जनता कर्फ्यू : पूरे प्रदेश की जिंदगी खतरे में डाल रहीं 'कोरोना वायरस से बेअसर' लखनऊ घंटाघर की सीएए प्रदर्शनकारी

उत्तर प्रदेश सहित पूरा देश इस वक्त कोरोना वायरस के खात्मे के लिए एकजुट है। उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोना वायरस के खिलाफ आयोजित जंग जनता कर्फ्यू में साथ-साथ खड़ी है। चाहे वह राजधानी लखनऊ हो या प्रदेश का सबसे छोटा गांव। सभी जगह जनता कर्फ्यू को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। पर लखनऊ का शाहीन बाग अपनी ही राग गा रहा है। उन्हें इस बात का कोई फर्क नहीं कि देश किस संकट से गुजर रहा है। लखनऊ के घंटाघर में रविवार 22 मार्च को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्श

By: Mahendra Pratap

Updated: 22 Mar 2020, 01:35 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सहित पूरा देश इस वक्त कोरोना वायरस के खात्मे के लिए एकजुट है। उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोना वायरस के खिलाफ आयोजित जंग जनता कर्फ्यू में साथ-साथ खड़ी है। चाहे वह राजधानी लखनऊ हो या प्रदेश का सबसे छोटा गांव। सभी जगह जनता कर्फ्यू को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। पर लखनऊ का शाहीन बाग अपनी ही राग गा रहा है। उन्हें इस बात का कोई फर्क नहीं कि देश किस संकट से गुजर रहा है। लखनऊ के घंटाघर में रविवार 22 मार्च को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। शासन, प्रशासन और पुलिस की अपील का महिलाओं पर कोई फरक नहीं पड़ रहा है, वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

जनता कर्फ्यू पूरे देश में सुबह 7 बजे से शुरू होकर रात नौ बजे तक रहेगा। इस बीच शाम पांच बजे 5 मिनट के लिए अपने घर से कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ रहे कमांडो के लिए ताली बजाना, थाली बजाना है। यह मेडिकल स्टाफ समेत उन तमाम लोगों का अभिवादन है जो कोरोना से जनता को बचाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।

राजधानी लखनऊ के घंटाघर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। कोरोना वायरस से निपटने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की अपील पर जहां राजधानी लखनऊ की जनता ने अपने को घरों में कैद लिया है। सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। तो वहीं दूसरी तरफ घंटाघर पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं को कोरोना का कोई खौफ नहीं है। वह अपने साथ दूसरों की जिंदगी को भी खतरे में डाल रही हैं।

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ राजधानी लखनऊ के घंटाघर पर यह प्रदर्शन 17 जनवरी को शुरू हुआ था। जिला प्रशासन के कड़े विरोध के बाद भी यह प्रदर्शन जारी है। महिलाओं को पुलिस ने नोटिस भी भेजा है। पर वह अपने मनमाने रवैया को ही अहमियता दे रहीं हैं।

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लखनऊ के पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू की घोषणा को पूरे लखनऊ की जनता पूरा समर्थन कर रही है। पुलिस की कानून व्यवस्था पर पूरी नजर है।

लखनऊ के कुछ मशहूर लोग जो इस विरोध प्रदर्शन के अगुवा भी थे, उन सभी ने अपील की है कि इंसानियत के खातिर कुछ दिनों के लिए धरना स्थगित कर दें।

समझाने के बाद भी नहीं मानी :- सदफ जाफर कहती हैं कि पूरे देश में जरूरी चीजों को छोड़ कर पूरे देश बंद है तो घंटाघर पर बैठी महिलाओं को अभी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को निभाना चाहिए। प्रदर्शन में महिलाएं एक दूसरे के पास पास बैठी हैं। इससे संक्रमण का अधिक खतरा है। बचाव की साधन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कुछ दिनों के लिए धरना स्थगित कर देना चाहिए। हालात सामान्य होने पर फिर से धरना दे सकते हैं। शनिवार को मैं महिलाओं को समझाने गई थी लेकिन वह नहीं मानी।

सांकेतिक रूप से एक या दो महिलाएं ही बैठे :- मशहूर शायर मुनव्वर राना की पुत्री सुमैया राना का कहना है कि इस्लाम ने हमेशा इंसानियत को बचाने का संदेश दिया है। ऐसे में घंटाघर पर महिलाओं को अपना प्रदर्शन समाप्त कर देना चाहिए या फिर सांकेतिक रूप से एक या दो महिलाएं ही वहां पर बैठे। सबकी जिंदगियों को खतरे में डालना गलत है।

कोई लीडर नहीं :- लखनऊ के मौलाना सैफ अब्बास ने कहाकि इस वक्त कोरोना वायरस को रोकने के लिए हर एक को भीड़ से बचना चाहिए। जहां तक घंटाघर की बात है। इस धरने का कोई लीडर नहीं है। कुछ औरतों की वजह से सैकड़ों औरतों की जान को खतरा है। जो औरतें धरने पर बैठी है उनको आपस में बात करके इसे स्थगित करने के बारे में सोचना चाहिए।

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