गरीब महिलाओँ के लिए वरदान हैं आशा हेल्थ वर्कर्स, जानिये कैसे बनें इनका हिस्सा

गरीब महिलाओँ के लिए वरदान हैं आशा हेल्थ वर्कर्स, जानिये कैसे बनें इनका हिस्सा

Mahendra Pratap | Publish: Feb, 15 2018 12:23:33 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

जननी सुरक्षा योजना के लिए मान्याता प्राप्त समाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा (Accredited Social Health Activist) गरीब महिलाओँ को स्वास्थ्य संबंधी सुविधा

लखनऊ. ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं जानकारी के अभाव से दूर कई बार घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। उन्हें कई बातों की जानकारी नहीं होती है। बात सिर्फ यहां खत्म नहीं होती। बल्कि मलेरिया से पीड़ित शिशु और उनकी माताओं को इससे जुड़ी कई बातों की जानकारी नहीं होती। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को जानकारी के अभाव के कारण न जाने कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस संदर्भ में जननी सुरक्षा योजना के लिए मान्याता प्राप्त समाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (Accredited Social Health Activist) जिसे आशा भी कहते हैं, गरीब महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं प्रदान करती हैं।

क्या है आशा हेल्थ वर्कर

आशा हेल्थ वर्कर मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता है, जो गरीब महिलाओँ को स्वास्थ्य सेवाएं देती है। आशा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) द्वारा स्थापित सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं। इस मिशन को 2005 में शुरू किया गया था।

ग्रामीण लोगों, खासकर महिलाओं, पुरुषों एवं किशोरों में स्वास्थ्य सूचना का अभाव पाया जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य आदतों में सुधार लाने और उससे जुड़ी बातों पर ज्ञान देना ‘आशा’ के कार्यों का एक मुख्य अंग है।

भारत में हर गांव में आशा

आशा योजना को शुरू किए जाने का लक्ष्य है कि भारत के हर गांव में इसकी सुविधा दी जाए। 2014 के आंकड़े के मुताबिक 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 8,59,313 उम्मीदवार हैं।

आशा बनने की शर्तें

सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा का हिस्सा बनने के लिए उम्र सीमा 25-45 वर्ष के बीच होनी चाहिए। चाहें शादीशुदा महिलाएं हों या तलाकशुदा महिलाएं, वे आशा का हिस्सा बन सकती हैं। उनका बस गांव का निवासी होना जरूरी है। आशा को विभिन्न समुदाय समूहों, स्वयं सहायता समूहों, आंगनवाड़ी संस्थानों, ब्लॉक नोडल अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी, गांव स्वास्थ्य समिति और ग्राम सभा के चयन के एक कठोर प्रक्रिया के माध्यम से चुना जाता है। इनका काम है ग्रामीण इलाकों की महिलाओँ जो कि स्वास्थ्य संवंधी कई जानकारियों से अनजान हैं, उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी देना।

स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना, कामकाजी परिस्थितियों मे भी स्वास्थ्य का ध्यान देना, मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओँ के बारे में जानकारी और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सेवाओं के समय पर उपयोग की आवश्यक्ता पर समुदाय को जानकारी देना आशा का काम है।

10वीं पास बन सकती हैं आशा

जो महिलाएं आशा की मेम्बर बनना चाहती हैं, उनका 10वीं तक पढ़ा लिखा होना जरूरी है। इनकी चयन प्रक्रिया कुछ इस प्रकार की है कि इन्हें विभिन्न समुदाय समूहों, स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups), आंगनवाड़ी संस्थानों, ब्लॉक नोडल अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी, गांव स्वास्थ्य समिति और ग्राम सभा के कठोर चयन प्रक्रिया से गुजरना होता है। इस लंबी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही ये तय किया जाता है कि आप आशा समुदाय का हिस्सा बन सकती हैं या नहीं।

आशा को मिलती है इतनी सैलरी

आशा वर्कर्स की सैलरी हर राज्य में अलग है। केरल में इनकी मंथली वेतन 7500 रुपये है, तो वहीं तेलंगाना में उन्हें 6000 और करनाटका में आशा वर्कर्स को 5000 रुपये दिए जाते हैं।

आशा का ये है काम

आशा वर्कर्स का काम है कि वे लोगों को स्वच्छता एवं सफाई के संबंध में गुणात्मक जानकारी दें। पोषण एवं संतुलित आहार के संबंध में परामर्श दें। गर्भावस्था के दौरान पूरी देखभाल, प्रसव की तैयारी, सुरक्षित प्रसव का महत्त्व, स्तनपान, टीकाकरण, सम्पूरक आहार, सीमित एवं सुखी परिवार की अवधारणा, बॉंझपन, गर्भपात, स्वास्थ्य प्रतिरक्षा, गर्भनिरोधक उपाय की जानकारी के बारे में बताना। अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे-आयोडीन की कमी, मलेरिया नियंत्रण तथा संचारी रोग आदि से संबंधित कार्य करना एवं समुदाय को परामर्श प्रदान करना भी आशा वर्कर्स की जिम्मेदारी है।

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