रिवर फ्रंट घोटाले की जांच पूरी, रिवर फ्रंट घोटाले में अखिलेश यादव को घेरने की कवायद

समाजवादी पार्टी शासन काल में हुए गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है।

By: Abhishek Gupta

Updated: 27 Nov 2019, 02:54 PM IST

लखनऊ. समाजवादी पार्टी शासन काल में हुए गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। सीबीआई अब अलग-अलग टेंडर में हुए घपले की अलग-अलग एफआईआर दर्ज करेगी। एफआईआर दर्ज करने के लिए सीबीआई ने अपने मुख्यालय से इजाजत मांगी है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में आधा दर्जन इंजीनियरों का फंसना तय माना जा रहा है। इन सभी इंजीनियरों का नाम सीबीआई की पहले दर्ज एफआईआर में भी है। बताया जा रहा है कि सपा सरकार में शुरू हुए रिवर फ्रंट प्रॉजेक्ट की जांच की आंच तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव सहित कई बड़ों तक पहुंच सकती है और इस जांच के सहारे सरकार उनको घेरने की कवायद में जुटी है। गौरतलब है कि जिस समय रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट का कार्य शुरू हुआ उस समय शिवपाल सिंह यादव के पास सिंचाई मंत्री का भी प्रभार था।

दरअसल योगी सरकार के सत्ता में आने के फौरन बाद पूर्व की सपा सरकार के महात्वाकांक्षी प्रोजैक्ट गोमती रिवर फ्रंट में घोटाले की बात पर जांच के आदेश दिए गए। आरोप लगा कि 1513 करोड़ की परियोजना में 1437 करोड़ रूपया खर्च होने के बावजूद भी काम 65 फीसदी ही पूरा किया गया। यही नहीं परियोजना की 95 फीसदी रकम निकाल ली गई। मामले में योगी सरकार ने मई 2017 में रिटायर्ड जज आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग से जांच कराई। जांच रिपोर्ट में कई खामियां उजागर हुईं। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर योगी सरकार ने सीबीआई जांच के लिए केंद्र को पत्र भेज दिया।

बता दें दो साल पहले गोमती नगर थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। कहा जा रहा है कि सीबीआई की प्रारंभिक जांच में टेंडर देने में घपले के सबूत मिले हैं। आरोप है कि गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण कार्य से जुड़ें इंजीनियरों पर दागी कम्पनियों को काम देने, विदेशों से मंहगा समान खरीदने, चैनलाइजेशन के कार्य में घोटाला करने, नेताओं और अधिकारियों के विेदेश दौरे में फिजूलखर्ची करने सहित वित्तीय लेन देन में घोटाला करने और नक्शे के अनुसार कार्य नहीं कराने का आरोप है। इस मामले में सिंचाई विभाग के 8 इजीनियरों के खिलाफ पुलिस, सीबीआई और ईडी मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है। इनमें तत्कालीन चीफ इंजीनियर गोलेश चन्द्र गर्ग, एसएन शर्मा, काजिम अली, शिवमंगल सिंह, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव, सुरेन्द्र यादव शामिल हैं।

विवादों में घिरा था अखिलेश सरकार का प्रॉजेक्ट
अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी सरकार का यह प्रॉजेक्ट निर्माण के साथ ही विवादों में घिर गया था। प्रॉजेक्ट की लागत तीन गुना तक बढ़ाने, दागी कंपनियों को काम देने, विदेश से महंगा सामान खरीदने, चैनलाइजेशन के काम में घोटाले, नेताओं और अधिकारियों के विदेश दौरे पर फिजूलखर्ची करने सहित वित्तीय लेनेदेन के तमाम आरोप लगे थे। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही इसकी जांच के आदेश दिए थे।

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