भाजपा की पहली पसंद बसपा के बागी, 4 को दिया टिकट.. महागठबंधन को बड़ा झटका

भाजपा की पहली पसंद बसपा के बागी, 4 को दिया टिकट.. महागठबंधन को बड़ा झटका

Ruchi Sharma | Publish: Mar, 25 2019 01:03:55 PM (IST) | Updated: Mar, 25 2019 05:46:18 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

2017 के विधान सभा चुनावो में भाजपा के निशाने पर बसपा थी और 2019 के लोकसभा चुनावो में भी बसपा ही भाजपा के निशाने पर है, अपनों को भुलाया दूसरों को अपनाया के सिद्दांत पर अपने उम्मीदवारों की पहली सूची में छह वर्तमान सांसदों का टिकट काटकर उनकी जगह बसपा से आए 4 नेताओं को उम्मीदवार बनाया

पत्रिका इन्डेप्थ स्टोरी
लखनऊ. साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रयोग किया था। लोकसभा चुनाव में भी पार्टी यह प्रयोग दोहरा रहा है। भाजपा के निशाने पर तब भी बसपा थी, अब भी बसपा है। 2017 में बसपा के कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक आदि मायावती का साथ छोडकऱ भाजपा में आए थे। पार्टी ने ने इन नेताओं को न केवल स्वागत किया बल्कि उन्हें विधानसभा का टिकट दिया और चुनाव जीतने पर मंंत्री भी बनाया। कमोबेश यही हाल लोकसभा चुनाव में भी है। भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची में छह वर्तमान सांसदों का टिकट काटकर उनकी जगह बसपा से आए 4 नेताओं को उम्मीदवार बनाया है। अभी कई और बसपाई भी भाजपा में शामिल होने के इंतजार में हैं। टिकट की हरी झंडी मिलते ही वे बसपा को बाय-बाय कह देंगे।


4 आरक्षित सीटों पर बदलाव


भाजपा के जिन छह वर्तमान सांसदों का टिकट कटा है उनमें चार आरक्षित सीटों से जीते थे। आगरा में रामशंकर कठेरिया की जगह उम्मीदवार बनाए गए एसपी सिंह बघेल यूं तो अभी योगी सरकार में मंत्री हैं लेकिन उनकी पृष्ठभूमि भी बसपा की रही है। वे बसपा से राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। हालांकि, आगरा सुरक्षित सीट से उनकी उम्मीदवारी को लेकर विवाद है। बघेल पिछड़ी जाति की गड़रिया बिरादरी से आते हैं। लेकिन, धांगर सर्टिफिकेट लेकर वह अनुसूचित जाति के बन गए हैं।


शाहजहांपुर में वर्तमान सांसद और केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज का टिकट काटकर बसपा से आए अरुण सागर को उम्मीदवार बनाया गया है। कभी अरुण सागर बसपा अध्यक्ष के बहुत करीबी हुआ करते थे। वह बसपा की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।


सीतापुर जिले की मिश्रिख सुरक्षित सीट की भाजपा सांसद अंजू बाला का भी टिकट भाजपा ने काट दिया है। यहां से अशोक रावत इस बार कमल चुनाव चिन्ह पर लड़ेगें। अशोक भी पुराने बसपाई रह चुके हैं। यह 2009 में बसपा के टिकट पर सांसद थे। हाथी की सवारी छोडकऱ यह कमल के सहारे इस बार मैदान में होंगे।


हरदोई भी सुरक्षित सीट है। भाजपा ने यहां से भी अपने वर्तमान सांसद अंशुल वर्मा का टिकट काटकर जय प्रकाश रावत को प्रत्याशी घोषित किया है। जयप्रकाश भी कभी मायावती के प्रमुख सिपहसालारों में हुआ करते थे। यह पिछला लोकसभा चुनाव मिश्रिख से बसपा के टिकट पर लड़े थे। लेकिन हार गए थे। इसके पहले मायावती ने इन्हें राज्यसभा सांसद भी बनाया था। सालभर पहले रावत बसपाई से भाजपाई हो गए थे।


बदायूं लोकसभा सीट पर रोचक उलटफेर हुआ है। यहां से पिछला लोकसभा चुनाव लड़ चुके भाजपा प्रत्याशी वागीश पाठक का इस बार भाजपा ने बदल दिया है। यहां भी बसपा के धुरंधर नेता रहे स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्या को भाजपा उम्मीदवार बनाया गया है। संघमित्रा ने पिछला लोकसभा चुनाव बसपा के टिकट पर मैनपुरी से लड़ा था। खास बात यह है कि संघमित्रा इसके पहले पडरौना में राजनीतिक रूप से सक्रिय थीं। अब उन्हें बंदायू भेज दिया गया है। इसी तरह फतेहपुर सीकरी में वर्तमान सांसद बाबू लाल का टिकट काटकर राज कुमार चहर को प्रत्याशी बनाया गया है।


कौन कहां प्रत्याशी


1.आगरा-एसपी सिंह बघेल-पूर्व बसपा राज्यसभा सांसद
2.शाहजहांपुर-अरुण सागर-पूर्व बसपा एलएलए और मंत्री
3.मिश्रिख-अशोक रावत-पूर्व बसपा सांसद
4.हरदोई-जयप्रकाश रावत-पूर्व बसपा सांसद
5.बदायूं-संघमित्रा मौर्या-पूर्व बसपा लोस प्रत्याशी
6.फजेहपुर सीकरी-राजकुमार चहर
बसपा से लोगों को तरजीह क्यों
भाजपा ने बसपा से आए नेताओं को ज्यादा तरजीह दी है। पार्टी पदाधिकारियों का मानना है बसपा उम्मीदवारों को अपना ठोस जनाधार है। ऐसे में उनके साथ बसपा के कुछ कोर वोटबैंक अपने नेता के साथ ट्रांसफर होगें। इससे बसपा के वोटबैंक में सेंध लगेगी। भाजपा के वोट तो पार्टी के साथ रहेंगे ही ऐसे में जीत की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।


असंतोष की लहर भी


भाजपा में बाहरियों को टिकट दिए जाने को लेकर क्षेत्र में असंतोष भी देखा जा रहा है। जिन नेताओं के टिकट कटे हैं वे अभी खुलकर तो नहीं बोल रहे हैं लेकिन उनके कार्यकर्ताओं में असंतोष है। उनका कहना है कि कल तक जिनका वे विरोध करते थे आज उनके साथ गलबहियां कैसे की जाएं।

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