scriptCovid death Increased in India Corona Situation in Uttar Pradesh | कोरोना वायरसः महामारी काल में भारत में बढ़े मौत आंकड़े, क्या वाकई है उत्तर प्रदेश के आंकड़ों में खेल | Patrika News

कोरोना वायरसः महामारी काल में भारत में बढ़े मौत आंकड़े, क्या वाकई है उत्तर प्रदेश के आंकड़ों में खेल

Covid Death in Uttar Pradesh: 2020 में यूपी में कोरोना से हो रही मौतों को लेकर हायतौबा मची थी। ऐसे में बीजेपी सरकार का दावा और रिकॉर्ड के अमुसार कोरोना से मौते कम हुई हैं। आखिर क्या है इन आंकड़ों के पीछे खेल।

लखनऊ

Updated: May 11, 2022 06:22:24 pm

सरकार का दावा है कि देश भर की तुलना में बीजेपी शासित प्रदेश उत्तर प्रदेश में मौतों का आंकड़ा कम रहा। कोविड की वजह से भारत में मृत्यु पंजीकरण का सिलसिला सन 2020 में भी जारी रहा। इस तथ्य के बावजूद कि कोविड -19 महामारी के कारण होने वाली मौतों की कुल संख्या में तेजी आई होगी, देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में एक बड़ी गिरावट देखी गई। नागरिक पंजीकरण सिस्टम (CRS) के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2020 में 8.73 लाख मौतें दर्ज की गईं, जो 2019 में दर्ज 9.44 लाख मौतों से कम है। लेकिन ये कोई खेल है ये वाकई मौते कम हुई। इस पर संशय बना हुआ है।
देश के केरल, तेलंगाना, उत्तराखंड और दिल्ली में भी पिछले वर्ष की तुलना में 2020 में मृत्यु पंजीकरण में गिरावट देखी गई। जहां तक प्रतिशत की बात है, तेलंगाना ने यूपी में 7.5 प्रतिशत की गिरावट की तुलना में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। हालांकि, जो खास बात यह है कि यूपी में पहले से ही मृत्यु पंजीकरण का स्तर कम है। 2019 में देश में पंजीकरण की संख्या बढ़ी, लेकिन यूपी में 2020 में मृत्यु पंजीकरण में गिरावट देखी गई। जबकि 2020 में यूपी में मौतों को लेकर हायतौबा मची थी। ऐसे में बीजेपी सरकार का कहना है कि कोरोना से मौते कम हुई हैं।
Covid death Increased in India Corona Situation in Uttar Pradesh
Covid death Increased in India Corona Situation in Uttar Pradesh
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इस तरह बढ़ा मौतों का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश में सभी मौतों में से केवल 63 प्रतिशत ही दर्ज की गईं। राज्य में मृत्यु पंजीकरण 2011 में लगभग 47 प्रतिशत से धीरे-धीरे बढ़कर 2019 में 63 प्रतिशत हो गया, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय औसत 67 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया। केरल, तेलंगाना और दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में कुल मौतों का 90 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया है। आंकड़ों के घटते बढ़ते क्रम संदेह पैदा कर रहे।
ऐसे किया जाता है जन्म-मृत्यु का सर्वेक्षण
भारत में जन्म और मृत्यु की वास्तविक संख्या का अनुमान एक अलग सर्वेक्षण-आधारित प्रक्रिया के माध्यम से लगाया जाता है, जिसे नमूना पंजीकरण प्रणाली या एसआरएस कहा जाता है। उदाहरण के लिए, 2019 में भारत में 83.01 लाख लोगों के मरने का अनुमान था, जिनमें से 92 प्रतिशत यानी 76.41 लाख मौतें सीआरएस में पंजीकृत हुईं। इससे आगे यानि 2020 के लिए एसआरएस डेटा उपलब्ध नहीं है। भारत का कुल मृत्यु पंजीकरण 2019 में 76.41 लाख से बढ़कर 2020 में 81.16 लाख हो गया।
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बीते 24 घंटों में जाने यूपी का हाल
पिछले 24 घंटे में पूरे प्रदेश में 179 नए केस की पुष्टि हुई, जिसमें, गौतमबुद्ध नगर में 56, गाजियाबाद में 37, लखनऊ में 21 नए केस शामिल हैं। इसी अवधि 231 लोग स्वस्थ भी हुए। जिन जिलों में केस अधिक मिल रहे हैं वहां सार्वजनिक स्थानों पर फेस मास्क लगाया जाना अनिवार्य है। इसे लागू कराएं। लोगों को जागरूक करें। टेस्ट की संख्या बढ़ाये जाने की जरूरत है।

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