नवाबों के शहर ने याद किया पहली भारतीय महिला ग्रैजुएट को,जिसने नहीं मानी हार

नवाबों के शहर ने याद किया पहली भारतीय महिला ग्रैजुएट को,जिसने नहीं मानी हार
नवाबों के शहर ने याद किया पहली भारतीय महिला ग्रैजुएट को,जिसने नहीं मानी हार

Ritesh Singh | Updated: 12 Oct 2019, 12:54:35 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

पहली भारतीय महिला ग्रैजुएट ने दिलाया था यह पहला अधिकार

लखनऊ , नवाबों के शहर में आज उस भारतीय महिला को याद किया। जिसने महिलाओं के लिए कई बहुत से महत्वपूर्ण कार्य किये। जिसने हार नहीं मानी और अपने कार्य को बड़ी ही ईमानदारी के साथ करती रही। हमें सोचने चाहिए कि एक वो दौड़ था जब महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल पाती थी उसके बावजूद वो कई बड़े से बड़े कार्यों को अंजाम दे डालती थी और घर के साथ साथ परिवार , समाज का भी ख्याल रखती थी। सभी के लिए वो एक मिशाल बन जाती थी और आज का एक समय हैं जब महिला ही महिला की दुश्मन हैं। हम आज के इस मौके पर इस विषय पर बात नहीं करेंगे मौका मिलेगा जल्द इस विषय पर बताने का।

टूट कर भी नहीं हारी वो महिला

आज उस बंगाली, खूबसूरत ,सादगी से भरी महिला के बारे में बात कर रहे हैं जिसने सबसे पहले अपने आप को शिक्षित किया तब उसने समाज में रह रही महिलाओं को लेकर एक अभियान चलाया और आगे बढ़ाया। वरिष्ठ समाजसेविका सुशीला सिंह ने बतायाकि कामनी राय उस महिला का नाम हैं जिसने पुरुषों के समाज में महिलाओं को सम्मान दिलाने की लड़ाई लड़ी। अपनी शिक्षा के साथ उन महिलाओं को भी शिक्षित करने के लिए आगे आई जो अपने आपको कमजोर समझती थी। उन्होंने बतायाकि कामनी राय महिलाओं की शिक्षा के साथ - साथ विधवा महिलाओं के लिए बहुत से कार्य किये। जब उनके पति केदार नाथ रॉय का स्वर्गवास हुआ वो एक दम से टूट गई लेकिन उस मजबूत महिला ने अपने आप को संभाला और महिला उत्थान में पूरी तरह से लग गई।

महिलाओं को दिलाया पहला अधिकार

समाजसेविका सुशीला ने कहाकि कामिनी राय ने महिलाओं के प्रति जागरूकता फैलाने और उन्हें समाज में बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए बहुत ही कड़ा संघर्ष किया। यहाँ तक की महिला वोट की लड़ाई भी लड़ी। इसको इन्होने एक बड़े आंदोलन के रूप में चलाया। और यह आंदोलन कामियाब हुआ। 1926 में जब पहली बार महिलाओं को वोट डालने का मौका मिला। कामिनी राय को कभी भी कोई महिला नहीं भूल सकती जिसने उनके साथ जीवन जिया , उनके साथ मिलकर संघर्ष किया हो उस महान महिला आज भी हमारे दिलो में राज करती हैं।

कामिनी राय अच्छे परिवार से थी

12 अक्टूबर 1864 में बंगाल में पैदा हुई। बांग्ला कवयित्री और महान शिक्षाविद थीं। वो आजादी से पहले की पहली भारतीय महिला ग्रैजुएट हैं उन्होंने ब्रिटिश शासनकाल के दौरान ही 1886 में ऑनर्स की डिग्री हासिल की थी। कामिनी एक बड़े परिवार से नाता रखती थी उनके भाई कोलकता के महापौर थे। बहन नेपाल के शाही परिवार की डाक्टर थी। कामिनी ने उस समय अपना संघर्ष शुरू किया था। सुशीला ने बतायाकि कामिनी राय का संघर्ष जीवन 1933 में आखिरी सास ली। उनकी कविता में महिलाओं के प्रति प्रेम ,दर्द में मलहम जैसी अनुभूति होती थी। आज उनकी 155 वी जयंती हैं। वो मर के भी हमारे बीच हमेशा रहेगी। ऐसी नारी का धरती पर दुबारा जन्म लेना आज के समय में बहुत ही मुश्किल हैं।

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