लॉकडाउन का साइड इफेक्ट : हाईवे पर हाथ में झोला, सिर पर गठरी लिए 500 किलोमीटर पैदल ही अपने गांव जा रहे दिहाड़ी मजदूर

लॉकडाउन के साइड इफेक्ट
न मजदूरी न सिर पर छत
याद आ रहा अपना गांव और घर
यातायात के सब साधन बंद
पैदल ही निकले अपने गांव
थके पैर, खाली पेट सिर्फ गांव पहुंचने की उम्मीद ही सहारा

 

लखनऊ. कोरोना वायरस का कहर तो उत्तर प्रदेश के साथ पूरे देश में फैला हुआ है। 14 अप्रैल तक पूरा उत्तर प्रदेश लॉकडाउन है। अपने गांवों से निकल कर दिल्ली, हरियाणा, नोएडा, ग्रेटर नोएडा गाजियाबाद,फरीदाबाद जैसे कई औद्योगिक नगरों में अपने परिवार का लालन पालन के लिए निकले ये दिहाड़ी मजदूर उस वक्त अवाक रह गए जब यह सुना की पूरा देश लॉकडाउन हो गया है। लॉकडाउन का जब मतलब उनकी समझ में आया तो होशफाख्ता हो गए। फिर क्या था झुग्गी झोंपड़ियों में रहने वाले यह हजारों दिहाड़ी मजदूर अपने गांव जाने की सोचने लगे। ट्रेनें बंद, बसें बंद, ट्रकें बंद और सिर्फ लोकल जनता के लिए जरुरी सामान पहुंचाने वाले वाहन ही सड़क पर चल रह थे।

अब करें तो क्या करें। खाली जेबें, खाली पोटली, पानी की खाली बोतल लेकर सिर्फ उम्मीद के सहारे अपने गांव की ओर पैदल ही निकल पड़े। जिन पर साइकिलें थी तो वे समूह बनकर निकल गए। सबकी मंजिल थी उनका गांव। ये सभी गांव उत्तर प्रदेश के जिलों में थे। किसी का गांव 60 किलोमीटर दूर था तो किसी का 500 किलोमीटर। कुछ दिहाड़ी मजदूर बिहार के भी थे जिनकी डगर इसी प्रदेश निकलती है। ये रेला उत्तर प्रदेश की चारों दिशाओं में निकला। सौ, दौ सौ नहीं करीब हजार से कम नहीं होंगे। इसमें बच्चे, बूढ़े, जवान, अधेड़ सब शामिल थे। ढेर सारी औरतें भी हैं, कुछ के बहुत छोटे बच्चे भी है। जिनको दूध की दरकार है।

लॉकडाउन के साइड इफेक्ट : हाईवे पर हाथ में झोला, सिर पर गठरी लिए 500 किलोमीटर पैदल ही अपने गांव जा रहे दिहाड़ी मजदूर

दिल्ली से लगे इन औद्योगिक शहरों में उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के गांवों में रहने वाले लोग दिहाड़ी मजदूर की तरह काम करते हैं। कुछ दिहाड़ी मजदूर अपने करीबी बड़े शहरों में रोजाना काम करते हैं। इन मजदूरों में कुछ 22 मार्च तो कुछ 25 मार्च को अमरोहा, बुलंदशहर, मथुरा, आगरा बहराइच, बाराबंकी, महराजगंज, गोरखपुर, इटावा आदि होकर गांव जाने के लिए पैदल ही निकल पड़े है। इसमें वो साइकिल य़ात्री भी शामिल हैं जो बंगाल जा रहे हैं सिर्फ बिस्कुट के बल पर। ये दिहाड़ी जिस शहर में मजदूरी मिली उसी के हो लिए।

एक ट्विट के जरिए पता चलता है कि अवधेश जो अपने परिवार जिसमें तीन बच्चे उसकी पत्नी और लोग शामिल हैं, इटावा से अपने गांव कानपुर के घाटमपुर जा रहे हैं। दिहाड़ी मजदूर ने आगरा-कानपुर राजमार्ग का पैदल रास्ता पकड़ा। अवधेश कहते हैं, "मैंने फिरोजाबाद के सिरसागंज इलाके से अपनी यात्रा शुरू की और लगभग 220 किलोमीटर की दूरी पर कानपुर के घाटमपुर जाएगा।"

अवधेश की साथी मजदूर है नूरजहां, भूख से बिलबिला रही हैं पर भोजन को कोई आसरा नहीं दिख रहा है। नूरजहां बताती हैं कि कानुपर के देहात अकबरपुर क्षेत्र की रहने वाली हूं, पैछल चल रही हूं, उम्मीद है कि एक या दो दिन में मैं अपने घर पर होंगी।

प्रदेश सरकार की मदद :— इस वक्त दिहाड़ी मजदूरों के सामने अपना पेट पालने के लिए रोजी-रोटी का बड़ा संकट पैदा हो गया है। लॉकडाउन की वजह से अपने घर जाने के लिए मजबूर हैं। पर उत्तर प्रदेश की सरकार ने इन्हें राहत पहुंचने के लिए एक योजना बनाई है। जिसमें प्रदेश के 15 लाख दिहाड़ी मजदूरों और 20.37 लाख निर्माण श्रमिकों को एक-एक हज़ार की मासिक राशि देने की घोषणा की। इसके अलावा 1.65 करोड़ गरीब और जरूरतमंद परिवारों को एक महीने का मुफ्त राशन देने की भी घोषणा की, जिसमें 20 किलो गेहूं और 15 किलो चावल शामिल है। कुछ सहारा मिलेगा पर यह नाकाफी है।

बदायूं पुलिस ने कहा,पंजों के बल चलो :- प्रदेश के कई सारे हाईवे पर मजदूर हाथ में झोला और सिर पर गठरी लिए पैदल ही निकले है। रास्तें उनके साथ क्या हो रहा है। ट्विटर पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, इसे देख कर समझ सकते हैं। लाॅकडाउन की वजह से दिल्ली से सैकड़ों मजदूर यूपी, बिहार की ओर निकल पड़े हैं। जिनमें से कुछ दिहाड़ी मजदूर गुरुवार को बदायूं पहुंचे तो उन्हें एक सिपाही ने रोक लिया। और बदायूं पुलिस के उस सिपाही ने कुछ मज़दूरों को रोककर पंजों के बल आगे बढ़ने को कहा, डर के मारे वह दिहाड़ी मजदूर ऐसा कर भी रहे है।

वीडियो के वायरल होने पर पुलिस बैकफुट पर आ गई। बदायूं पुलिस की ओर से पहले कहा गया कि प्रकरण में अपर पुलिस अधीक्षक नगर जनपद बदायूं द्वारा जांच की जा रही है, जांच के बाद प्रकाश में आए तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पर बाद में बदायूं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक त्रिपाठी ने इस घटना के लिए माफी मांगी है और कहा है कि जिला पुलिस शर्मिंदा हैं। उनके अनुसार ये एक अंडर ट्रेनिंग सिपाही किया है, जिसपर कार्रवाई की जाएगी।

पैदल बदायूं जा रहे युवक को खिलाया खाना :- यूपी पुलिस का एक दूसरा रुप भी है। पानीपत से 300 किमी दूर बदायूं अपने घर पैदल जा रहे युवक की भूख डयूटी पर तैनात सिपाही से न देखी गई और उसने अपने हिस्से का खाना देकर उस युवक की भूख मिटाई। युवक इतना भूखा था कि वह पूरा खाना खा गया। सिपाही मेरठ के गांधी आश्रम चौराहें पर तैनात था। उसने जब युवक को आते देखा तो उसको रोक लिया। पूछताछ करने पर पता चला कि युवक पानीपत से आ रहा है और उसे बदायूं अपने घर जाना है। उसके पास रुपए पैसे कुछ नहीं है। भूख भी लगी हुई है।

सिपाही रामलाल को दया आई तो अपनी बाइक से अपना टिफन निकालकर लाया और उसको भरपेट खाना खिलाया और पैसे भी दिए। युवक साधु बदायूं के गांव संजली थाना मुसाझाग का रहने वाला है। वह हरियाणा के पानीपत में काम करता है। होली के बाद वह पानीपत आ गया था। कोरोना की वजह से अब सब जगह बंद हो गया है। अब उसके पास कोई काम भी नहीं है। पैसे भी खत्म हो गए हैं। घर जाने के लिए परिवहन को कोई साधन भी नहीं मिला। ऐसे में साधु 24 मार्च को सुबह पैदल ही बदायूं के लिए निकल पड़ा।

लखनऊ में न काम है और न ही घर :- अपने घर से दूर रहकर दिहाड़ी मजदूरी करने वालों के लिए लाॅकडाउन क्या है यह उनका ही दिल समझता है। उनकी रात तो फुटपाथ पर खुले आसमान के नीचे ही बीतती है। बाराबंकी पहुंचे दर्जनों मजदूर राजधानी लखनउ में रहकर दैनिक मजदूरी करते है। अब वह लॉक डाउन के चलते पैदल ही अपनी घरों की ओर चल दिए हैं। जब उनसे पैदल यात्रा के सम्बन्ध में पूछा गया तो उन लोगों ने बताया कि वह राजधानी लखनऊ में रहकर दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और पुलिस उन्हें यह कह कर परेशान कर रही है कि घर के अन्दर ही रहें। अब उनके पास शहर के अन्दर घर है ही नहीं तो वह रहे कहां। इस लिए वह लोग अपने गांव बहराइच जनपद के लिए निकले हैं मगर कोई साधन न होने की वजह से पैदल ही यात्रा कर रहें हैं। वह घर तो जाएंगे ही क्योंकि न लखनऊ में काम है और न ही घर।

जाना है बंगाल, बिस्कुट-पानी ही बना सहारा :- दिल्ली में दिहाड़ी मजदूरी कर रहे एक 12 लोग साइकिल से अपने घर 1500 किलोमीटर दूर मानिक चौक थाना बंगाल जा रहे थे। जब यह जत्था कन्नौज पहुंच तो ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों ने इनसे पूछताछ की। मजदूरों ने बताया कि 21 दिन के लॉक डाउन के बाद से काम ठप हो गया। रहने और खाने की समस्या हो गई थी। जिसके बाद हम साइकिल से अपने घर मानिक चौक थाना बंगाल जा रहे हैं। सोमवार 22 मार्च को दिल्ली से चले थे और बंगाल जाने में कितने दिन लग जाएंगे इनको खुद नहीं मालूम। रास्ते मे चलते हुए थक जाने पर रुक कर कहीं आराम कर लेते हैं और बिस्कुट खाकर और पानी पीकर अपना काम चला रहे हैं ।

भूख ने किया मजबूर, 86 किमी पैदल चल आजमगढ़ पहुंचे 22 मजदूर :- लाक डाउन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा की गयी सारी तैयारियां धरी की धरी रह गयी और चार दिन से भूख से परेशान 22 मजदूर 86 किमी दूरी पैदल चल कर आजमगढ़ पहुंचे। इतने के बाद भी प्रशासन गंभीर नहीं हुआ। बिना किसी जांच और पूछताछ के ही रोडवेज बस से उनको गांव भेज दिया गया। सभी मजदूर गोरखपुर व महराजगंज जनपद के रहने वाले थे। ये 22 दिहाड़ी मजदूर जौनपुर जनपद के डोभी में दो माह से प्लेटफार्म निर्माण का कार्य कर रहे थे। लाक डाउन के बाद रविवार से यहां निर्माण कार्य बंद हो गया। इसके बाद उनके सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया। प्रतिबंध के कारण मजदूरों को राशन भी नहीं मिला। कई दिन से भूख से परेशान मजदूर बुधवार की अपराह्न 2.30 बजे पैदल ही गोरखपुर व महराजगंज के लिए निकल गए। सभी मजदूर गुरुवार शाम करीब 6 बजे 86 किमी की यात्रा कर आजमगढ़ के बेलइसा पहुंचे।

भरतपुर से कासगंज की पैदल यात्रा :- होली के बाद कासगंज के कुछ युवक रोजगार की तलाश में पड़ोसी राज्य राजस्थान के भरतपुर गए लेकिन अब जब कोरोना वायरस की वजह से पूरा देश लॉक डाउन है ऐसे में इन लोगों को अपने घर वापस लौटने के लिए पैदल ही वापस लौटना पड़ा रहा है। गुरुवार को मथुरा जनपद के कस्बा राया में ऐसे ही कुछ युवक दिखाई दिए जो पैदल अपने घरों की ओर कूंच कर रहे थे। चलते-चलते पैर थक चुके थे लेकिन उनके सामने दूसरा कोई विकल्प भी नहीं था। उन्हीं में से एक सुंदर नाम के युवक ने बताया कि वो मूलरूप से कासगंज के रहने वाले हैं और होली के बाद रोजगार की तलाश में पड़ोसी राज्य राजस्थान के भरतपुर गए थे लेकिन अब कोरोना की वजह से पूरे देश मे लॉक डाउन होने के बाद घर वापस लौटने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। उसने बताया को उनके ग्रुप में 8 लोग हैं जो पैदल ही भरतपुर से कासगंज जाने के लिए निकले हैं।

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कांग्रेस ने कहा कोविड-19 की जांच कर नगद आर्थिक मदद दे सरकार : यूपी कांग्रेस चीफ अजय लल्लू ने बयान जारी कहा है कि हजारों श्रमिक अपने घरों की तरफ लौटने को मजबूर हैं लेकिन सरकार के यातायात के सारे साधनों की पूर्णबन्दी के कारण ये पैदल ही अपने परिवार- जिसमें महिलाएं, बच्चे भी हैं के साथ सैंकड़ों किलोमीटर पैदल यात्रा कर रहे हैं। इनके पास रास्ते में खाने-पीने और पैसे की कमी है, ऐसे में भूखे पेट ही सफर करने को विवश हैं। इनमें छोटे बच्चे यहां तक कि 8 माह के बच्चों के लिए दूध की भी व्यवस्था नहीं है।

लल्लू ने कहाकि , ‘लाॅकडाउन से पहले सरकार की तैयारियों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है। केंद्र व यूपी की सरकार से सवाल है कि वापस आ रहे ऐसे लोगों को तत्काल चिन्हित कर इनके खान-पान की व्यवस्था की जाए। साथ ही साथ नगद आर्थिक मदद करते हुए इनको घरों तक सकुशल पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। घरों तक पहुंचाने के पहले इन लोगों की कोविड-19 की जांच की जाए।’

लॉकडाउन के साइड इफेक्ट : हाईवे पर हाथ में झोला, सिर पर गठरी लिए 500 किलोमीटर पैदल ही अपने गांव जा रहे दिहाड़ी मजदूर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सराहनीय कदम :— ऐसे ही 1000 से अधिक लोगों के परिवार समेत दिल्ली एनसीआर से अपने घरों के लिए पैदल निकल पड़ने की खबर लगते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फौरन इनका पता लगाकर मदद के आदेश दिए। डीएम बुलंदशहर और एसएसपी ने इन लोगों को ढूंढ़ा और इनकी जांच कराई और इन्हें भोजन मुहैया कराया। साथ ही बस का इंतज़ाम कर इन्हें घर भिजवाया।

अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने कहाकि ढेर सारे लोगों का जत्था पैदल ही उत्तर प्रदेश में आया है, सभी जिला प्रशासन को निर्देश है कि इन लोगों के लिए भोजन, पानी और रहने की व्यवस्था करे।

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