कोरोना वायरस को लेकर तेजी से वायरल हो रहे ये भ्रम, जानिये क्या है इनका सच

कोरोना वायरस को लेकर दुनिया समेत पूरे उत्तर प्रदेश में कई तरह की बातें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं...

लखनऊ. कोरोना वायरस को लेकर दुनिया समेत पूरे उत्तर प्रदेश में कई तरह की बातें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। जिनकी सच्चाई जाने बिना लोग इन पर भरोसा कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने संक्रमण के फैलाव को लेकर फैलाई जा रही इन भ्रांतियों को दूर करते हुए सही और तथ्यपूर्ण जानकारी दी है। जिससे लोग इन अफवाहों से दूर रहें और सनसनी न फैलाएं।

पहला मिथक- गर्म मौसम और नमी में नहीं फैलता कोरोना
सच्चाई- कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि गर्म मौसम में कोरोना नहीं फैलता या नमी बनाए रखने के लिए बार-बार गुनगुने पानी से नहाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोरोनावायरस कहीं भी, किसी भी क्षेत्र में फैल सकता है। इसका पर्यावरण या जलवायु से कोई संबंध नहीं है।

दूसरा मिथक- गर्म पानी से नहाने पर मर जाता है कोरोना वायरस
सच्चाई- गर्म पानी से नहाने के बावजूद वायरस नहीं मरता, क्योंकि शरीर का तापमान तो 36.5 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है। ऐसे में इस बात का कोई आधार नहीं है कि गर्म पानी से कोरोना मरता है।

तीसरा मिथक- मच्छर काटने से भी फैलता है कोरोना वायरस
सच्चाई- ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जिससे कि इस बात की पुष्टि हो सके कि मच्छर में यह वायरस रह सकते हैं या नहीं। बहरहाल, न्यू कोरोनावायरस एक रेस्पिरेटरी वायरस है, जो मुख्य रूप से किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या किसी तरह से संपर्क में आने से फैलता है।

चौथा मिथक- हैंड ड्रायर्स से मरता है कोरोना वायरस
सच्चाई- ऐसी खबर वायरल हो रही है कि हाथ धोने के बाद हैंड ड्रायर्स का इस्तेमाल करने से कोरोना वायरस मर जाते हैं जबकि ये सच नहीं है। हैंड ड्रायर्स से कोरोना वायरस नहीं मरते।

पांचवा मिथक- थर्मल स्कैनर से कोरोना संक्रमण का पता चलता है
सच्चाई- कोरोना संक्रमण की जांच के लिए थर्मल स्कैनर का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन डब्ल्यूएचओ का कहना है कि थर्मल स्कैनर शरीर का तापमान मापकर बुखार का पता लगा सकता है, कोरोना संक्रमित व्यक्ति का नहीं। कई बार संक्रमित को बुखार आने में 2 से 10 दिन लग जाते हैं।

छठा मिथक- शरीर पर अल्कोहल/क्लोरीन स्प्रे से वायरस मर जाता है
सच्चाई- शरीर पर अल्कोहल या क्लोरीन स्प्रे को महज सावधानी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन जिस व्यक्ति के शरीर में कोरोना वायरस प्रवेश कर चुका है, उसे इन चीजों से नहीं मारा जा सकता।

सातवां मिथक- पालतू जानवरों से कोरोना वायरस फैलता है
सच्चाई- पालतू जानवरों से कोरोना वायरस फैलने की अभी तक कोई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन सावधानी के तौर पर आप पालतू जानवरों को छूने से बचें और हाथ धोकर खाना खाएं।

आठवां मिथक- निमोनिया वैक्सीन कोरोना वायरस से बचा सकती है
सच्चाई- यह झूठ है। यह वायरस बिल्कुल नया है और इसके लिए नई वैक्सीन की जरूरत है। वैज्ञानिक एंटी-कोविड19 वैक्सीन बनाने में जुटे हैं। लेकिन अभी तक कोई कारगर वैक्सीन नहीं खोजी गई है।

नौवां मिथक- सैलाइन से नाक साफ करने से बचाव होता है।
सच्चाई- इस बारे में पुख्ता प्रमाण नहीं है, लेकिन लगातार सैलाइन से नाक साफ करने से बचाव की उम्मीद जरूर है। सैलाइन से लगातार नाक साफ करने से लोग जुकाम से जल्दी रिकवर कर जाते हैं।

दसवां मिथक- लहसुन खाने से कोरोना संक्रमण से बच सकते हैं।
सच्चाई- लहसुन खाना सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन कोरोना वायरस से बचाव में इसे उपयोगी नहीं माना जा सकता।

ग्यारवां मिथक- एंटीबायोटिक्स कोरोनावायरस के इलाज में कारगर हैं।
सच्चाई- कोरोना से निपटने के लिए अभी कोई दवाई नहीं मिल सकी है। ऐसे में यह बात सही नहीं है।

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नितिन श्रीवास्तव
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