दिल्ली मंडी में नहीं बिकी दशहरी की दूसरी खेप, व्यापारी मायूस

Dussehra mango - मलिहाबाद के दशहरी आम की दूसरी खेप जब दिल्ली की मंड़ियों में पहुंची तो बाग मलिकों ने देखा कि, खरीदार नदारद हैं। माल को मंडी में डम्प कर दिया गया है।

By: Mahendra Pratap

Published: 28 May 2021, 10:43 AM IST

लखनऊ. Dussehra mango एक तरफ जून माह की लू भरी गर्मी और दूसरी तरफ दशहरी आम... दशहरी के दीवाने आम के स्वाद का लुत्फ उठाते हुए कहते हैं सिर्फ वाह..वाह। पर लगता है इस बार कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन ने दशहरी के दीवानों के कदम घरों में कैद कर दिए हैं। वजह साफ है मलिहाबाद के दशहरी आम की दूसरी खेप जब दिल्ली की मंड़ियों में पहुंची तो बाग मलिकों ने देखा कि, खरीदार नदारद हैं। माल को मंडी में डम्प कर दिया गया है। सभी के चेहरे मायूस हो गए। माथे पर चिंता की लकीरें साफ-साफ दिख रही थीं। अगर यही हाल रहा तो इस बार आम बागवानों और व्यापारियों को भारी घाटा लगने वाला है। पर पहली खेप की बिक्री से इन सभी के चेहरे खिले हुए थे।

यूपी में दो दिन तूफान यास बरपाएगा कहर, मौसम विभाग का तेज बारिश, तेज हवा और आकाशीय बिजली का अलर्ट

दशहरी को जीआइ टैग :- लखनऊ के माल, मलिहाबाद और काकोरी की दशहरी मिठास, आकार और रंग दूसरे राज्यों या देशों की दशहरी से अलग है। लू में यहां के दशहरी की मिठास और बढ़ जाती है। इसी गुण की वजह से दशहरी को जीआइ (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग दिया गया है।

मुनाफे की थी उम्मीद :- दिल्ली में आम न बिकने की सूचना के बाद मलिहाबाद के बागवानों ने आम की टूट पर रोक लगा दी। मलिहाबाद उमर नवाज बताते हैं कि, इस बार मौसम काफी उलट पुलट वाला रहा, जिस वजह से फसल तो कम हुई पर आम का आकार काफी अच्छा निकला। इसे देख कर लगा कि बहुत मुनाफा होगा। पर उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

पहली खेफ हाथोंहाथ बिकी :- मलिहाबाद के एक और दशहरी आम बागवान सुरेश पांडे ने बताया कि, कोरोना काल में हालात बहुत खराब हैं। कोरोना कर्फ्यू की वजह से किसी तरह से 22 मई को दिल्ली की मंडी में मलिहाबाद का दशहरी आम पहुंचा। पहली खेफ हाथोंहाथ बिका गई। छह किलो की पेटी 150 से 250 और 14 किलो की पेटी 300 से 500 रुपए में बिकी।

लाकडाउन से आम की बिक्री पर फर्क:- मलिहाबाद के एक आम बागवान शहजाद असगर ने कहाकि, लाकडाउन की वजह से आम की बिक्री पर फर्क पड़ा रहा है। अगर लाकडाउन में छूट न मिली तो निश्चित मान लीजिए भारी नुकसान होगा। कोरोना और लाकडाउन की वजह से लोग घरों से कम निकल रहे हैं। और फिर खरीदने से बच रहे हैं।

बस लॉकडाउन खत्म हो जाए :- दिल्ली की आजादपुर फल मंडी के एक आढ़ती रौशन ने बताया कि, कोरोना का डर तो सबमें है। लॉकडाउन लगा हुआ है। छोटे व्यापारी अभी आगे नहीं आ रहे हैं। फिर आम को जरूरी नहीं है यह तो शौक की चीज है। और फिर आम की तुड़ाई अभी शुरू हुई है। अभी निराश होने की जरुरत नहीं है। काफी वक्त है। लॉकडाउन खत्म हो जाए लोग दशहरी के पीछे भागते दिखेंगे।

जानें दशहरी नाम कैसे पड़ा :- दशहरी आम का सबसे ज्यादा उत्‍पादन उत्‍तर प्रदेश में होता है। हर साल करीब 20 लाख टन दशहरी आम पैदा होता है। दशहरी आम के बारे में बताते हैं कि, दशहरी का पहला पेड़ लखनऊ के काकोरी स्‍टेशन से सटे दशहरी गांव में लगाया गया था। इसी गांव के नाम पर इसका नाम दशहरी आम पड़ा। बताया जाता है कि वह पेड़ आज भी मौजूद है, जिस पर पहला दशहरी आम आया था। इस पे की उम्र करीब 200 साल हो चुकी है। इसे 'मदर ऑफ मैंगो ट्री' कहा जाता है।

Mahendra Pratap
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned