प्लाज्मा थेरेपी के बाद भी नहीं बच पाई केजीएमयू में भर्ती डॉक्टर की जान, 15 दिन थे वेंटिलेटर पर

- प्लाज्मा थेरेपी के बाद भी डॉक्टर की गई जान

- उधर, न दवा न डॉक्टर, आगरा के मनोज ने जीती कोरोना से जंग

By: Karishma Lalwani

Published: 10 May 2020, 03:32 PM IST

लखनऊ. कोरोना वायरस (Covid-19) का संक्रमण प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) पर हावी हो रहा है। बीते दिनों लखनऊ के केजीएमयू (KGMU) में भर्ती उरई के डॉक्टर की प्लाज्मा थेरेपी होने के बाद भी जान चली गई। हालांकि, उनकी मौत का कारण यूरीनेरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) बताया गया है। मरीज की कोरोना संक्रमण की दूसरी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी। वहीं मरीज के साथ भर्ती उनकी पत्नी की भी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। महिला के पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

देश में प्लाज्मा थेरेपी के बाद किसी की मौत का यह पहला मामला है। 58 वर्षीय उरई के डॉक्टर पहले ऐसे मरीज थे जिन्हें कोरोना के इलाज के लिए राज्य में प्लाज्मा थेरेपी दी गी थी। मरीज को 26 अप्रैल को प्लाज्मा थेरेपी दी गई थी। इसके 24 घंटे में दो बार डोज दी गयी। शुक्रवार तक उनकी हालत स्थिर थी। लेकिन इस दौरान उन्हें वेंटिलेटर पर ही रखा गया था। थेरेपी के बाद उनके फेंफड़ों में बहुत सुधार आया था। इस दौरान वेंटीलेटर की आवश्यकता भी कम हो गयी थी। लेकिन उनमे यूरेनरी ट्रेक में इंफेक्शन का संक्रमण डेवलप होने के बाद उनकी मौत हो गई। केजीएमयू प्रवक्ता सुधीर कुमार ने बताया कि शनिवार सुबह उनकी डायलिसिस भी की गई थी। इसके लिए उनका पूर्ण उपचार किया गया। उनकी दोनों बार की कोरोना जांच निगेटिव आई थी। वहीं डॉक्टर की पत्नी भी कोरोना पॉजिटिव थी। दोनो का इलाज चल रहा था। दोनो की दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई थी।

कोरोना संक्रमित महिला ने डोनेट किया था प्लाज्मा

उरई के डॉक्टर पहले से मधुमेह के रोगी थे। 26 अप्रैल को जिस महिला ने अपना प्लाज्मा डोनेट किया था, वह लखनऊ की पहली कोरोना संक्रमित महिला है। कोरोना वायरस से संक्रमित महिला ने स्वस्थ होने के बाद अपना प्लाज्मा डोनेट किया था। इस मामले में केजीएमयू के कुलपति एमएलबी भट्ट ने कहा कि डॉक्टर पिछले 14 दिनों से वेंटिलेटर पर थे। डॉक्टर को उच्च रक्तचाप और मधुमेह था, इसलिए वे आइसोलेशन वार्ड में डॉक्टरों के निरंतर निरीक्षण में थे। मरीज हाईरिस्क पर थे। 58 की उम्र में कोरोना से जंग को बेहद संघर्षमय बना दिया था।

बिना दवा और डॉक्टर के जीती कोरोना से जंग

आगरा के कस्बा ककुआ के हार्डवेयर व्यवसाई मनोज अग्रवाल ने बिना दवा व बिना डॉक्टर के कोरोना को शिकस्त दी है। ककुआ में 18 दिन पहले मनोज अग्रवाल पॉजिटिव आए थे। उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में भर्ती किया गया। मनोज ने बताया कि उनकी चार रिपोर्ट निगेटिव आई थी। लिहाजा शनिवार को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था इस दौरान उन्हें सिर्फ क्वारंटाइन रखा गया। अस्पताल में किसी तरह का इलाज नहीं किया गया। सुबह खाने में चावल या दलिया दिया। दोपहर और रात को सादा खाना दिया गया। एक महिला आती थी, जो सफाई आदि करके चली जाती थीं। वही कभी हालचाल पूछ लेती थीं। कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। मरीज में किसी अन्य तरह की परेशानी न देखते हुए उन्हें किसी तरह की दवा भी नहीं दी गई। बिना डॉक्टर और दवा के ही मनोज की तबियत में अपने आप सुधार आता देख डॉक्टर्स ने उन्हें डिस्चार्ज करने का निर्णय लिया। मनोज को जब एंबुलेंस से गांव में छोड़ा गया तो ग्रामीण और ककुआ चौकी के पुलिस स्टाफ ने उन्हें उनके घर की चाबी सौंपी। ताली और थाली बजाकर पूरे गांव ने उनका स्वागत किया।

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Karishma Lalwani
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