यूपी में कोरोना संक्रमण की रिकवरी दर अब 90.6 प्रतिशत हुई: सीएम योगी

- यूपी की जनता के लिए एक बड़ी खुशखबर
- अब जनता मुकराएगी वहीं यूपी सीएम लेंगे राहत की सांस

By: Mahendra Pratap

Updated: 18 May 2021, 07:01 PM IST

लखनऊ. Corona infection Recovery rate यूपी की जनता के लिए एक बड़ी खुशखबर है। इस खबर से जहां जनता मुकराएगी वहीं यूपी सीएम राहत की सांस लेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज बताया कि, सतत प्रयासों से उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की तीव्रता, मंद हो रही है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रिकवरी दर अब 90.6 प्रतिशत हो गई है।

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एक्टिव मामलों की संख्या में 56 फीसदी की कमी आई :- विगत 24 घंटो में राज्य में कोरोना संक्रमण के कुल 8,727 मामले आए हैं। यह संख्या 24 अप्रैल को आए 38055 मामलों से लगभग 29 हजार कम है। पिछले 24 घंटों में 21,108 संक्रमित व्यक्ति उपचार के बाद डिस्चार्ज हुए हैं। वर्तमान में राज्य में कोरोना संक्रमण के एक्टिव मामलों की संख्या 1,36,342 है, जो 30 अप्रैल, 2021 की अधिकतम एक्टिव मामलों की संख्या 3,10,783 से 1.74 लाख कम है। इस प्रकार 30 अप्रैल के सापेक्ष वर्तमान में अधिकतम एक्टिव मामलों की संख्या में 56 फीसदी की कमी आई है।

अब तक प्रदेश में 4,52,31,090 टेस्ट हुए :- कोरोना संक्रमण के हालात पर टीम-9 के साथ चर्चा करते हुए मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी ने कहाकि, एग्रेसिव टेस्टिंग की नीति उत्तर प्रदेश ने शुरुआत से ही अपनाई है। 17 मई को हमने साढ़े चार करोड़ कोविड टेस्ट की सीमा को भी पार कर लिया। यह किसी भी प्रदेश में हुआ सर्वाधिक टेस्ट है। अब तक प्रदेश में 4,52,31,090 टेस्ट हो चुके हैं। विगत दिवस में कुल 2,79,581 कोविड टेस्ट किये गये। इसमें से 1,14,066 टेस्ट केवल आरटीपीसीआर के माध्यम से हैं।

मेडिकल किट ने दिखाया असर :- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि, इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि होम आइसोलेशन के मरीजों को निगरानी समितियों के माध्यम से मेडिकल किट उपलब्ध कराई जाए। ग्रामीण इलाकों में संचालित स्क्रीनिंग के वृहद अभियान में लक्षणयुक्त अथवा संदिग्ध संक्रमित व्यक्तियों को निगरानी समिति से तत्काल मेडिकल किट उपलब्ध करायी जा सके, इसके लिए निगरानी समितियों को पर्याप्त संख्या में मेडिकल किट उपलब्ध करायी जाए। लक्षणयुक्त एवं संदिग्ध संक्रमित व्यक्तियों को मेडिकल किट निगरानी समिति द्वारा ही उपलब्ध करायी जाए, क्योंकि संक्रमित व्यक्ति के पास सबसे पहले निगरानी समिति ही पहुंचती है।

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