की ओर कूच कर गये।

घंटाघर में जारी रहा धरना-प्रदर्शन
सीएए, एनआरसी और एनआरसी के विरोध में लखनऊ के घंटाघर में प्रदर्शनकारी महिलाओं ने जनता कर्फ्यू को नकार दिया। सरकार और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदर्शनकारी महिलाएं धरनास्थल पर जमी रहीं। शासन, प्रशासन और पुलिस की अपील का महिलाओं पर कोई फरक नहीं पड़ रहा है, वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

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