यूपी में वेंटिलेटर समेत अन्य जरूरी उपकरणों की बढ़ी मांग, कोविड-19 की रोकथाम के लिए 17.25 करोड़ रुपए आवंटित

कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने के लिए आईआईटी बीएचयू ने बनाया हाई क्वालिटी सैनिटाइजर

यूपी. दुनिया में कोरोना वायरस के बढ़ते मरीजों के चलते उत्तर प्रदेश में भी वेंटिलेटर समेत अन्य जरूरी उपकरणों की मांग बढ़ गई है। सर्वाधिक मौतों का सामना कर चुका इटली वेंटिलेटर की कमी से जूझ रहा है और दूसरे देशों से सहयोग की मांग कर रहा है। वहीं भारत में भी एक माह में पचास हजार वेंटिलेटर की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे हालाताें को देखते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर आगे आया है और पोर्टेबल वेंटिलेटर समेत अन्य जरूरी उपकरणों की तकनीक विकसित करने पर काम शुरू कर दिया है। पोर्टेबल वेंटिलेटर के लिए संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर नारायणा इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डिक साइंस, बेंगलुरु के विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करेंगे। प्रोटोटाइप अगले सात दिन में बन जाएगा। इसके बाद दो पुरातन छात्रों की कंपनी एक माह में एक हजार पोर्टेबल वेंटीलेटर तैयार करेगी।

कोविड-19 की रोकथाम के लिए 17.25 करोड़ रुपए आवंटित
उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस से फैले संक्रमण (कोविड-19) को राज्य आपदा आपदा घोषित कर दिया गया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की स्वीकृति के बाद अधिसूचना जारी कर दी गई है। किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने राज्य आपदा मोचक निधि से 272.5 करोड़ रुपए भी जारी कर दिए हैं। इसके अलावा दिहाड़ी मजदूरों के भरण-पोषण के लिए विभिन्न जिलों को 235 करोड़ रुपये जारी किये गए हैं। पात्र व्यक्तियों के खाते में 1000 रुपए भी भेजे जा रहे हैं। इसके साथ 10 हजार वाहनों के जरिए घर-घर राशन भेजने की भी व्यवस्था की जा रही है। युक्त संजय गोयल ने बताया कि कोविड-19 की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर अति आवश्यक चिकित्सीय सामग्री और उपकरण आदि खरीदने के लिए सभी जिलों को 17.25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं ताकि जिला स्तर पर आवश्यक सामग्री की आपूर्ति सुचारु रूप से सुनिश्चित की जा सके।

कोरोना मरीजों एक माह में 50 हजार पोर्टेबल वेंटीलेटर की आवश्यकता
आइआइटी के पुरातन छात्र निखिल कुरेले और हर्षित राठौर ने संस्थान के इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन हब के सहयोग से एक कंपनी बनाई थी। इसी कंपनी ने पोर्टेबल वेंटीलेटर का आइडिया विकसित किया था। वेंटीलेटर के प्रोटोटाइप मॉडल पर मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रो. समीर खांडेकर, प्रो. अरुण साहा, प्रो. जे.राम कुमार, प्रो. विशाख भट्टाचार्य काम करेंगे, जबकि तकनीकी सहयोग बेंगलुरु के डॉ. दीपक देंगे। बेंगलुरु 7 दिन में 1000 पोर्टेबल वेंटीलेटर बनाकर देंगा। इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन हब के इंचार्ज प्रो. अमिताभ बंद्धोपाध्याय के मुताबिक भारत में स्थिति को देखते हुए एक माह में 50 हजार पोर्टेबल वेंटीलेटर की आवश्यकता है। आइआइटी कानपुर एक सप्ताह में एक हजार वेंटीलेटर तैयार करेगा। इसमें कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।

कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने के लिए आईआईटी बीएचयू ने बनाया हाई क्वालिटी सैनिटाइजर
उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में फैली वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ जंग लड़ने के लिए आईआईटी (बीएचयू) ने भी कमर कस ली है। लगातार सैनिटाइजर की कमी को देखते हुए आईआईटी बीएचयू ने हाई क्वालिटी सैनिटाइजर तैयार कर लिया है। जो शहर के तमाम विभागों में बांटा जा रहा है। आईआईटी (बीएचयू) ने इस बात पर जोर दिया कि किस तरह से बढ़ते कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को रोका जा सके। एक सप्ताह के भीतर सैकडों लीटर हाई क़्वालिटी का सैनिटाइजर तैयार कराकर जिलाधिकारी, डीआईजी और सीआरपीएफ कार्यालयों और बीएचयू परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मियों को वितरित कराया गया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने भी प्रयासों की सराहना की। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने भी इसे बेहतर माना है और सेनिटाइजर बनाने की विधि भी मांगी है ताकि प्रशासन इसे कम दामों में तैयार कराकर आम जनता को पहुंचा सके।

कोरोना के चलते यूपी में कैदियों को मिलेगी पैरोल
भारत में कोरोना के प्रकोप को सोशल डिस्टेंसिंग से ही खत्म किया जा सकता है। इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने अब जेलों में बंद कैदियों की पैरोल के बारे महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उसी निर्णय के तहत पूरे यूपी की जेलों में यह कवायद शुरू हो गई है। इसी क्रम में सीतापुर जेल में भी बंद 133 कैदियों को जेल से पैरोल पर छोडने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में जेल अधीक्षक ने सीतापुर जेल में बंद 133 कैदियों की सूची फिल्टर कर मुख्यालय भेज दी है। जेल अधीक्षक का कहना है कि मुख्यालय से निर्णय आने के बाद इन कैदियों से जमानत लेकर इम्हें पैरोल पर छोड़ दिया जाएगा और पैरोल की अंतिम तारीख पर उन कैदियों को जेल में अपनी आमद दर्ज करवानी होगी।

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Neeraj Patel
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