तब्लीगी जमात मरकज में शामिल हुए थे उत्तर प्रदेश के लोग, तब्लीगी जमात क्या है जानिए

उत्तर प्रदेश में अचानक एक नाम उभर कर आया। तब्लीगी जमात। दिल्ली के निजामद्दीन में 13 मार्च से 15 मार्च तक तब्लीगी जमात की मरकज हुई। जिसमें देश-दुनिया से करीब 1500 अनुयायी शामिल हुए। उत्तर प्रदेश से भी 157 लोग इस मरकज में शामिल हुए थे। सोमवार को तब्लीगी जमात की मरकज में शामिल छह लोग कोरोना वायरस पाजिटिव की वजह से मर गए। जिस कारण उत्तर प्रदेश में हड़कंप मचा गया।

By: Mahendra Pratap

Published: 31 Mar 2020, 08:23 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में अचानक एक नाम उभर कर आया। तब्लीगी जमात। दिल्ली के निजामद्दीन में 13 मार्च से 15 मार्च तक तब्लीगी जमात की मरकज हुई। जिसमें देश-दुनिया से करीब 1500 अनुयायी शामिल हुए। उत्तर प्रदेश से भी 157 लोग इस मरकज में शामिल हुए थे। सोमवार को तब्लीगी जमात की मरकज में शामिल छह लोग कोरोना वायरस पाजिटिव की वजह से मर गए। जिस कारण उत्तर प्रदेश में हड़कंप मचा गया।

इसकी गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा व मेरठ का दौरा रद्द कर सीधे राजधानी लखनऊ लौट आए। उत्तर प्रदेश के 18 जिलों को हाईअलर्ट पर रखा गया है। यह जिले गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़, बिजनौर, बागपत, वाराणसी, भदोही, मथुरा, आगरा, सीतापुर, बाराबंकी, प्रयागराज, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर हैं, जिनमें खासी सतर्कता बरती जा रही है। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तब्लीगी जमात के अनुयायियों की तलाश कर वहीं क्वारंटाइन कर दिए जाएं।

उत्तर प्रदेश में इस वक्त 102 कोरोना वायरस पाजिटिव हैं। पूरे प्रदेश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन किया गया है। लाकॅडाउन का मतलब अपने घरों में रहना, कहीं बाहर नहीं टहलना। सिर्फ आवश्यक वस्तुओं के लिए रियायत है।

तब्लीगी जमात मरकज है क्या। उत्तर प्रदेश में अचानक चर्चा में क्यों आ गई। इसका मतलब क्या है। इसका क्या काम है। और इसका जन्म कैसे हुआ। ये ढेर सारे सवाल इसका जवाब अब आपके पास है। जानिए तब्लीगी जमात क्या है...

जन्मदाता मौलाना इलियास कांधलवी :- दरअसल, मुगल काल में कई लोगों ने इस्लाम धर्म कबूल किया था. लेकिन फिर भी वो लोग हिंदू परंपरा और रीति-रिवाज अपनाते रहे थे। अंग्रेजों के शासनकाल में आर्य समाज ने उन्हें दोबारा से हिंदू बनाने का शुद्धिकरण अभियान शुरू किया था, जिसके चलते मौलाना इलियास कांधलवी ने इस्लाम की शिक्षा देने का काम शुरू किया। इसके लिए उन्होंने वर्ष 1926-27 दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मस्जिद में तबलीगी जमात का गठन किया। मोहम्मद इलियास का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के कांधला गांव में 1885 में हुआ था।

जमात के करीब 15 करोड़ मेम्बर :- तब्लीगी जमात का दावा है कि दुनियाभर में जमात से करीब 15 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। जमात किसी भी तरह की सरकारी मदद नहीं लेती है। इसकी कोई भी अपनी बेवसाइट, अखबार या फिर टीवी चैनल नहीं है। जमात अपना एक अमीर यानी अध्यक्ष चुनता है, उसी के मुताबिक सारे काम या कार्यक्रम करता है।

साल 1941 में तब्लीगी जमात का पहला जलसा :- हरियाणा के मेवात इलाके के नूह कस्बे में इलियास कांधलवी पहली जमात लेकर गए थे। जहां पर उन्होंने मेवाती समुदाय को नमाज, कलमा सहित इस्लामिक शिक्षा सिखाने पर जोर दिया था। भारत में साल 1941 में तब्लीगी जमात का पहला जलसा हुआ था, जिसमें करीब 25,000 लोगों ने हिस्सा लिया था। बताया जाता है कि 1940 तक जमात का कामकाज केवल भारत तक की सीमित था।

तब्लीगी जमात मरकज का मतलब :- तब्लीगी का मतलब है अल्लाह की कही बातों का प्रचार करना। जमात मतलब समूह। बैठक की जगह मरकज कहलाती है। कुल मिलाकर तब्लीगी जमात मरकज बैठक में अल्लाह की कही बातों का प्रचार करना। तब्लीगी जमात से जुड़े सदस्य पारंपरिक इस्लाम को मानते हैं।

तब्लीगी जमात का मकसद :- तब्लीगी जमात के छह मुख्य मकसद हैं,जिसमें उसूल-कलिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तबलीग हैं। थे।

तब्लीगी जमात काम का तरीका :- तब्लीगी जमात का मुख्य कार्यालय दिल्ली है। यहीं से देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के लिए तमाम जमातें निकलती हैं। जमातों को संख्या में बांटा गया है। जमातें कम से कम तीन दिन की होती है। उसके बाद पांच दिन, 10 दिन, 40 दिन और चार महीने तक की होती हैं। इसकी एक जमात में 8-10 लोग शामिल होते है। जिनमें दो लोग सिर्फ खाने-पीने की व्यवस्था करते हैं। इस जमात के लोगों शहर में घूम कर प्रचार करते हैं। ये सुबह 10 बजे हदीस पढ़ते हैं। नमाज और रोजा रखने पर विशेष मान्यता है।

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