लोकसभा चुनाव का ये बड़ा खेल, खुल सकती थी पोल पट्टी

लोकसभा चुनाव का ये बड़ा खेल, खुल सकती थी पोल पट्टी
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Anil Ankur | Publish: May, 24 2019 08:45:32 AM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

परिणाम से सदमे में आ गए दावे करने वाले

अनिल के. अंकुर
लखनऊ। लोकसभा चुनाव के परिणामो ने यह साफ कर दिया कि बड़ी बड़ी बातें झोकने वालों की पोल पट्टी खुल सकती थी। वे बाल बाल बचे। नहीं समझे आप? मैं बताता हूं। सपा बसपा रालोद के गठबंधन के साथ अगर कांग्रेस भी आ जाती तो भी भाजपा को इतनी सीटें मिलने से कोई रोक नहीं सकता था। ये हम नहीं परिणाम बता रहे हैं।

किसे कितने प्रतिशत मिले वोट

देखिए भाजपा को इस चुनाव में 49.39 प्रतिशत वोट मिले। जबकि इस चुनाव के गठबंधन और कांग्रेस के वोट जोड़े जाएं तो वे 43 प्रतिशत ही होते हैं। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा ने जब यूपी में 73 सीटें जीती थीं उस वक्त 42.30 प्रतिशत वोट मिले थे। जबकि सपा को 22.20 प्रतिशत वोट मिले और उन्होंने पांच सीटें जीती थीं और कांग्रेस को साढ़े सात प्रतिशत वोट मिले थे और कांग्रेस ने दो सीटें जीती थीं। अब देखिए इस बार सपा का 17.85 प्रतिशत वोट मिले और उन्हें सीटें मिली पांच जबकि बसपा को इइस बार 19.40 फीसदी मत हासिल हुए और उन्होंने जीतीं 10 सीटें। कांग्रेस को पिछली बार से एक प्रतिशत वोट कम मिला और उसे एक सीट ही मिल सकी। इससे जाहिर है कि राष्ट्रीय लोकदल, कांग्रेस, सपा और बसपा मिलकर भी भाजपा को परास्त नहीं कर सकते थे। अगर वे मिलते और उन्हें वोट इतने ही प्रतिशत मिलता तो उनकी पोल खुल जाती। प्रेक्षकों का मानना है कि अच्छा हुआ सभी नहीं मिले, वरना कहीं के मुंह दिखाने लायक नहीं रह पाते।

आखिर लाखों में जीतने वाले इस बार हजारों से क्यों जीते
इस बार चुनाव परिणाम में 31 ऐसे लोग हैं जो हजारों मतों से ही जीत पाए हैं। भाजपा एक उम्मीदवार तो डेढ़ सौ वोट से जीता है। 10 हजार से कम वोट पाने वालों की संख्या पांच है। इसमें से श्रावस्ती में बसपा के राम शिरोमणि को छोड़ दिया जाए तो पता चलेगा कि बाकी भाजपा के उम्मीदवार ही हैं। पचास हजार से कम वोटों के अंतर से जीतने वालों में 82 प्रतिशत भाजपा के उम्मीवार हैं।

मतगणना आने के बाद ढूंढे नहीं मिले विपक्षी नेता

चैनलों और चाय की दुकानों में अक्सर बवंडर मचाने वाले सपा, बसपा और कांग्रेस के नेता बीती शाम से गायब हैं। शुक्रवार की सुबह वे मॉर्निंग वॉक पर भी नहीं गए। चाय के चौबारे उनके बगैर खाली दिखे।

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