KGMU के पल्मोनरी विभाग के पूर्व हेड को राष्ट्रपति ने डॉ. 'बीसी रॉय' नेशनल अवार्ड से किया सम्मानित

KGMU के पल्मोनरी विभाग के पूर्व हेड को राष्ट्रपति ने डॉ. 'बीसी रॉय' नेशनल अवार्ड से किया सम्मानित

Rohit Singh | Publish: Jul, 02 2016 05:37:00 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

उन्हें ये अवार्ड क्षय रोग के क्षेत्र में उकृष्ट योगदान देने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर प्रदान किया गया।  

लखनऊ। भारत में चिकित्सा क्षेत्र में दिए जाने वाले सबसे बड़े अवार्ड में शुमार डॉ. बीसी रॉय नेशनल अवार्ड 2010 से केजीएमयू के पल्मोनरी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सम्मानित किया गया है। उन्हें ये अवार्ड क्षय रोग के क्षेत्र में उकृष्ट योगदान देने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर प्रदान किया गया।  

जिंदगी के 50 वर्ष बीत गए केजीएमयू में
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जीवन के करीब 50 वर्ष केजीएमयू में बीते। वह केजीएमयू के एमबीबीएस 1970 बैच के स्टूडेंट हैं।
- उन्होंने साल 1984 में बतौर फैकल्टी केजीएमयू में ज्वॉइनिंग ली। जिसके बाद 1997 में वह केजीएमयू के टीबी चेस्ट विभाग के हेड बना दिए गए।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद साल 1997 से साल 2011 तक पल्मोनरी विभाग के हेड के रूप में सेवाएं दी।
- 2011 में रिटायर होने के बाद उन्हें सैफई आयुर्विज्ञान संस्थान का डायरेक्टर बना दिया गया। जहां पर उन्होंने डेढ़ साल सेवाएं दी।
- इसके बाद नवंबर 2012 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को वल्लभ भाई चेस्ट इंस्टीट्यूट का डायरेक्टर बना दिया गया। जहां उन्होंने वर्ष 2015 तक सेवाएं दी।
- वर्तमान समय में डॉ. प्रसाद लखनऊ स्थित एरा मेडिकल कॉलेज में तैनात हैं और डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन और मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट विभाग के हेड हैं।

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क्या रही उपलब्धियां
- केजीएमयू के टीबी एवं चेस्ट विभाग को पल्मोनरी विभाग के रूप में स्थापित किया और तमाम आधुनिक इलाज की सुविधाओं को यहां पर लाए।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उत्तर प्रदेश में पल्मोनरी मेडिसिन का जनक कहा जाता है।
- भारत के सबसे बड़े चेस्ट इंस्टीट्यूट सरदार वल्लभ भाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट का डायरेक्टर रह चुके हैं।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के एकमात्र ऐसे डॉक्टर हैं जो चेस्ट एवं टीबी के क्षेत्र की पांच संस्थाओं के प्रेसीडेंट रह चुके हैं, जिनमें इंडियन चेस्ट सोसाइटी आदि शामिल हैं।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद के टीबी एवं चेस्ट विषय पर 235 पब्लिकेशन प्रकाशित हो चुके हैं।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद की इसी विषय पर 7 बुक्स प्रकाशित हो चुकी हैं।
- इंडियन पेशेंट के संदर्भ में टीबी एवं चेस्ट विषय पर पहली बुक प्रकाशित करने का श्रेय इन्ही को जाता है।
- ट्यूबरक्लोसिस पर बुक जिसमें मैनुअल ऑफ ट्यूबरक्लोसिस सहित तीन बुक्स प्रकाशित हो चुकी हैं।

आगरा के डॉ. राजेश्वर दयाल भी हुए सम्मानित
एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश्वर दयाल को भी 2008 के डॉ. बीसी रॉय अवार्ड से सम्मानित किया गया है। बताते चलें कि डॉ. राजेश्वर दयाल से पहले उनके पिता बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस दयाल को 1977 में डॉ. बीसी रॉय अवार्ड से सम्मानित किया गया था। वहीं, 20 साल पहले सर्जन डॉ. एलेहेंस को अवार्ड से सम्मानित किया गया था। डॉ. दयाल ने बताया कि यह बड़ी उपलब्धि है, चिकित्सा के क्षेत्र में काफी काम करना है।
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