राज्यपाल ने पुस्तक का विमोचन किया,जाने क्या हैं इस पुस्तक में ख़ास

राज्यपाल ने पुस्तक का विमोचन किया,जाने क्या हैं इस पुस्तक में ख़ास

Ritesh Singh | Publish: Jul, 20 2019 06:49:57 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

उच्च न्यायालय और केन्द्रीय विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों का भी नाम परिवर्तन करने की आवश्यकता है।

लखनऊः उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने इलाहाबाद संग्रहालय, प्रयागराज की पुस्तक ‘प्रयागराज: दैट वाॅज इलाहाबाद-रिट्ररोस्पेक्ट एण्ड प्रोस्पेक्ट’ का राजभवन में लोकार्पण किया। राज्यपाल ने पुस्तक के शीर्षक ‘प्रयागराज: दैट वाॅज इलाहाबाद-रिट्ररोस्पेक्ट एण्ड प्रोस्पेक्ट’ की सराहना करते हुये कहा कि पुस्तक का नाम अपने आप में कालचक्र के परिवर्तन का है। प्रयाग, प्रयागराज एवं इलाहाबाद केवल नाम नहीं हैं बल्कि अपने आप में इतिहास को समोये हुये है। जैसे मेरे शहर मुंबई का असली नाम 1992 में वापस रखा गया। ठीक उसी प्रकार प्रयागराज को उसका पौराणिक नाम वापस मिला है। संग्रहालय का नाम बदलने के लिये भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि उसी प्रकार प्रयागराज स्थित उच्च न्यायालय और केन्द्रीय विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों का भी नाम परिवर्तन करने की आवश्यकता है।

राम नाईक ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि मेरा कार्यकाल समाप्त हो रहा है। आनन्दीबेन पटेल प्रदेश की नई राज्यपाल होंगी। पुस्तक का राजभवन में विमोचन अंतिम कार्यक्रम है जो मेरे लिये यादगार रहेगा। अब तक 1857 सार्वजनिक कार्यक्रम किये हैं जिसमें राजभवन में 219 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गत 17 जुलाई को स्वामी विवेकानन्द की भव्य प्रतिमा का अनावरण राजभवन प्रांगण में सम्पन्न हुआ। पुस्तक में 1955 के बाद के अन्य विषयों एवं हालही में सम्पन्न हुये कुम्भ को जोड़कर अद्यतन सूचनाओं को संग्रहित किया गया है जो दृष्टि सुख देने वाली बात हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक का अच्छा कलेवर पाठकों को आकृष्ट करता है।

राज्यपाल ने सुझाव देते हुये कहा कि प्रयागराज के महत्व को देखते हुये आम पाठकों के लिये पुस्तक का हिन्दी संस्करण भी शीघ्र आना चाहिए तथा यह भी प्रयास हो कि संविधान में जितनी भाषाएं हैं उतनी भाषाओं में पुस्तक का अनुवाद किया जाये। अपनी पुस्तक ‘चरैवेति!चरैवेति!!’ की चर्चा करते हुये राज्यपाल ने कहा कि जब उनकी पुस्तक 11 भाषाओं मराठी, हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, गुजराती, संस्कृत, सिंधी, अरबी, फारसी, जर्मन एवं असमिया सहित ब्रेल लिपि में अंग्रेजी, हिन्दी एवं मराठी भाषा में प्रकाशित हो सकती है तो प्रयागराज पर आधारित पुस्तक को अन्य भाषाओं में भी प्रकाशित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुस्तक के माध्यम से समाज को नई दिशा मिलेगी एवं प्रयागराज का नाम और काम आगे जायेगा। हेमन्त राव अपर मुख्य सचिव ने कहा कि पुस्तक अपने आप में ‘विजुअल ट्रीट’ होने के साथ-साथ पढ़ने में भी रूचिपूर्ण है। पर्यटकों के लिये यह एक मार्गदर्शक के समान है जिसमें पाठकों को कुछ नई बाते मिलेंगी।

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