कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन को ज्यादा समय देखेंगे तो सूख जाएगा आंखों का पानी

जो बच्चे ऑनलाइन क्लास में पढ़ाई कर रहे हैं या फिर मोबाइल स्क्रीन पर बहुत ज्यादा समय बिता रहे हैं उन्हें नेत्र रोग विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि वे कम से कम हर आधे घंटे के बाद कुछ सेकंड के लिए दूर देखें और आंखें झपकाएं। अन्यथा आंखों का पानी सूखने की समस्या होगी।

By: Mahendra Pratap

Published: 14 Oct 2021, 03:51 PM IST

लखनऊ. (पत्रिका न्यूज नेटवर्क). ऑनलाइन कक्षाओं के लिए कंप्यूटर और मोबाइल का उपयोग करने वाले छात्रों के सामने एक गंभीर समस्या है। उनकी नजर तेजी के साथ कमजोर हो रही है। पिछले डेढ़ साल में कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर ज्यादा वक्त बिताने की वजह से लोगों की आंखों का पानी सूखने की समस्या बढ़ गयी है।लॉकडाउन की बोरियत दूर करने के कारण लोग मोबाइल देखते रहे इस कारण चश्मा लगने के मामले में दोगुना बढ़ोतरी हुई है।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के नेत्र विज्ञान विभाग के डॉ अरुम शर्मा बताते हैं कि जो छात्र पहले से चश्मा पहनते हैं, उन्हें इन डेढ़ सालों में आंखों की समस्या ज्यादा बढ़ गयी है। सूखी आंखों की समस्या बढ़ी है। जो लोग चश्मे का प्रयोग नहीं करते उन्हें भी आंख की कोई न कोई समस्या बढ़ी है। उनका कहना है कि इसकी वजह ऑनलाइन कक्षाओं में नियमित रूप से पढ़ाई है या फिर लॉकडाउन में घरों में कैद रहकर ज्यादा से ज्यादा समय कंप्यूटर और मोबाइल की स्क्रीन पर समय बिताना है। उन्होंने छात्रों को यह सलाह दी है कि वे कम से कम हर आधे घंटे के बाद कुछ सेकंड के लिए दूर देखें और आंखें झपकाएं।

लाइट बंद कर न देखें मोबाइल
डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों रात में सेल फोन पर फिल्में या शो देखने की आदत विशेष रूप से लाइट बंद करने के बाद बढ़ गई है। ऐसे समय में शरीर की मुद्रा शिथिल रहती है। इसका असर आंखों पर पड़ता है। यह गलत प्रवृत्ति है। केजीएमयू में कम्युनिटी आई बैंक के प्रमुख डॉ शर्मा ने बताया कि कंप्यूटर पर काम करते समय स्क्रीन छाती के स्तर पर होनी चाहिए न कि आंखों के स्तर पर। इससे आंखों के रोग से कुछ हद तक बचा जा सकता है। इस समय न केवल बच्चे या युवा बल्कि बुजुर्ग भी लॉकडाउन की बोरियत को दूर करने के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने लगे हैं। स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से आंखों की समस्याएं पैदा रही हंै। एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल डॉक्टर्स के महासचिव डॉ. अभिषेक शुक्ला कहते हैं कि "कई वृद्ध लोगों ने अपने चश्मे के लिए नंबर संशोधित किया क्योंकि सेल फोन के कारण उनकी दृष्टि खराब हो गई।

भारत और चीन में सबसे ज्यादा नेत्र रोगी
प्रकाश नेत्र केंद्र, लखनऊ में चिकित्सा निदेशक और मुख्य विटेरोरेटिनल सलाहकार डॉ शोभित चावला के अनुसार, चीन और भारत मिलकर दुनिया के कुल अंधेपन और दृष्टि हानि के साथ दृष्टि हानि का 49 प्रतिशत हिस्सा हैं। यानी चीन और भारत में सबसे ज्यादा लोग नेत्र रोग से पीडि़त हैं। डॉ. चावला बताते हैं कि यह एक महीने में लगभग 30-35 प्रतिशत रेटिना रोग के रोगियों, 15 प्रतिशत ग्लूकोमा रोगियों और 50 प्रतिशत मोतियाबिंद के रोगियों को देखते हैं। तीनों स्थितियों में समय से डॉक्टर के पास पहुंचने पर निदान और उपचार है। समय पर उपचार न करवाने पर नेत्र हानि हो सकती है।

सूखी आंखों की समस्या बढ़ रही
केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग के डॉ सिद्धार्थ के अनुसार, ओपीडी में सूखी आंखों जैसी समस्याओं के आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ऐसे में रेटिना की बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।

आंखों को सुरक्षित रखने के टिप्स
-हर आधे घंटे में लगातार स्क्रीन देखते समय आंखों को ब्रेक दें
-लैपटॉप या मोबाइल को चेस्ट लेवल पर रखें
-चश्मा पहनने पर हर साल आंखों की जांच कराएं
-कोई समस्या न हो तो भी लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करने से बचें। यदि स्क्रीन देखना जरूरी है तो साल में एक बार आंखों की जांच करवानी चाहिए।

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