यूपी में 1535 थानों में महिला हेल्प डेस्क शुरू, जहां पीड़ित महिलाओं की फरियाद सुनेंगी सिर्फ महिला पुलिसकर्मी

-सीएम योगी ने अफसरों को चेताया, योजनाएं सिर्फ कागजों पर न रह जाएं

By: Mahendra Pratap

Updated: 23 Oct 2020, 03:33 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. नवरात्र के पहले ही दिन यूपी में महिला और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए 'मिशन शक्ति' अभियान शुरू किया गया। इस अभियान के अगले चरण में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के 1535 थानों में महिला हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया। इन थानों में महिलाओं से संबंधित किसी भी समस्या पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था होगी। तय समय सीमा में फाइनल रिपोर्ट लगेगी। इन थानों की खासियत है कि महिला भुक्तभोगी की शिकायत महिला पुलिस कर्मी ही सुनेगी। साथ ही उसे तेजी से हल करने की कोशिश की जाएगी। इन शिकायतों को बताने के लिए एक अलग कक्ष की व्यवस्था की गई है। डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी की उपस्थिति में सीएम योगी ने अफसरों को साफ-साफ संकेत दिया कि, सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों पर न रह जाएं इसके लिए सभी संस्थागत संगठन को मिलकर काम करना होगा। डीजीपी ने जानकारी दी कि ‘मिशन शक्ति’ के तहत पिछले छह दिनों में 4,679 महिलाओं ने 112 को कॉल कर पुलिस की मदद ली है।

25 अक्तूबर के बाद मिशन शक्ति अभियान अप्रैल तक हर माह एक-एक सप्ताह के लिए चलाया जाएगा। जिसके लिए तिथिवार थीम निर्धारित की गई है।

समाज में व्यापक बदलाव दिख रहा है :- इस अवसर पर सीएम योगी ने कहाकि, सूबे के 1535 थानों में महिला हेल्प डेस्क बनने से 'मिशन शक्ति' अभियान को मदद मिलेगी। 'मिशन शक्ति' अभियान को शुरू हुए सात दिन हो गए हैं, और महिलाओं को लेकर समाज में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। यूपी सरकार सभी बेटियों को सुरक्षा और सम्मान प्रदान करेगी। जो भी कदम उठाने पड़ेंगे हम वह कदम उठाएंगे।

महिला हेल्प डेस्क में बुनियादी सुविधा जरूरी :- सीएम योगी ने कहाकि, यूपी के जिन 1535 थानों में महिला हेल्प डेस्क बनाई गई है, उनको सभी बुनियादी सुविधाओं से युक्त होना चाहिए। साथ ही एक प्रशिक्षित महिला कर्मचारी की नियुक्ति होनी चाहिए। वास्तविक पीड़ित को त्वरित न्याय मिले यह हमारी कोशिश होनी चाहिए। हमें इस अभियान को जनसहभागिता के माध्यम से सफल बनाना होगा, क्योंकि इसके बिना इसकी सफलता नहीं हो सकती है।

आत्मरक्षा की ट्रेनिंग :- मिशन शक्ति के तहत विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों की करीब 10 लाख छात्राओं को ऑनलाइन मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जा रही है। शिक्षण संस्थान अभिभावकों से वादा ले रहे हैं कि पुत्र और पुत्री में भेदभाव नहीं करेंगे।

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