यूपी में मृत्यु दर कम और रिकवरी दर अच्छी : सीएम योगी

यूपी में नए कोरोना पॉज़िटिव 5827

By: Mahendra Pratap

Published: 19 Sep 2020, 06:00 PM IST

लखनऊ. यूपी में कोरोना वायरस लगातार और तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे में उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 5827 कोरोना पॉज़िटिव मिले हैं। 6596 लोग कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होकर अपने घरों को लौट गए हैं। शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेशभर की रिकवरी दर 79.39 फीसद है। प्रदेश के अभी तक सक्रिय केस 66,874 हैं। वहीं अब तक कोरोना संक्रमण से 4,953 मरीजों की जान जा चुकी है। सीएम योगी ने बैठक में कहाकि, यूपी में मृत्यु दर कम और रिकवरी दर अच्छी है।

यूपी के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि, प्रदेश में 34,687 लोग होम आइसोलेशन में हैं। अब तक 1,78,123 लोगों ने होम आइसोलेशन का विकल्प लिया है, जिसमें से 1,43,436 का होम आइसोलेशन की अवधि समाप्त हो चुकी है।

तमाम तैयारियों और दावों को कोरोना ठेंगा दिखा रहा है। योगी सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद कोरोना संक्रमण की रफ्तार पर लगाम नहीं लग पा रही है। अब तक कोरोना संक्रमण से हुई मौत में लखनऊ प्रदेश में सबसे उपर है। लखनऊ में 576, कानपुर में 569 और प्रयागराज में 232 की अब तक मौत हो चुकी है।

यूपी में मृत्यु दर कम और रिकवरी दर अच्छी :- अपने सरकारी आवास पर अपनी टीम 11 के संग बैठक करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड-19 के संक्रमण के नियंत्रण एवं उपचार की व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मृत्यु की दर कम और रिकवरी दर अच्छी है। सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों में आक्सीजन की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता के साथ-साथ बैकअप की व्यवस्था भी रहनी चाहिए। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आक्सीजन निर्धारित मूल्य पर ही उपलब्ध हो।

ई-संजीवनी ऐप का व्यापक प्रचार जरुरी :- सीएम योगी ने कहा कि ई-संजीवनी ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही ओपीडी सुविधा काफी उपयोगी सिद्ध हो रही है। ज्यादा से ज्यादा लोग इस सेवा से लाभान्वित हो सके, इसके दृष्टिगत ई-संजीवनी ऐप का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए।

सही व्यवस्था के लिए डाक्टर नियमित राउण्ड लें :- सीएम योगी ने मेडिकल टेस्टिंग, डोर-टू-डोर सर्वे तथा काॅन्टैक्ट टेस्टिंग के कार्य को पूरी सक्रियता से संचालित करने के निर्देश दिए हैं। कोविड चिकित्सालयों की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त बनाया रखा जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ नियमित राउण्ड लें। पैरामेडिक्स द्वारा मरीजों की गहन माॅनिटरिंग की जाए। एम्बुलेंस सेवाओं को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए।

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