किसानाें का दुख, हजाराें कराेड़ की फसल उपजा रहे, फिर भी कम हाेने के बजाय हर साल बढ़ता जा रहा बैंकाें का कर्ज

  • किसानों को नहीं मिलता फसलों का सही दाम
  • फसलों का लाभकारी मूल्य किसान को नहीं मिल पा रहा

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. किसान और कर्ज का जैसे चोली दामन का साथ हो गया है। खेती के तरीके बदल लें और अच्छी फसल उपजा लें, लेकिन कर्ज है कि उतरता ही नहीं, बल्कि बढ़ता ही चला जा रहा है। बिजनौर के किसानों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। 2015 में इन किसानों पर बैंकों का कर्ज 3840 रुपये था जो 2020 में बढ़कर 5384 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। 2019 में तो जितना कर्ज था उससे ज्यादा की किसानों ने अपनी फसल बेची थी बावजूद इसके 2020 में कर्ज घटने के बजाय और बढ़ ही गया।


बिजनौर जिले में करीब 4 लाख किसान बताए जाते हैं। इन किसानों पर एक तरह से दोहरी मार पड़ रही है। यहां कि किसानों ने पिछले पेराई सत्र में अकेले 3700 करोड़ का गन्ना चीनी मिलों को बेच डाला और इस सत्र में भी 950 करोड़ रुपये गन्ने का भुगतान पाया। क्रेशरों पर भी कई लाख क्विंटल गन्ना बेचा तो गेहूं, चावल की भी बिक्री की। इन सबको मिलाकर 5 हजार करोड़ से ज्यादा की फसल बेचने के बाद भी 2019 में किसानों पर बैंक का चढ़ा 5 हजार 63 करोड़ का कर्ज अब बढ़कर 5 हजार 384 करोड़ हो चुका है। किसान नेता इसके पीछे खेती में बढ़े उत्पादन लागत व फसलों का सही और समय पर भुगतान न मिलने को कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से ब्याज चढ़ता जाता है।


पिछले पांच-छह सालों में किसानों के कर्ज की स्थिति पर नजर डालें तो पता चलता है कि 2015 में किसानों पर बैंक का कर्ज 3840 करोड़ रुपये था। इसमें 2016 में तो मामूली कमी आई और यह 3744 करोड़ रहा, लेकिन उसके बाद से इसमें निरंतर बढ़ोत्तरी जारी है। 2017 में किसानों का कर्ज बढ़कर 4300 करोड़ तो 2018 में 4500 करोड़ रुपये चला गया। 2019 में तो किसानों ने कर्ज 5063 के मुकाबले 5 हजार करोड़ से ज्यादा की फसल बेच दी। पर बैंकों का कर्ज कम होने के बजाय यह बढ़कर 5384 करोड़ पर जा पहुंचा है।

 

किसान नेताओं का कहना है कि एमएसपी पर बिक्री की गारंटी न होने से किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दबा जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन के नेता दिगंबर सिंह के मुताबिक किसान को फसल का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा। सरकार को किसानों को फसल का डेढ़गुना दाम देना चाहिये और एमएसपी पर खरीद की गारंटी होनी चाहिये।

रफतउद्दीन फरीद
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