Women's Day:इनको 'ठोकर' ने जिंदगी जीना सीखा दिया और अब संवार रही हैं लड़कियों का भविष्य

Women's Day:इनको 'ठोकर' ने जिंदगी जीना सीखा दिया और अब संवार रही हैं लड़कियों का भविष्य
Womens day 2017

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जानें इन महिलाओं के जज्बे की कहानियां

लखनऊ.महिलाएं शक्तिपुंज की तरह होती हैं। निर्बल और लाचार सी लगने वाली महिला कब जीवन में सफलता को छू ले यह कोई सोच भी नहीं सकता। कभी घर दहलीज में काम करके खुद को वह साबित करती हैं तो कभी वह दहलीज लांघ कर अपनी उड़ान को पंख देती है। ऐसी ही शहर की महिलाओं के हिम्मत की कहानी और जज़्बे को हम ' अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस' पर आपके सामने लेकर आए हैं।

rajni singh womens day

शहर की एक महिला जो आज उस मुकाम पर पहुंच गई है जहां पहुंचने के लिए लोग सपने देखते हैं। यह ऊंचाई उन्हें विरासत में नहीं मिली बल्कि उसके लिए खुद में ऐसा जूनून पैदा किया की कामियाबी अब कदम चूमती है। हम बात कर रहे हैं शहर की ब्यूटी एक्सपर्ट रजनी सिंह की। रजनी सिंह हज़रतगंज स्थित रिवैम्प सलून की फाउंडर हैं।

ठोकर मिली और फिर संवर गई किस्मत
रजनी सिंह ने बताया की साल 2004 से पहले उनकी ज़िन्दगी में एक तूफ़ान सा आया। ज़िन्दगी के सपने कुछ ऐसे टूटे और ठोकर मिली की अपने दो बच्चों के साथ वह खुद को संभालने में लग गई। रगों में राजपूताना खून दौड़ रहा था तो हिम्मत हारना नहीं सीखा था। खुद को संभालते हुए जीवन को ढर्रे पर लाने के लिए ब्यूटी पार्लर की शुरुआत कर दी। ब्यूटी के प्रति रुझान पहले से ही था इसलिए इस तरफ किस्मत आजमाया। पार्लर चल पड़ा और फिर अच्छे समय की शुरुआत होने लगी।

जब खुद को चोट पहुंची तभी दूसरों की जिंदगी संवारने की ठानी
रजनी बताती हैं की जब उनकी जिंदगी में दुःख के बादल छाए थे तभी उन्होंने ठान लिया था की वह लड़कियों का भविष्य संवारेंगी जिनको गरीबी के कारण कुछ करने का मौक़ा नहीं मिल पाता। फिर क्या था पार्लर में ऐसी लड़कियों को ट्रेनिंग दी जाने लगी जो गरीब थीं या फिर पति द्वारा ठुकराई गई थीं। शुरुआत में उनके पास केवल एक दो लड़कियां ही आई। मगर आज का दिन है की उनके एक बैच में 20 लड़कियां होती हैं।

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फीस के बदले में हनुमान चालीसा का पाठ
रजनी हनुमान जी की भक्त हैं। वह बताती हैं की उन्होंने अपने स्टूडेंट्स के लिए कोई फीस नहीं रखी है। उनको वह प्रोफेशनल ट्रेनिंग देती हैं जिसके लिए किसी इंटीट्यूट में लड़कियां हज़ारों रूपए खर्च कर देती हैं। हमने शुरू से ही लड़कियों को इस शर्त पर ट्रेनिंग दी है की वह हनुमान चालीसा का पाठ पूरी तरह से याद करेंगी। इसके लिए उनकी क्लास ख़त्म होने के बाद रोजाना सलून में हनुमान चालीस का पाठ होता है। इस पाठ के जरिए लड़कियों में अध्यात्म ज्ञान और शक्ति देने की कोशिश की जाती है जिससे वह कभी जीवन में खुद को कमज़ोर न समझें।

लड़कियों को ट्रेनिंग देने का मकसद 'बर्तन धोने से मिले मुक्ति'
रजनी ने बताया की वह लड़कियों को पार्लर ट्रेनिंग इसलिए दे रही हैं क्योंकि झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली लड़कियां दूसरों के घरों में जाकर बर्तन न धोएं। वह हाथ का ऐसा हुनर सीखें जिससे वह ज़िन्दगी पर कमाई कर सकें इज्जत के साथ। यह एक ऐसा काम है जिससे महिलाएं शादी के बाद घर परिवार को संभालते हुए कर सकती हैं।

अपनी बेटी को बनाया डॉक्टर और बेटा है नेवी में
रजनी आज 3000 लड़कियों की जिंदगी को संवार चुकी हैं।साल 2004 से सफर शुरू हुआ था आज भी जारी है। इस बीच उन्होंने अपनी बेटी को डॉक्टर की शिक्षा दी और बेटे को नेवी की ट्रेनिंग के लिए भी भेजा। आज वह जिस मुकाम में पहुंच गई हैं वहां से वह पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहती। उनके सामने अभी लक्ष्य है उन लड़कियों की ज़िन्दगी संवारने की जिनको उनकी जरूरत है।
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