विधि आयोग की सिफारिश, पारिवारिक संपत्ति बंटवारे का विवाद कम करने को घटाएं स्टांप शुल्क

Law Commission Recommend Reduce Stamp Duty to Reduce Family Dispute- उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग (State Law Commission) ने पारिवारिक संपत्ति बंटवारे का विवाद कम करने के लिए सरकार को स्टांप शुल्क घटाने की सिफारिश की है।

By: Karishma Lalwani

Published: 21 Sep 2021, 04:40 PM IST

लखनऊ. Law Commission Recommend Reduce Stamp Duty to Reduce Family Dispute. उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग (State Law Commission) ने पारिवारिक संपत्ति बंटवारे का विवाद कम करने के लिए सरकार को स्टांप शुल्क घटाने की सिफारिश की है। आयोग ने सरकार से कहा है कि परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के बंटवारे के लिए स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस को कम करते हुए उस पर अधिकतम पांच हजार रुपये स्टांप शुल्क और दो हजार रुपये निबंधन शुल्क यानी कुल सात हजार रुपये तय किया जाए। अभी तक ऐसे मामलों में संपत्ति कि रजिस्ट्री की तरह संपत्ति के मूल्य का आठ फीसदी तक स्टांप और निबंध शुल्क लिया जाता है। माना जा रहा है कि आयोग की इस सिफारिश पर अगर सरकार अमल करती है तो इससे प्रदेश में पारिवारिक विवाद घटेंगे और इससे जुड़े मुकदमों में कमी आएगी। संपत्ति बंटवारे, हस्तांतरण, वसीयत से जुड़े मुकदमों में भारी कमी आएगी। इससे लोन में भी आसानी होगी।

उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एएन मित्तल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि परिवार का मुखिया अपने जीवनकाल में अपनी विधवा बेटी, बहन, पौत्री या आर्थिक या शारीरिक दृष्टि से कमजोर सदस्य को पारिवारिक संपत्ति दान, विभाजित या पारिवारिक लोगों के बीच बांटी जाती है तो संपत्ति के मूल्य के अनुसार स्टांप शुल्क देना पड़ता है। सामान्य तौर पर स्टांप शुल्क से बचने के लिए संपत्ति के स्वामी परिवार के सदस्यों के पक्ष में वसीयत कर देते हैं। संपत्ति स्वामी की मृत्यु के बाद वसीयत निष्पादित होने के मामलों में भी कई बार विवाद खड़ा होता है।

वर्ष 2020 में 1,63,638 वसीयतनामे दायर

राज्य विधि आयोग की रिपोर्ट के अनुसार साल 2020 में 46,333 दानपत्र, 56 पारिवारिक व्यवस्थापन और 1,63,638 वसीयतनामे किये गए थे। इससे पहले 2018 से 2020 के बीच 37 जिलों के विभिन्न न्यायालयों के समक्ष इन विषयों से संबंधित 20,145 मामले दायर किये गए और केवल 4846 मामले निस्तारित किये गए। मामले लंबित होने से अदालतों पर मुकदमों का भार बढ़ा चला गया। इसलिए राज्य की संख्या घटाने के लिए संपत्ति शुल्क कम करने का निर्णय किया गया है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य का दायित्व है कि मुकदमों की संख्या घटायी जाए। साथ ही, राज्य के राजस्व में भी कमी न आने पाए। इस मकसद से आयोग ने परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्तियों के ट्रांसफर से संबंधित विलेखों पर लिये जाने वाले स्टांप शुल्क को तर्कसंगत बनाने की जरूरत के बारे में अध्ययन किया।

लोन लेने में भी आसानी

विलेश पर कम स्टांप शुल्क लगने से ज्यादा से ज्यादा लोग विलेखों को रजिस्टर करा सकेंगे। राज्य विधि आयोग का मानना है कि ऐसी स्थिति में बंटवारे के तौर पर प्राप्त संपत्ति के एवज में बैंक से लोन भी लिया जा सकेगा।

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