लॉकडाउन खुलते ही 14 अप्रैल के बाद और हो सकता है पलायन

-मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों में यूपी के रहते हैं पांच से छह करोड़
-स्थितियां न सुधरीं तो गांव लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं

By: Mahendra Pratap

Published: 07 Apr 2020, 06:27 PM IST

पत्रिका इन्डेप्थ स्टोरी
लखनऊ. लॉकडाउन में प्रवासी श्रमिकों का पूरे भारत में पलायन हुआ है। अपने गृह राज्यों और गांवों तक पहुंचने के लिए प्रवासी श्रमिकों ने काफी संघर्ष किया। अब भी कर रहे हैं। प्रवासी श्रमिकों, कामगारों और दिहाड़ी मजदूरों में यूपी और बिहार के लोगों की संख्या ज्यादा है। यह रोजी-रोटी कमाने हर साल अपने गांव से पलायन करते हैं। कोरोना वायरस की वजह से 21 दिन की तालाबंदी ने प्रवासी कामगारों के एकाएक पलायन ने इन्हें अचानक सुर्खियों में ला दिया है। माना जा रहा है कि अभी महज तीन से चार लाख लोग ही अन्य प्रदेशों से यूपी लौटें हैं। यदि कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से स्थितियां बिगड़ती हैं और रोजी रोटी का साधन नहीं सुधरता तो यूपी लौटने वाले लोगों की संख्या करोड़ में हो सकती है।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में आंतरिक प्रवासियों की कुल संख्या 45.36 करोड़ के लगभग है, जो देश की कुल जनसंख्या का 37 फीसद है। इसमें अंतर-राज्य प्रवासियों के साथ-साथ प्रत्येक राज्य के अंदर के प्रवासी भी शामिल हैं। जबकि, हालिया पलायन बड़े पैमाने पर अंतर-राज्य प्रवासियों में अधिक हुआ है। वर्ष 2016 में पलायन का यह आंकड़ा 50 करोड़ के करीब तक पहुंच गया। आर्थिक सर्वेक्षण में वर्ष 2016 में प्रवासी कार्यबल का आकार लगभग 20 प्रतिशत आंका गया।

यूपी के 4-6 मिलियन लोग लौटेंगे :- प्रोफेसर कुंडू के अनुमानों से पता चलता है कि जितने प्रवासी लॉकडाउन में अभी लौटे हैं उसके अलावा मौका मिलते ही और भी प्रवासी अपने वतन लौटेंगे। क्योंकि कुल प्रवासी लोगों में उत्तर प्रदेश और बिहार में कुल अंतर राज्य प्रवासियों की संख्या का 25 फीसद और 14 फीसद है। इसके बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश राज्य आते हैं। जिनका हिस्सा 6 फीसद और 5 फीसद है। इसका मतलब यह है कि लगभग 4-6 मिलियन लोग उत्तर प्रदेश और 1.8-2.8 मिलियन बिहार वापस आना चाहते हैं। एक और 700,000 से 1 मिलियन राजस्थान में और 600,000-900,000 मध्य प्रदेश में वापस आना चाहते हैं।

अंतर-राज्य प्रवासियों के लिए कोई आधिकारिक डेटा नहीं :- हालांकि, देश में अंतर-राज्य प्रवासियों का कोई आधिकारिक डेटा नहीं है। विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली में विशिष्ट फेलो प्रोफेसर अमिताभ कुंडू ने वर्ष 2020 के लिए एक अनुमान लगाया है। उनका यह अनुमान, जनगणना 2011, एनएसएसओ सर्वेक्षण और आर्थिक सर्वेक्षण पर आधारित हैं। वे बताते हैं कि कुल 65 मिलियन अंतर-राज्य प्रवासी हैं, और इनमें से 33 फीसदी प्रवासी श्रमिक हैं। उनमें से 30 फीसदी दिहाड़ी मजदूर हैं। जबकि अन्य 30 फीसदी नियमित परन्तु अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं।

पटरी दुकानदार मुसीबत में गांव का करते हैं रुख :- प्रवासी मजदूरों में यदि पटरी दुकानदारों को शामिल कर लिया जाए तो अनुमानत: यह संख्या 12 से 18 मिलियन पहुंचती है। ये वे लोग हैं, जो दूसरे राज्यों से आकर अपने पेट पालने के लिए सडक़ किनारे पटरी पर सामान बेचने का काम करते हैं। इन्हें हमेशा अपने रोजगार के छिनने का भय रहता है। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) और अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से वर्ष 2019 में किए एक अध्ययन में यह अनुमान लगाया था कि भारत के बड़े शहरों में 29 फीसदी आबादी दिहाड़ी मजदूरों की है। यह दिहाड़ी मजदूर किसी भी इस प्रकार की मुसीबत में हमेशा अपने गांवों में जाने के लिए तैयार बैठे रहते हैं।

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