scriptIs BJP doing pressure politics ? | क्या दबाव की राजनीति कर रही है बीजेपी? सपा के करीबियों पर आयकर छापे, मायावती की चुप्पी और राजा भैया के खिलाफ सीबीआई जांच से खड़े हुए सवाल | Patrika News

क्या दबाव की राजनीति कर रही है बीजेपी? सपा के करीबियों पर आयकर छापे, मायावती की चुप्पी और राजा भैया के खिलाफ सीबीआई जांच से खड़े हुए सवाल

चुनाव से पहले क्या बीजेपी भी दबाव की राजनीति कर रही है? समाजवादी पार्टी के करीबियों पर आयकर के छापे से विपक्षी दलों ने ये सवाल खड़े होने शुरू कर दिये हैं। वजह भी कई हैं दरअसल सपा के करीबियों पर आयकर के छापे तो मसला है ही वहीं बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ, 2013 में हुए सीओ जियाउल हक हत्याकाण्ड को लेकर, सीबीआई ने दोबारा जांच शुरू कर दी है।

लखनऊ

Published: December 18, 2021 11:05:26 pm

लखनऊ. चुनाव से पहले क्या बीजेपी भी दबाव की राजनीति कर रही है? समाजवादी पार्टी के करीबियों पर आयकर के छापे से विपक्षी दलों ने ये सवाल खड़े होने शुरू कर दिये हैं। वजह भी कई हैं दरअसल सपा के करीबियों पर आयकर के छापे तो मसला है ही वहीं बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ, 2013 में हुए सीओ जियाउल हक हत्याकाण्ड को लेकर, सीबीआई ने दोबारा जांच शुरू कर दी है। दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव सर पर हैं मगर बसपा सुप्रीमो मायावती की चुप्पी को भी सियासी हलकों में इसी “दबाव” के नज़रिये से देखा जा रहा है। आपको बता दें कि मायावती के ऊपर भी आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है।
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जियाउल हक हत्याकाण्ड की CBI ने शुरू की जाँच

यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे और बाहुबली नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की भी दिक्कत बढ़ गयी है। दरअसल मार्च 2013 में प्रतापगढ़ जिले में कुंडा के सीओ जियाउल हक की एक बवाल में हत्या हो गयी थी। जिलाउल हक हत्याकांड में राजा भैया को आरोपी बनाया गया था। हांलाकि जांच में सीबीआई ने उन्हें क्लीनचिट दे दी थी। मगर अब सीओ की पत्नी परवीन की अपील पर सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट को खारिज कर दिया। जिसके बाद सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट हाइकोर्ट लखनऊ द्वारा खारिज किये जाने के बाद फिर से सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।
आखिर कहां गायब हैं मायावती?

2022 विधानसभा चुनावों को लेकर जहाँ हर सियासी दल अपनी एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है वहीं उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती और उनकी पार्टी बसपा एक दम शांत दिख रही है। उनमें कोई सक्रियता नज़र नहीं आ रही। इसकी वजह तीन वजहें हो सकती हैं पहला ये कि या तो मायावती को अपने वोट बैंक पर पूरा भरोसा है कि वो उन्हीं को वोट करेगा। आपको बता दें कि राज्य में तकरीबन 22 फ़ीसद दलित आबादी है। दूसरी वजह ये हो सकती है कि वो खुद इस लड़ाई में पहले ही हार मान बैठी हैं या तीसरी वजह ये हो सकती है कि उनके ऊपर भी कोई "बाहरी" दबाव हो। दरअसल मायावती के ऊपर आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है। यूपी के सियासी जानकार मायावती की चुप्पी की वजह इसी जाँच को मान रहे हैं।

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