कोरोना वारियर्स...बहादुरी का जो हरफ लिख रहीं हैं इतिहास याद रखेगा

कोरोना वायरस धीरे धीरे अपना कहर बरपा रहा है। पर हमारे जाबांज सिपाही ऐसे वक्त अपनी पूरी हिम्मत और हौसले से इस वायरस से लड़ रही हैं। इन कोरोना वोरियर्स के बारे में सुनेंगे तो आप उन्हें शाबाशी तो देंगे ही खुद भी गर्व से अपना सीना उंचा कर चलेंगे कि यह मेरे देश के बेटे-बेटियां हैं।

By: Mahendra Pratap

Published: 10 Apr 2020, 06:54 PM IST

लखनऊ. कोरोना वायरस धीरे धीरे अपना कहर बरपा रहा है। पर हमारे जाबांज सिपाही ऐसे वक्त अपनी पूरी हिम्मत और हौसले से इस वायरस से लड़ रही हैं। इन कोरोना वोरियर्स के बारे में सुनेंगे तो आप उन्हें शाबाशी तो देंगे ही खुद भी गर्व से अपना सीना उंचा कर चलेंगे कि यह मेरे देश के बेटे-बेटियां हैं। औरेया की सोनम की अभी मेहंदी भी नहीं छूटी थी वह अपने पति और सास-ससुर का आशीर्वाद ले मोर्चें पर डट गई। तो कहीं महिला पुलिस अफसर अपने जिगर का टुकड़ा छोड़ आंख में आंसू भरकर जाबांजी के साथ ड्यूटी कर रही हैं। मथुरा में ऐसे कोरोना वोरियर्स पर जनता फूल बरसा रही है। ऐसे कठिन समय ये इतिहास के सीने पर अपनी बहादुरी का जो हरफ लिख रहीं है उसे आने वाले इतिहास याद रखेगा....

मेरी देश को जरुरत है, रोको ना :- नर्स सोनम गुप्ता की 16 जनवरी को शादी हुई है। ससुराल कानपुर में है। शादी के बाद ससुराल में 15 दिन ही बीते थे कि सोनम ने दो फरवरी को ड्यूटी ज्वॉइन कर ली। उसके बाद कोरोना वायरस ने अपना मुहं फैला लिया। फरवरी अंत में सोनम की ड्यूटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फफूंद से दिबियापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में लगाने का फरमान आया।

सास-ससुर और पिता हिमांशु जब इस बारे में बताया तो उन्होंने समझाया कि 14 दिन की ड्यूटी के बाद 14 दिन का क्वारंटीन पीरियड है। खतरा है। पर सोनम कहां मानने वाली थी। सभी को बताया इस वक्त मेरी देश को जरुरत है, रोको ना। अंत में सब तैयार हो गए। दो अप्रैल से वह आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं। इस कस्बे में मिले चार कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीजों का इलाज हुआ है।

दिबियापुर सीएचसी, औरैया में तैनात सोनम बेहद उत्साह से बताती हैं कि, हमने उनके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। सभी मरीजों को कानपुर भेज दिया गया है। एक बात और सिर्फ 500 मीटर पर सोनम का मायका है। पर वह वहां नहीं जा सकती हैं। न ही कोई उनसे मिलने जा सकता है। वीडियो कॉलिंग से सोनम अपने पति से बात कर दिल को तसल्ली देती हैं।

मास्क और थैंक यू कार्ड देना तो बनता है भाई :- कोरोना वोरियर्स का हौसला अफजाई करने के लिए किसी ने फूल बरसाए तो किसी ने थैंक्यू कार्ड दिया...। कोरोना फाइटरों के साथ हर मुश्किल में कंधे से कंधा मिलाकर पूरा देश खड़ा है। कोरोना वॉरियर्स बड़ी मुस्तैदी से कान्हा की नगरी में अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं। जिले में जहां भी देखो वहां पुलिस के जवान बैरिकेडिंग लगाकर सघन चेकिंग करते हुए दिखाई दे जाएंगे और लॉक डाउन में लोगों से घर से बाहर ना निकलने की बेहद विनम्रता से अपील करते हुए नजर आएंगे यह जवान पूरी तरह से मुस्तैद है ताकि हम लोग सुरक्षित रह सके। इनकी मुस्तैदी पर जनता फिदा है। इनका उत्साहवर्धन करने के लिए अधिकारी और जवानों पर कहीं पुष्प वर्षा की गई तो कहीं उन्हें थैंक यू कार्ड और मास्क देकर धन्यवाद बोला गया।

थाना गोवर्धन में गश्त के दौरान अधिकारियों और पुलिस के जवानों पर पुष्प वर्षा की गई तो वही गोविंद नगर क्षेत्र के चौक बाजार में भी पुलिस अधिकारियों को फूल माला पहनाकर उनका स्वागत किया गया। समाजसेवी शिप्रा राठी ने बताया कि कोरोना वॉरियर्स को वजह से आज हम अपने घरों में चैन से बैठे हुए हैं। मास्क और थैंक यू कार्ड देना तो बनता है भाई।

जिगर का टुकड़ा छोड़ कर रहीं ड्यूटी :- कोरोना वायरस ने ऐसा माहौल पैछा कर दिया है कि हर आदमी अपनी परीक्षा दे रहा है। हमारे प्रदेश की महिला अफसर सबसे आगे अपना कर्तवय रख रही है और जिगर का टुकड़ा बाद में।

1. बर्दाश्त है पर फर्ज जरुरी है :- महिला अपराध और सुरक्षा प्रकोष्ठ के साथ-साथ 112 की जिम्मेदारी संभाल रही डीपी शालिनी का बेटा चार साल का है। लॉक डाउन, सामाजिक दूरी के इस कठिन वक्त में एक मां की भूमिका पर कहती हैं कि 12 दिन तक बेटे संग मनोवैज्ञानिक शीत युद्ध चला। ड्यूटी से आकर उसे न छूना, उसे न खाना खिलाना, गले न लगाना। सब कुछ अजीब से हो गया है। पर फर्ज और सावधानी दोनों जरुरी है। उसने तो कहना शुरू कर दिया मम्मी बदल गई है। बर्दाश्त है पर फर्ज जरुरी है।

2. मैंने उन्हें दूर कर दिया है :- लखनऊ का कैंट इलाका हॉटस्पॉट है, डॉक्टर बीनू सिंह एसपी कैंट हैं। तीन बच्चे हैं जिन्हें प्रतापगढ़ में नानी के पास भेज दिया है। इस वक्त चुनौती है लॉक डाउन का पालन और इन हालात से उबरना। बच्चों के यहां रहने पर उनकी न तो देखभाल कर पाती है और न उनके साथ समय बीता पाती। हम सबकी कोशिश यही है कि शहर शांत रहे। खुशहाली लौट आए। बच्चों की वीडियो कॉल आती है कुछ ही अटेंड कर पाती हूं। उनको शिकायत है कि मैंने उन्हें दूर कर दिया है। पर उनकी सुरक्षा बेहद जरूरी है। और उससे ज्यादा यह चुनौती।

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