हिंदू-मुस्लिम व शिया-सुन्नी एकता के प्रबल समर्थक थे कल्बे सादिक, विरोधी भी थे उनकी सादगी के मुरीद

- केसी सुदर्शन व अटल बिहारी वाजपेयी से भी रहे मधुर संबंध

- हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए गंगा में स्नान करने को थे तैयार

By: Abhishek Gupta

Published: 25 Nov 2020, 09:14 PM IST

लखनऊ. विश्व विख्यात इस्लामिक विद्वान और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) के उपाध्यक्ष डॉ. कल्बे सादिक (Kalbe Sadiq) के निधन से न सिर्फ उनके चाहने वाले बल्कि विरोधी भी दुखी है। कल्बे सादिक की सादगी ऐसी थी कि उनका सम्मान हर मजहब व विचारधारा के लोग करते थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक रहे केसी सुदर्शन और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गज नेताओं के साथ उनके मधुरसंबंध थे। हिंदू-मुस्लिम एकता हो या शिया-सुन्नी को साथ लाने की बात हो, कल्बे सादिक इसके प्रबल समर्थक थे। उन्होंने हमेशा आपसी भाईचारा, मोहब्बत व शिक्षा को बढ़ावा दिया।

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हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए गंगा में स्नान करने को थे तैयार-
देश में हिंदु-मुस्लिम एकता पर भी मौलाना कल्बे सादिक ने हमेशा जोर दिया है। इतना कि उन्होंने एक बार कहा था कि यदि देश में हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए उन्हें हरिद्वार के गंगा में भी स्नान करना पड़े, तो वह करेंगे। अयोध्या विवादित जमीन के मुद्दे को सुलझाने के लिए 90 के दशक में वो बाबरी मस्जिद की जमीन को राममंदिर के लिए देने के लिए तैयार थे, लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बाकी लोग इससे सहमत नहीं थे। बावजूद इसके कल्बे सादिक रुके नहीं, और समस्या को सुलझाने का प्रयास करते रहे।

सलीके से व संविधान के दायरे में रहकर देते थे राय-
संवेदनशील मुद्दों पर भी वह अपनी बेबाक राय रखते थे। असहमति के लिए भी वह स्वर बुलंद करते थे, लेकिन सलीके से व संविधान के दायरे में रहकर। सभी धर्मों में एकता लाने की भरसक कोशिश करने वाले कल्बे सादिक को इस्लामिक देशों में ही नहीं बल्कि इंग्लैंड व अमेरिका जैसे देशों में भी सुनने वालों की कमी नहीं थी। संवाद की बात हो तो किसी मंच को साझा करने से वह गुरेज नहीं करते थे। विदेशों में उन्होंने भारत की कई दफा तारीफ की। पाकिस्तान हो या चीन को जवाब देने की बात हो, मौलाना हमेशा मुल्क के अव्वल नंबर के पैरोकार बनकर उभरे।

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शिक्षा के लिए हमेशा सक्रिय-
कल्ब सादिक शिक्षा, खासतौर पर लड़कियों व निर्धन बच्चों की शिक्षा के लिए हमेशा सक्रिय रहे। यह भी कहा जाता है कि मौलना कल्बे सादिक उर्दू बोलने वाले दुनिया के सबसे बड़े शिया धर्मगुरु थे। उन्होंने शुरुआती तालीम मदरसा नाजमिया से हासिल की। सुल्तानुल मदरिस से उन्होंने डिग्री हासिल की। लखनऊ यूनिवर्सिटी से स्नातक किया, फिर अलीगढ़ से एमए व पीएचडी किया। यूनिटी कालेज और एरा मेडिकल कालेज के संरक्षक भी थे।

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