माएं दर्द से बिलखती रहीं पर नहीं खुला अस्पताल का गेट, सड़क पर जन्मीं तीन कोरोना कुमारी

कोराना काल में आगरा में मां बनना भी कठिन
सात-आठ महिलाएं बनीं देवदूत, कपड़ों की आड़ में कराया प्रसव
पहले थर्मल स्क्रीनिंग फिर इलाज, अस्पताल नियम पर अड़ा
वीडियो वायरल-मैं खून से सने स्ट्रेचर पर हूं...प्लीज मुझे बचा लें

By: Mahendra Pratap

Published: 10 May 2020, 04:33 PM IST

लखनऊ. आगरा शहर पर इस वक्त पूरे उत्तर प्रदेश की निगाहें जमी हुईं है। कोरोना वायरस के मिल रहे ढेर सारे मरीजों की वजह से आगरा की हालात खराब है। कोरोना का इलाज करते—करते यहां के अस्पतालों के अंदर की मानवीयता इस कदर खत्म हो गई है कि मरीज के साथ आए तीमारदार हाथ जोड़कर, पैर पकड़ अस्पताल से इलाज की भीख मांगते हैं पर अस्पताल, उसके डाक्टर, नर्सों का दिल नहीं पसीजता है। मरीज मरते मर जाए पर गेट नहीं खोला जाता है वजह है पहले थर्मल स्क्रीनिंग फिर इलाज। ऐसी एक नहीं चार घटनाएं हैं और अस्पताल भी दो हैं जिन्होंने लापरवाही और अमानवीयता का पूरा-पूरा परिचय दिया है। पर अगल-बगल की रहने वाली कुछ महिलाएं देवदूत बनकर आई और साड़ी का कमरा बनाया और तीनों महिलाओं का प्रसव सफलतापूर्वक कराया। इन तीनों को तीन बच्च्यिां हुई, जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

आगरा की कहानी है, शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे नूरी दरवाजा निवासी प्रीति तीव्र प्रसव पीड़ा से गुजरी, तो वह अपने पति संग बाइक से लेडी लॉयल अस्पताल पहुंची। दरवाजे पर गार्ड ने रोक दिया। कहा-बिना थर्मल स्क्रीनिंग अस्पताल में प्रवेश संभव नहीं। वहीं असहनीय दर्द से गुजरती नीलम गेट के पास ही सड़क किनारे बैठ गई। लगभग 15 मिनट बाद ही केके नगर, सिकंदरा से बाइक पर अपने देवर संग आई रीना को भी थर्मल स्क्रीनिंग न होने से अस्पताल में नहीं जाने दिया गया। इन तीनों के पास कोई रास्ता नहीं था सिवाय सड़क पर बैठकर कराहने, इंतजार करने और सिस्टम को कोसने का।

लेडी लॉयल अस्पताल से नूरी दरवाजा की दूरी बमुश्किल एक किमी है, इसलिए प्रीति के पति ने घर पर सूचना दी तो घर से चार महिलाएं तेजी से अस्पताल आ गईं। आस-पास मौजूद चार-पांच महिलाएं भी गर्भवतियों की मदद को आ गईं। संख्या आठ हो गई तो महिलाओं ने खुद ही एक घेरा बनाया। घेरे को साड़ी से ढक दिया। पहले प्रीति फिर रीना का प्रसव कराया। संयोगवश कुछ ही मिनट बाद ही शीतला गली निवासी नीलम अपने पति के साथ रिक्शे से लेडी लॉयल अस्पताल पहुंच गई। वापसी में अस्पताल से सौ मीटर की दूरी पर उसे तेज प्रसव पीड़ा हुई। पति घबरा गया। चीख देवदूत बनी महिलाओं तक पहुंची, तो वह दौड़ी और जुट गईं नीलम का प्रसव कराने में। फिर क्या था तीन स्वस्थ बच्चियों का जन्म हुआ और लॉकडाउन में चारों ओर किलकारियों की गूंज फैल गई। तीनों जच्चा-बच्चा अब स्वस्थ हैं। प्रसव के एक घंटे बाद इन तीनों महिलाओं की थर्मल स्क्रीनिंग हुई। इसके बाद इन्हें अस्पताल के वार्ड में पहुंचाया गया।

साड़ी का पर्दा बनाया :- चित्रा टाकीज निवासी प्रीति के पति अमित कश्यप ने बताया कि बाइक से लेडी लॉयल अस्पताल पहुंचा। पत्नी को ब्लीडिंग होने लगी। मैं गिड़गिड़ाता रहा। मैंने घर फोन किया तो घर की महिलाएं भागते-भागते पहुंची। मेरी पत्नी को महिलाएं घर ले जाने लगीं। मां ने साड़ी उतारकर पर्दा बनाया। फिर बच्ची का जन्म हुआ।

मैं हाथ जोड़ता रहा :- नीलम के पति मानसिंह ने बताया कि सुबह पत्नी को गोद में लेकर आ रहा था। एक रिक्शेवाले की रहम पर अस्पताल पहुंचा। पर देखा तो वहां पहले से महिलाओं का हुजुम था। थर्मल स्क्रीनिंग के लिए कहा गया। पत्नी को ब्लीडिंग शुरू हो गयी थी। मैं हाथ जोड़ता रहा, मुझे रोता देख एक महिला मदद को मेरे पास आई। पत्नी को उस घेरे में लिया। 10 मिनट बाद बच्ची रोने की आवाज सुनाई दी। सड़क पर प्रसव देख स्टाफ आया, फिर भर्ती किया।

महिलाएं भगवान बनकर आई :- केके नगर निवासी रीना के पति महिपति ने बताया कि पत्नी को लेकर लेडी लॉयल अस्पताल पहुंचा। रास्ते में मेरी पत्नी की हालत खराब हो गई थी। अस्पताल में जाने नहीं दिया गया। वहां पहले से ही महिलाओं की काफी भीड़ थी। महिलाएं भगवान बन कर आई और पत्नी को संभाल लिया। मेरी बच्ची का जन्म हुआ। वहां पहले दो महिलाएं पड़ी थीं। शोर मचाने पर तीनों को अस्पताल में भर्ती कर चेकअप किया गया। दो घंटे बाद एंबुलेंस से घर पहुंचा दिया गया।

वैस तो लेडी लॉयल अस्पताल शहर का मशहूर और जिम्मेदार अस्पताल है। 25 अप्रैल को तो एक ही दिन में 154 प्रसव (सीजेरियन और नार्मल) कराकर अस्पताल ने अनोखा रिकार्ड बनाया था। तीन कोरोना विशेष के साथ सात आपरेशन थिएटर संचालित हैं। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन रिस्क नहीं लेना चाहता था। ऐसे में बिना थर्मल स्क्रीनिग के अस्पताल में प्रवेश की अनुमति नहीं है। इन दिनों में प्रसव के समय कोरोना टेस्ट भी अनिवार्य किया गया है।

डा.कल्याणी मिश्रा, प्रभारी अधीक्षिका का कहना है कि कोरोना की वजह से बिना थर्मल स्क्रीनिंग के किसी को अंदर जाने नहीं दिया जा रहा है। यह सख्त निर्देश दिए गए हैं। सुबह की घटना की जांच करायी जा रही है। दोषी पर कार्रवाई होगी।

प्लीज मुझे बचा लीजिए :- आगरा के छीपीटोला निवासी प्रसूता (38 वर्ष) की आवाज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से लगातार आ रही थी, वो कराह रही थी बार-बार गुहार लगा रही थी कि 'मैं खून से सने स्ट्रेचर पर पड़ी हूं...प्लीज मुझे बचा लीजिए'। प्रसूता के इस वीडियो ने पूरे शहर और स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प मचा दिया है। मामला बीते शुक्रवार को प्रसव पीड़ा का दर्द लेकर एक महिला आगरा के एसएन (सरोजिनी नायडू) मेडिकल कॉलेज में आई। वह दर्द से परेशान थी। भर्ती किया गया पर छह घंटे तक कोई डॉक्टर उसके स्वास्थ्य परीक्षण के लिए नहीं पहुंचा। रात नौ बजे ऑपरेशन से उसका प्रसव कराया गया। दो घंटे तक वो खून से सने स्ट्रेचर पर पड़ी रही। रातभर दर्द से तड़पने के बावजूद उसे कोई दवा नहीं दी गई और नवजात को भी उसे नहीं दिखाया गया। वायरल वीडियो में पीड़िता ने बताया कि वो कोरोना पॉजिटिव नहीं है लेकिन ऐसे हालात में वो कोरोना संक्रमण का शिकार हो सकती है। वीडियो से मामला संज्ञान में आने पर जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने सीडीओ जे रीभा को जांच के आदेश दिए। सीडीओ ने बताया कि महिला कोविड संदिग्ध है और उसे इमरजेंसी से आइसोलेशन में शिफ्ट कर दिया गया है। चिकित्सकों को निर्देश के बाद उसे उपचार मिल गया है।

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