अयोध्या मामले के बाद इन 5 प्रमुख नेताओं पर फैसला आना बाकी, सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे यह निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का देश भर ने स्वागत किया है। इस बीच कोर्ट की एक टिप्पणी विचार करने लायक है जिसमें बाबरी मस्जिद के गुंबदों को गिराने को अति निंदनीय बताया गया है।

लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का देश भर ने स्वागत किया है। इस बीच कोर्ट की एक टिप्पणी विचार करने लायक है जिसमें बाबरी मस्जिद को गिराने को अति निंदनीय बताया गया है। 6 दिसम्बर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस को कोर्ट ने सोची समझी रणनीति के तहत उठाया गया कदम बताया है। आज जहां पूरा देश कोर्ट के सुनाए गए फैसले से खुश हैं, तो वहीं बाबरी मस्जिद विध्वंस में लिप्त व राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सिपाही खुद पर चल रहे मुकदमे में अभी भी फंसे हैं। विश्व हिंदूू परिषद तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल ने मंदिर आंदोलन को शुुरुआत की थी, हालांकि वो तो अब नहीं रहें और न ही वीएचपी नेता गिरिराज किशोर हैं। लेकिन आंदोलन से जुड़े कई नेताओं पर कोर्ट का फैसला आना बाकी है। उनमें लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, सतीश प्रधान, चंपत राय बंसल, विष्णु हरि डालमिया, सतीश प्रधान, आरवी वेदांती, जगदेश मुनी महाराज, बीएल शर्मा, नित्य गोपाल दास, धर्म दास का नाम शामिल है।

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश-

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को आडवाणी, जोशी, उमा भारती, भाजपा सांसद विनय कटियार समेत 13 नेताओं के खिलाफ केस चलाने का आदेश दिया था। वहीं जुलाई, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लखनऊ की विशेष अदालत बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 6 महीने में सुनवाई पूरी करे और अब से 9 महीने के भीतर अपना फैसला सुनाए। साथ ही कोर्ट ने केस की सुनवाई कर रहे जज एसके यादव का कार्यकाल 9 महीने और बढ़ाने का आदेश दिया। दरअसल, इस केस की सुनवाई कर रहे सीबीआई जज एसके यादव 30 सितंबर को रिटायर हो रहे थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से ट्रायल पूरा करने के लिए 6 महीने का वक्त मांगा था। अब जिन नताओं पर कोर्ट के फैसले का प्रमुख रूप से असर पड़ेगा वह निम्न है-

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kalyan singh

कल्याण सिंह: 6 दिसंबर 1992 में जब बाबरी मस्जिद को गिराया गया था तब कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वो उन लोगों में से थे जो राजनीतिक केंद्र में थे। इसी साल सितंबर में राजस्थान के राज्यपाल के तौर पर उनका कार्यकाल खत्म हुआ है। जिसके बाद से ही ही उनके ऊपर फिर से ट्राइल शुरू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक पद पर रहने की वजह से इस मामले से उन्हें दूर रखा है। और कहा है कि जब तक वे इस पद पर हैं उनके खिलाफ केस दर्ज न किया जाए।

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LK Advani

लालकृष्ण आडवाणी- मुरली मनोहर जोशी: लालकृष्ण आडवाणी ने ही राम मंदिर आंदोलन का बिगुल फूंका था। सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा की शुरुआत उन्होंने ही की थी। चल रहे मुकदमे में आडवाणी, जोशी और अन्य लोगों पर मस्जिद ढहाने के लिए भड़काऊ भाषण देने का आरोप था। रामनाथ कोविंद से पहले चर्चाएं थी कि मुरली मनोहर जोशी अगले राष्ट्रपति की दौड़ में है। उन्हें नरेंद्र मोदी की पसंद बताया जा रहा है। बहरहाल उनके ऊपर भी कोर्ट की कार्रवाई चल रही है।

Uma bharti

उमा भारती: राम मंदिर आंदोलन में उमा भारती शायद अकेली हैं जो यह कहते हुए दिखीं हैं कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने में वो शामिल थी। उनके खिलाफ साजिश का केस चल रहा है। उनके साथ ही कई और लोगों का नाम इस मामले में है कि हिंसा, अपराध की योजना उन्होंने बनाई थी. कोर्ट इस मामले की लगातार सुनवाई कर रही है और सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में फैसला दिया था कि नौ महीने के भीतर इसकी पूरी सुनवाई होगी। हालांकि उमा भारती ने मस्जिद गिराए जाने पर कभी भी माफी नहीं मांगी। इसकी वजह से देश में दंगे भी हुए थे। एक न्यूज चैनल को इंटरव्यू में उन्होने कहा था कि राम मंदिर के लिए वो अपनी दूसरी जान भी दे सकती हैं। उन्होंने कहा था कि कोई साजिश नहीं रची गई थी जो हुआ था वो खुले में हुआ था. मुझे गर्व है कि मैं उस आंदोलन का हिस्सा रही।

विनय कटियारः जब बाबरी मस्जिद गिराई गई थी तो ओबीसी नेता विनय कटियार फ़ैज़ाबाद से सांसद थे। कटियार के घर पर ही राम मंदिर से जुड़ी कर सेवा की रणनीति तैयार की गई थी और तब के प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के लिए अयोध्या में जो चल रहा है उससे जुड़ी स्थिति के लिए कटियार जानकारी के अहम श्रोत थे। राम मंदिर आंदोलन चलाने के लिए कटियार ने 1984 में बजरंग दल और वीएचपी यूथ विंग की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भी रहे जिसके अलावा तीन बार वो फ़ैज़ाबाद और एक बार राज्यसभा से सांसद रहे। हालांकि, 2019 की बात करें तो कटियार ख़ुद स्वीकारते हैं कि संस्था में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

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Abhishek Gupta
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