लॉकडाउन के दौरान निकली शव यात्राओं में शामिल हुए केवल 10 से 15 लोग, परिवार ने कहा- घरों से ही आत्मा की शांति के लिए करें प्रार्थना

कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पूरे भारत में लॉकडाउन है। इस दशा में लोग घरों से निकलने से तो परहेज कर ही रहे हैं साथ ही शादी या दूसरे मांगलिक समारोह के आयोजनों से लेकर किसी के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो रहे हैं...

आगरा. कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पूरे भारत में लॉकडाउन है। इस दशा में लोग घरों से निकलने से तो परहेज कर ही रहे हैं साथ ही शादी या दूसरे मांगलिक समारोह के आयोजनों से लेकर किसी के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो रहे हैं। कुछ ऐसा ही तीन मामले आगरा से सामने आए। जहां लॉकडाउन प्रतिबंध के बीच एक 70 वर्षीय बुजुर्ग का निधन हो गया। उनकी अंतिम यात्रा में लोग उमड़े तो मृतक के पुत्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन वाली अपील को याद दिलाया और सभी को वापस कर दिया। मृतक के बेटे ने कहा, अगर आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना चाहते हैं तो अपने-अपने घरों में करिए। वहां सभी सुरक्षित भी रहेंगे। ऐसे में बुजुर्ग के शव का महज 10 से 15 लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। ऐसा ही कुछ आगरा के अलकापुरी पुलिस चौकी और न्यू विजय नगर कॉलोनी से भी देखने को मिला।

यह मामला आगरा में शाहगंज क्षेत्र के भोगीपुरा का है, जहां 70 वर्षीय प्रभाकर लोधी कई दिनों से बीमार चल रहे थे। अचानक रात में उनकी मौत हो गई। चीख पुकार मची तो आसपड़ोस के लोग सांत्वना देने के लिए घर पहुंच गए। यह देख मृतक के बेटे मुकेश ने पड़ोसियों को अपने-अपने घर लौटने के लिए कहा। इसके बाद परिवार के 10 से 15 लोगों ने मिलकर शव यात्रा निकाली और अंतिम संस्कार किया गया। शव यात्रा में शामिल अधिक लोग कोरोनावायरस से बचाव के लिए ऐहतियात बरतते हुए नजर आए। मृतक के बेटे ने भी मास्क लगा रख था।

ऐसा ही एक दूसरा मामला आगरा के अलकापुरी पुलिस चौकी क्षेत्र का भी सामने आया। यहां के निवासी आईआरएस अधिकारी संजय लवानिया की पहल की भी लोगों में काफी चर्चा है। जहां पिता की मौत पर बेटे ने अंतिम संस्कार में लोगों को न शामिल होने की अपील की। पिता की मौत पर सांत्वना देने और अंतिम संस्कार में शामिल होने आए आए लोगों से बेटे ने कहा कि आप लोग घर जाइए और अपने-अपने घरों में आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कीजिए। संजय के पिता के अंतिम संस्कार में भी परिवार के 10 से 15 लोग शामिल हुए। आईआरएस अधिकारी संजय लवानिया की पोस्टिंग इस समय दिल्ली में है। उनके पिता का देहांत होने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए आगरा लाया गया। जैसे ही उनका शव गेट पर पहुंचा तो लोगों तांता सा लग गया। तभी उनके बेटे संजय लवानिया ने सभी से हाथ जोड़कर घर वापस जाने की अपील की।

तीसरा मामला आगरा के न्यू विजय नगर कॉलोनी के नगला धनी इलाके का है। जहां के एक परिवार ने भी समाजहित के लिए फैसला लिया और पत्नी की मौत के बाद शवयात्रा में जाने के लिए पहुंचे शुभचिंतकों को पति देवकी नंदन त्यागी ने हाथ जोड़कर लौटाया। महज दस लोगों के साथ ही शवयात्रा निकाली गई। देवकी नंदन त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लॉकडाउन में भीड़ न जुटने की अपील को माना और लोगों को भी नसीहत देकर विदा किया। महज दस लोगों के साथ अंतिम संस्कार किया। देवकीनंदन त्यागी की पत्नी ममता की लंबी बीमारी से मौत हो गई थी। परिवार को सांत्वना देने के लिए नाते-रिश्तेदारों की भीड़ जुटने लगी। वहीं घर के भीतर रखे शव के पास विलाप कर रहे पति को जब ये मालूम हुआ तो वे बाहर निकले और मौके पर जुटे लोगों से कहा कि अगर थोड़ी भी असावधानी बरती गई तो समाज के अन्य लोग परेशानी में आ सकते हैं। जिसके बाद सभी वहां से जाने लगे।

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नितिन श्रीवास्तव
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