हो गया ऐलान, देश भर में सोमवार को मनाई जाएगी ईद

हो गया ऐलान, देश भर में सोमवार को मनाई जाएगी ईद
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शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने बताया कि ईद का चांद रविवार को दिखेगा जिसके बाद सोमवार यानी 26 जून को ईद मनाई जाएगी।

लखनऊ. देश भर में ईद-उल-फितर यानी ईद का त्योहार 26 जून को मनाया जाएगा। शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने बताया कि ईद का चांद रविवार को दिखेगा जिसके बाद सोमवार यानी 26 जून को ईद मनाई जाएगी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि रविवार 25 जून को आखिरी रोजा होगा और 26 जून को ईद मनाई जाएगी। वहीं मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली के मुताबिक रविवार को चांद देखा जाएगा। अगर चांद दिख गया तो 26 जून को ईद मनाई जाएगी।


ईद सबसे बड़ा त्योहार

आपको बता दें कि इस्लाम धर्म में ईद सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। मुस्लिमों के लिए ये एक खास त्योहार होता है और वे इसका इंतजार बहुत उत्सुकता से करते हैं। मुस्लिमों के पाक महीने रमजान के 30वें दिन आखिरी रोजा के बाद चांद देखकर ईद मनाने की परंपरा है। ईद की नमाज से जरूरमंद लोगों को दान दिया जाता है। हिजरी कैलंडर में 10वें महीने की ये पहली तारीख होती है। रमजान महीने की 27वीं रात को शब-ए-क़द्र को कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि कुरान का अवतार इसी दिन हुआ था। इसीलिए इस महीने में कुरान ज्यादा पढ़ी जाती है। हिजरी कैलेण्डर के हिसाब से ईद साल में दो बार आती है। एक ईद को ईद-उल-फितर कहा जाता है तो दूसरी ईद को ईद-उल-जुहा कहते हैं। ईद-उल-जुहा को बकरीद भी कहा जाता है।


अलग-अलग दिन मनाते हैं ईद

आपको जानकर शायद थोड़ी हैरानी होगी कि पूरी दुनिया कभी भी एक ही दिन ईद नहीं मनाती है। हालांकि ईद मनाने की तारीखों में ज्यादा से ज्यादा एक या दो दिन का ही अंतर होता है। उदाहरण के तौर पर सऊदी अरब में ईद कब होगी, इसका फैसला तब किया जाता है जब आम जनता में से कुछ लोगों को चांद नजर आया हो। कई मुस्लिम देशों सऊदी अरब की तय की हुई तारीख पर ही ईद मनाते हैं। लेकिन शिया आबादी वाले देश ईरान में ईद की तारीख का निर्धारण सरकार करती है। जबकि इराक जहां शिया और सुन्नी दोनों मुसलमान रहते हैं, वहां पर दोनों समुदायों के लोग अपने-अपने धार्मिक की नेताओं का अनुसरण करते हैं। जबकि तुर्की ईद के दिन का फैसला खगोल विज्ञान की मदद से करता है और यूरोप में मुसलमान अपने समुदायों के नेताओं के निर्णय का पालन करते हैं।


बढ़ता है आपसी भाईचारा

मुस्लिम जानकारों की अगर मानें तो रमजान का पाक महीना मुसलमानों की जीवन शैली में सुधार और संतुलन बनाने में अहम है। उनका मानना है कि रमजान आपसी भाईचारे को बढ़ाता है। रमजान में सामूहिक रोजा इफ्तार के माध्यम से अपने पास-पड़ोस के लोगों के साथ बैठने का मौका मिलता है, जिससे पारस्परिक संबंधों में मजबूती आती है। रमजान के बाद ईद के दिन भी सभी लोग एक दूसरे से मिलने के लिए उनके घरों में जाते हैं। आपको बता दें कि ईद पर बनाए जाने वाले लजीज व्यंजनों में दूध और खोये का खास महत्व है, क्योंकि सेवइयों में दूध और खोया का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है। 
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