आम आदमी को लग सकता है महंगी बिजली का करंट, बिजली दर बढ़ाने की तैयारी

- 4 से 5 फीसदी तक बिजली की दरें बढ़ाने की तैयारी
- यूपी पॉवर कारपोरेशन राज्य विद्युत निगम आयोग के स्लैब के नये ढांचे का प्रस्ताव भेज सकता है

By: Hariom Dwivedi

Updated: 01 Aug 2020, 03:34 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में बिजली महंगी करने की कवायद शुरू हो गई है। पावर कार्पोरेशन नये स्लैब का ढांचा तैयार कर राज्य विद्युत निगम आयोग भेजने की तैयारियों में जुटा है। वर्ष 2020-21 में पावर कॉरपोरेशन उन क्षेत्रों से वसूली को बढ़ाना चाहता है, जहां ज्यादा बिजली सप्लाई के बाद भी रेवेन्यू कम है। इसके अलावा कॉरपोरेशन की तरफ से शहरी बिजली उपभोक्ताओं की दरों में भी 4 से 5 फीसदी की औसत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया जा सकता है। आयोग अगर कॉर्पोरेशन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है तो परोक्ष रूप से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ सकता है। ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ-साथ शहरी उपभोक्ताओं को बिजली के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इससे पहले सितंबर 2019 में बिजली दरों में औसतन 12 फीसदी की बढोतरी हुई थी। इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के लिए की गई थी जोकि करीब 25 प्रतिशत थी।

मौजूदा समय में सभी श्रेणियों के कुल 80 स्लैब हैं। इसे 40-50 करने पर विचार किया जा रहा है। घरेलू श्रेणी (बीपीएल श्रेणी को छोड़कर) में इस समय दरों के चार स्लैब हैं, जिन्हें दो करने की तैयारी है। इसी तरह कामर्शियल, कृषि, औद्योगिक व अन्य श्रेणियों के स्लैब भी कम किए जाएंगे। जानकारों का मानना है कि स्लैब कम होने से परोक्ष रूप से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ सकता है।

सरकारी व निजी दोनों शिक्षण संस्थानों को राहत
यूपी सरकार ने वर्तमान में शिक्षण संस्थाओं को सार्वजनिक व निजी श्रेणी की संस्थाओं में रखी गई हैं। अस्पताल, नर्सिंग होम, कोचिंग सेंटर्स को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। सरकार इन्हें राहत देने की तैयारी कर रही है। धार्मिक आयोजनों के लिए अस्थाई कनेक्शन लेना भी 50 फीसदी तक सस्ता हो सकता है। इनमें रामलीला, दुर्गापूजा, कांवड यात्रा, देवी जागरण जैसे धार्मिक आयोजन शामिल हैं।

कॉमर्शियल दरों में नहीं होगा बदलाव
मिली जानकारी के मुताबिक, पॉवर कार्पोरेशन की तरफ से तैयार प्रस्ताव में घरेलू और ग्रामीण उपभोक्ताओं की दरों बढोतरी का प्रस्ताव है, लेकिन कामर्शियल उपभोक्ताओं की दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। ऐसा करने के पीछे सरकार की मंशा औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की है।

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