इस साल की सर्द हवाओं और कड़ाके की ठंड के पीछे कौन है, यह सारा कमाल इस चिल्ले का है

इस वर्ष 2019-20 मौसम का अंदाज कुछ अनोखा रहा है। ठंड ने जमकर अपने सितम ढहे हैं। लोगों पूरी जनवरी शीतलहर और ठंडी हवाओं का सामना किया। उपर से सोने पर सुहागा ये कि जनवरी के पहले हफ्ते के आखिर दिन जो जमकर बारिश शुरू हुई तो उसने ठंड और बढ़ा दिया। और यह बारिश करीब दस अलग अलग दिन हुई।

लखनऊ. इस वर्ष 2019-20 मौसम का अंदाज कुछ अनोखा रहा है। ठंड ने जमकर अपने सितम ढहे हैं। लोगों पूरी जनवरी शीतलहर और ठंडी हवाओं का सामना किया। उपर से सोने पर सुहागा ये कि जनवरी के पहले हफ्ते के आखिर दिन जो जमकर बारिश शुरू हुई तो उसने ठंड और बढ़ा दिया। और यह बारिश करीब दस अलग अलग दिन हुई। खिचड़ी के बाद जब दिन बड़े और ठंड कम होना शुरू होती है, उस वक्त यह हालात थी कि अगर गरम कपड़े कहीं चूके तो निश्चित तबीयत खराब हो जाती। पर क्या कभी सोचा कि इस बार इतनी ठंड पड़ने के पीछे क्या कारण रहा होगा। यह सारा कमाल चिल्ले के जाड़े का रहा है।

महाकवि घाघ के बारे में सुना होगा, उनका मौसम के बारे में अनुभव आज भी सटीक रहता है। चालीस दिन का चिल्ला जाड़ा, महाकवि घाघ अपने एक छंद में इसका जिक्र किया है। जरा गौर कीजिए, ‘धनु के पंद्रह, मकर पचीस, चिल्ला जाड़ा दिन चालीस’।

महाकवि घाघ का यह छंद बिल्कुल सटीक है। अमूमन 30 दिसंबर से 7-8 फरवरी तक रहने वाला चिल्ला जाड़ा इस बार थोड़ा जल्दी पड़ा। जनवरी में कुछ दिन छोड़कर भीषण ठंड परेशान करती रहेगी। जनवरी में कुछ दिन छोड़कर भीषण ठंड परेशान करती रही। 2 जनवरी तक हाड़ कंपाने वाली ठंड थी और उसके बाद 14 जनवरी से 5-6 फरवरी तक यही स्थिति रही।

चिंतक इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेज के फाउंडर चेयरमैन रमेश चिंतक के अनुसार दिसंबर माह के अंत में सूर्य जब धनु राशि में आता है, उसी समय से कड़ाके की ठंड शुरू होती है।

चिल्ले के जाड़े के 40 दिन इस बार कुछ ज्यादा ठिठुर कर बीते हैं। पिछले जाड़े में महज दो दिन ही 20 डिग्री के नीचे गया था अधिकतम पारा पर इस बार 13 दिन ऐसा हुआ। पूरी जनवरी के बाद फरवरी के पहले पखवाड़े में अब चिल्ले के जाड़े के ये चालीस दिन पूरे हो गए हैं।

जनवरी फरवरी में धूप के वाबजूद लगभग सारे दिन गलन भरी ठंड में कंपाते रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार न्यूनतम और अधिकतम पारे के लिहाज से ठंडे दिन कुछ अधिक रहे हैं। एक जनवरी से 10 फरवरी तक 13 ठंडे दिन मिले। इनमें कई दिनों में न्यूनतम पारा चार डिग्री के करीब तक गया, तो अधिकतम तापमान 14 से 20 डिग्री के बीच तक रहा। वर्ष 2019 में इस दौरान महज दो ही दिन ऐसे रहे हैं जब अधिकतम पारा 20 डिग्री के नीचे रहा।

आंचलिक केंद्र लखनऊ के निदेशक जेपी गुप्ता ने कहाकि जनवरी की शुरुआत से अंत तक 6—7 पश्चिमी विक्षोभ ने दस्तक दी। बर्फीली पछुआ हवा से पारा गिरता रहा जबकि कोहरे से धूप कमजोर रही। नतीजन अधिकतम पारा भी अधिक दर्ज नहीं हुआ। आने वाले दिनों में मौसम सामान्य ही रहेगा।

वर्ष 2019 में गलन भरी सर्दी वाले दिन।
26 जनवरी 16.8, 12.6
25 जनवरी 17.3, 11.6

वर्ष 2020 में गलन भरी सर्दी वाले दिन।

01 जनवरी 20.1 04.1
08 जनवरी 14.8 12.1
09 जनवरी 18.6 11.7
10 जनवरी 16.8 07.0
11 जनवरी 18.5 05.0
13 जनवरी 16.0 06.2
15 जनवरी 17.2 11.7
16 जनवरी 15.8 14.0
17 जनवरी 16.8 13.6
18 जनवरी 15.1 11.7
19 जनवरी 18.2 11.7
20 जनवरी 17.6 07.5
21 जनवरी 18.4 6.8

सर्द और गंभीर सर्द दिवस के बारे में जानिए :- भारतीय मौसम विभाग के अनुसार सर्द दिवस तब होता है, जब अधिकतम तापमान सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री कम हो जाए। दूसरा गंभीर सर्द दिवस वह होता है। जब अधिकतम तापमान सामान्य से कम से कम 6.5 डिग्री सेल्सियस कम होता है।

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