इस दिन है होलिका दहन, ज्योतिषाचार्य ने बताया होलिका दहन की पूजा का शुभ मुहूर्त, समय और सामग्री

इस दिन है होलिका दहन, ज्योतिषाचार्य ने बताया होलिका दहन की पूजा का शुभ मुहूर्त, समय और सामग्री

Neeraj Patel | Publish: Mar, 12 2019 04:53:21 PM (IST) | Updated: Mar, 20 2019 10:45:45 AM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

हिन्दू धर्म में कई वर्षों से चली आ रही होलिका दहन करने की परम्परा, जानें कब है होलिका दहन (Kab Hai Holika Dahan) और क्या है शुभ समय

यूपी. हिन्दू धर्म में होलिका दहन करने की परम्परा कई वर्षों से चली आ रही है। होलिका दहन की पूजा (Holika Dahan Ki Puja) हर साल होली (Holi) के त्यौहार से एक दिन पहले फाल्गुन माह में पूर्णिमा के दिन बड़े धूमधाम से की जाती है। इस बार भी बुराई का अन्त करने के लिए साल 2019 में होलिका दहन किया जाएगा। जिससे बुराई पर अच्छाई की विजय होगी।

होलिका दहन क्यों किया जाता है (Holika Dahan Kyo Kiya Jata Hai)

होलिका दहन होलिका भक्त प्रहलाद को लेकर आग में बैठी थी तब होलिका खुद जलकर भस्म हो गई थी और भक्त प्रहलाद बच गया था क्योंकि प्रहलाद भगवान विष्णू का भक्त था और उनकी पूजा करता था। तभी से माना जाता है कि होलिका का दहन करने से बुराई का अन्त होता है और अच्छाई की शुरूआत होती है। इसलिए हरसाल बुराई अन्त करने के लिए होलिका दहन किया जाता है।

होलिका दहन 2019 में कब है (Holika Dahan 2019 Me Kab Hai)

ज्योतिषाचार्य राजेन्द्र तिवारी ने बताया कि होलिका दहन 2019 में 20 मार्च दिन बुधवार को है। हिन्दू धर्म में होली के त्यौहार से एक दिन पहले बड़े ही धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन होलिका को दहन करने की पूरी तैयारियां करके शुभ समय में पूजा की जाती है और उसके दूसरे दिन होली का उत्सव मनाया जाता है।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त (Holika Dahan Ka Shubh Muhurat)

शास्त्रों के अनुसार ज्योतिषाचार्य राजेन्द्र तिवारी ने बताया कि साल 2019 की होली के त्यौहार से एक दिन पहले शाम 20:57 से 00:28 मिनट तक होलिका दहन का शुभ समय और शुभ मुहूर्त बन रहा है।

होलिका दहन की पूजा विधि (Holika Dahan Ki Puja Vidhi)

1. होलिका दहन की पूजा की सामग्री में फूल, चावल, सूत, बताशे, हल्दी, गेंहू की बाली और पानी का कलश जरूर शामिल करें।
2. पूजा की सामग्री के साथ होलिका दहन के स्थान पर जाएं।
3. पूजा के दौरान अपना, पिता और गोत्र का नाम के साथ बुराई के अन्त के लिए संकल्प लें।
4. भगवान विष्णू का ध्यान करें और जल अर्पित करें।
5. होलिका दहन पूजा के समय इस मंत्र का जाप करें।
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।

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होलिका दहन की कथ? holika dahan Dahan Ki Katha)

ज्योतिषाचार्य राजेन्द्र तिवारी ने होलिका दहन की पूरी कथा भी बताई कि भक्त प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप अपने बेटे से बहुत नफरत करते थे क्योंकि उनका बेटा भगवान विष्णु का भक्त था और उनका पूजा करता था लेकिन प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप अपने आप को भगवान मानते थे इसलिए वह बेटे से अपनी पूजा कराना चाहते थें। प्रह्लाद केवल भगवान विष्णु की पूजा करता रहा और अपने पिता को भी कई बार समझाने की कोशिश की कि वह अपने आप को भगवान का दर्जा न दें लेकिन उसकी बात पिता को पसन्द नहीं आई।

पिता हिरण्यकश्यप अपने बेटे प्रह्लाद पर हजारों हमले करवाए लेकिन सारे प्रयास असफल रहे। इसके बाद हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को भेजा कि वह प्रह्लाद को आग में लेकर बैठ जाए। इसके बाद वह प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई लेकिन प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका उसी आग में जलकर भस्म हो गई। तभी से माना जाता है कि होलिका दहन करने से बुराई का अन्त होता है। इसलिए हर साल होलिका दहन करने के बाद होली का त्यौहार रंगों से उल्लास के साथ मनाया जाता है।

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