21 सितंबर को सीपीआईएम का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन

भारत कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी सचिव डॉ हीरालाल यादव ने कहाकि, बिजली बिल टैक्स, छात्रों की फीस माफी के मुद्दों पर 21 सितंबर को सीपीआईएम का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा।

By: Mahendra Pratap

Updated: 18 Sep 2020, 05:11 PM IST

लखनऊ. भारत कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी सचिव डॉ हीरालाल यादव ने कहाकि, बिजली बिल टैक्स, छात्रों की फीस माफी के मुद्दों पर 21 सितंबर को सीपीआईएम का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा।
डॉ हीरालाल यादव ने कहाकि, आपदा प्रभावित आम जनता के जीवन एवं जिविका को बचाने और उसे राहत देने के बजाय केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश राज्य सरकार दोनों ही आम जनता की दुश्वारियां बढ़ाने, किसानों-मजदूरों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाने, विरोध और विरोधियों का दमन करने और संविधान तथा संवैधानिक संस्थाओं को ध्वस्त करने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। केंद्र सरकार ने तीन कानून के जरिए अब अंबानियों एवं अडानियों को खेती और किसानों को लूटने का रास्ता खोल दिया। इससे किसान अपने ही खेत पर मजदूरी करने के लिए मजबूर होंगे।

चार घंटे में 27 कानून बनाए गए :- डॉ हीरालाल यादव ने कहाकि, उत्तर प्रदेश विधानसभा के चार घंटे के तीन दिवसीय सत्र में 27 कानून बनाए गए जिनमें अधिकांश किसान मजदूर और जनतंत्र विरोधी चरित्र के हैं। उत्तर प्रदेश की भाजपा की योगी सरकार ने संपत्ति क्षतिपूर्ति कानून का इस्तेमाल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वालों के ख़िलाफ़ करना शुरू कर दिया है। एक उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल का गठन किया जा रहा है जो बिना किसी वारंट के किसी को भी गिरफ्तार एवं उसके घरों की तलाशी ले सकता है और इनके खिलाफ मुकदमा भी क़ायम नहीं किया जा सकता। अदालतें भी बिना राज्य सरकार की इजाजत के संज्ञान नहीं ले सकती।

नौजवानों और छात्रों पर बरसा रही लाठियां :- रोजगार एवं फीस माफी की मांग करने वाले नौजवानों और छात्रों पर योगी सरकार लाठियां बरसा रही है और उन्हें जेल भेज रही है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी छात्रों युवाओं के ऊपर योगी सरकार के दमनकारी रवैया की तीव्र निंदा करते हुए विरोध करती है।

मांगें:-
बिजली बिल एवं टैक्स,
छात्रों की फीस माफी
जरूरतमंद सभी को 10 किलो अनाज मुफ्त
7500 रुपए सभी गैर आयकर दाताओं के खाते में ट्रांसफर करना
मनरेगा में 200 दिनों का काम और ₹600 मजदूरी
बिजली के निजीकरण का विरोध
और छह अन्य मांगें।
21 सितंबर को प्रदर्शन करके राज्यपाल एवं राष्ट्रपति को ज्ञापन स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से भेजें जाएंगे।

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