महिला सुरक्षा पर सजग हुई यूपी सरकार, 144 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट ​सुनेंगे सिर्फ दुष्कर्म के मामले

महिला अपराध पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक चुनौती बताया,देर रात घर लौटने वाली महिलाओं को सुरक्षा देने की यूपी पुलिस की तैयारियां.

लखनऊ. उन्नाव रेप मामले में महिला सुरक्षा को लेकर सरकार की कानून व्यवस्था की काफी फजीहत हुई। इस पर योगी सरकार ने एक्शन लेते हुए तेजी के साथ महिला सुरक्षा की कई उपाय किए। रेप पीड़िता और उनके परिजनों को तेजी से न्याय मिले इसलिए सोमवार सुबह कैबिनेट फैसले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 218 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की मंजूरी दी। जिसमें 144 कोर्ट सिर्फ दुष्कर्म के मामले की सुनवाई करेंगे। साथ ही अंबेडकरनगर में आयोजित एक कार्यक्रम में महिला अपराध पर चिंता जताते हुए इसे एक चुनौती बताया। वहीं एक अन्य योजना में पुलिस देर रात दफ्तर से लौटने वाली महिलाओं को घर तक सुरक्षित पहुंचने में मदद करेगी। प्लान तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।

प्रदेश के कानून मंत्री बृजेश पाठक ने आज कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि, बच्चों से जुड़े 42,389 मामले और 25,749 महिलाओं से जुड़े अपराध के मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं। अब इनकी सुनवाई नए कोर्ट करेंगे। जिससे आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाएगी।

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने आज 218 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का एक अहम फैसला लिया। इन फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन से रेप मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। प्रदेश में बनाने वाले 144 नये कोर्ट सिर्फ दुष्कर्म के मामले सुनेंगे, इन अदालतों की कोशिश होगी कि सालभर के अंदर पीड़िता और उसके परिजनों को न्याय मिल जाए।

उत्तर प्रदेश कैबिनेट में लिए गए फैसले के बारे में बताते हुए कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि कैबिनेट ने सरकार की मंशा उत्तर प्रदेश में रेप के मामलों का तेजी से निस्तारण करने की है। कैबिनेट ने 218 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने का निर्णय किया है। जिसमें बच्चों के साथ हुए अपराध मामलों की सुनवाई इन 74 नये फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाएगी। इन फास्ट ट्रैक कोर्ट पर प्रति कोर्ट 75 लाख रुपए खर्च आएगा।

प्रदेश में रेप मामले में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इन केसों में न्याय मिलने में देरी की मुख्य वजह प्रदेश में कोर्ट की कमी बताई जा रही है। साल 2001 में केंद्रीय सरकार ने पुराने मामलों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया था। फ़ास्ट ट्रैक अदालतों की कार्यप्रणाली ट्रायल कोर्ट या सेशन कोर्ट की ही तरह होती है। आमतौर पर फ़ास्ट ट्रैक अदालतों से एक महीने में लगभग 12 से 15 मुक़दमों को निबटाने की उम्मीद की जाती है।

केंद्रीय कानून व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा रविवार को एक कार्यक्रम कहाकि बच्चियों के साथ रेप के मामलों की जांच दो माह में पूरी करने के लिए कानून बना है और इसे सख्ती से लागू करने के लिए मुख्यमंत्रियों से बात की जा रही है। पुलिस को दो माह में जांच पूरी करनी है। बच्चियों के साथ रेप के मामले में स्पीडी ट्रायल व फांसी का प्रावधान है। उन्होंने हाईकोर्ट के जजों के साथ ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया है कि बच्चियों के साथ रेप के मामले में दोषियों को शीघ्र सजा दिलाइ्र जाए। इसके लिए केंद्र सरकार व विधि मंत्रालय विशेष पहल कर रहा है।

मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा देश में 400 फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों के बीच सहमति भी बन गई है। इसके लिए 90 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। फिलहाल, देशभर में 107 फास्ट ट्रैक कोर्ट कार्यरत हैं।

सोमवार को अंबेडकरनगर में प्रदेश की 72वीं जिला कारागार का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महिला अपराध आज एक चुनौती बना हुआ है। इन अपराधों की जल्द सुनवाई के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हमने यह कोशिश की है कि जघन्य अपराध करने वालों को जल्द से जल्द सख्त सजा करवाई जाए।

महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर यूपी पुलिस विभाग एक बड़ा कदम यह उठाने जा रही है कि वह देर रात दफ्तर से लौटने वाली महिलाओं को घर तक सुरक्षित पहुंचने में पुलिस मदद करेगी। इसके लिए डीजीपी मुख्यालय पर प्लान तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसे अमली जामा पहनाया जाएगा। पुलिस अपनी गाड़ी से महिला को उसके घर तक छोड़कर आए या फिर उसे एस्कोर्ट करे, इसको लेकर मंथन किया जा रहा है। पूर्व में आईजी रेंज कानपुर रहे आलोक सिंह ने यह प्रयोग कानपुर में किया था जो सफल रहा था। इसी तर्ज पर पूरे प्रदेश में व्यवस्था लागू करने की बात की जा रही थी, जिसे लेकर सभी अधिकारी सहमत नहीं थे।

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Mahendra Pratap
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