सरकार के दावे फेल, 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर

सरकार के दावे फेल, 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर
सरकार के दावे फेल, 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर

Ruchi Sharma | Publish: Oct, 12 2019 03:08:08 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

-इन्वेस्टर समिट के बाद भी यूपी के नहीं आए अच्छे दिन
-छह लाख करोड़ के निवेश का दावा, पर बंद हो गए 48 हजार उद्योग
-बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत 45 साल में सबसे ज्यादा

 

रुचि शर्मा
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में उद्योगों की हालत इतनी खराब हो गई है कि बीते वर्षों में करीब छोटे,सूक्ष्म और मध्यम श्रेणी के करीब 68 हजार उद्योग बंद हो गए हैं। यह सब तब है जब प्रदेश सरकार निवेश समिट के जरिए 20 लाख लोगों को रोजगार दिलाने और 6 लाख करोड़ के निवेश के प्रयास कर रही है।


यहां इस तरह हुए उद्योग हुए बंद


बीती जुलाई को लोकसभा में रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में 6.8 लाख उद्योग बंद हुए हैं। इसमें करीब 10 प्रतिशत उद्योग उत्तर प्रदेश के हैं। वहीं बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत 45 साल में सबसे ज्यादा रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 लाख 94 हजार कम्पनियां कम्पनी एक्ट के तहत रजिस्टर हैं और उसमें 36 प्रतिशत कम्पनियां बंद हो गई है। उत्तर प्रदेश में तकरीबन 10 प्रतिशत उद्योग बंद होने की बात की गई। इस तरह उत्तर प्रदेश में 68 हजार उद्योग बंद हुए।

इन उद्योगों पर पड़ा प्रभाव

उत्तर प्रदेश में चमड़ा, प्लास्टिक, कपड़ा, आईटी, कालीन, बुनकरी, जरदोजी, उद्योग प्रमुख रूप से परम्परागत तरीके से काम कर रहे थे। इसमें बड़े से लेकर सूक्ष्म उद्योग तक काम पर थे। पर इनमें से अधिकांश उद्योगों की हालत खस्ता है। कहीं खपत घटने से उत्पादन सिकुड़ रहा है और रोजगार छिन रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, अलीगढ़, आगरा, बुलंदशहर, खुर्जा, बनारस, मिर्जापुर जैसे कभी स्थापित केंद्रों में कारीगरों की हालत सबसे ज्यादा खराब है।

आईआईए ने कहा हालात चिंतनीय हैं

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सलाहकार आशीष अग्रवाल कहते हैं कि उत्तर सरकार ने दो बड़े निवेश समिट करके अपने प्रयास तो जताए, पहले समिट में 4.28 लाख करोड़ के निवेश और दूसरे में दो लाख करोड़ रुपए निवेश की बात की गई। पांच हजार उद्यमियों ने आने की बात की। आईआईए के यूपी में 44 चैप्टर हैं। हर जगह से जो सूचनाएं आई हैं। वह चिंतनीय हैं। उद्योग चरमारा रहे हैं। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी।


चिकन जरी के कारीगर भी खस्ता हाल

लखनऊ के चिकन में जरी का काम करने वाले इमरान नकवी का कहना है कि अब उनके यहां कमाई नहीं रह गई है। पहले अब्बू के समय पूरा मोहल्ला इस काम में लगा रहता था। सबको इनकम हो जाती थी। पर अब मजदूरी ज्यादा हो गई है और बिक्री से होने वाली आय कम। हमने तो काम समेटने का फैसला ले लिया है।

कानपुर होजरी उद्योग से तीन हजार लोगों की छुट्टी

वहीं हालही में कानपुर में दबे पांव आई आर्थिक मंदी से शहर के होजरी उद्योग को बड़ा झटका लगा। बीते एक वर्ष में दर्जन भर से अधिक बुनाई, सिलाई, कटाई और रंगाई इकाइयों में ताला लग चुका है। इनमें काम करने वाले तीन हजार से ज्यादा लोगों बेरोजगार हो गए।करीब इतने ही लोगों का अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा रोजगार का जरिया खत्म हो गया है। बाजार के हालात से कारोबारी तो चिंतित हैं ही, रोजगार को लेकर कर्मचारियों की भी नींद उड़ी हुई है। नोटबंदी के बाद से शहर का कोई भी उद्योग अपने पुराने स्वरूप में वापस नहीं आ सका।

क्या कहते हैं व्यापार मंडल उपाध्यक्ष

व्यापार मंडल उपाध्यक्ष उपेंद्र अग्रवाल का कहना है कि इन्वेस्टर समिट कभी भी घरेलू उद्योग, मध्यम उद्योग व छोटे उद्योग के लिए नहीं थी। सरकार ने यह योजना इन लोगों के लिए नहीं बनाई। यह समिट केवल बड़े उद्योग व कारोबारियों के लिए थे। सरकार जब तक सूक्ष्म व मध्यम उद्योगों को बढ़ावा नहीं देगी प्रदेश की तरक्की नहीं हो सकेगी। यह योजना कहीं से सफल नहीं रही। इंडस्ट्री में हर जगह मंदी चल रही है। कही से भी इंडस्ट्रियल को कोई बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है। कानपुर में 56 लोहे की इंडस्ट्री थी उनमें से मात्र 3 इंडस्ट्री बची है बाकि बंद हो गई हैै।


क्या कहना है विशेषक

उद्योग क्षेत्र के विशेषक सौरभ श्रीवास्तव कहते है कि इंडस्ट्री, तमाम कराखाने के बंद होने का मुख्य कारण नोटबंदी है। छोटे उद्योग धंधों पर इसका व्यापक असर हुआ था। उन्होंने कहा कि देश के तमाम ऐसे उद्योग जिस पर लगभग एक पूरे शहर व दूसरी जगह से आए लोगों की अर्थव्यव्था टिकी होती है, उन पर नोटबंदी के प्रभाव को लेकर उस वक्त ज़्यादातर नकारात्मक असर पड़ा।

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