लॉकडाउन से यूपी को अप्रैल-मई में 1.90 लाख करोड़ रुपए की चपत का अनुमान, रोजाना के नुकसान को जान कर हो जाएंगे चिंतित

गिड्स (GIDS) के पूर्व निदेशक प्रोफेसर अजीत कुमार सिंह का आकलन
लॉकडाउन से यूपी में रोजाना 3200 करोड़ रुपए का नुकसान
आने वाला वक्त प्रदेश में गंभीर आर्थिक संकट और कठिन फैसलों का

By: Mahendra Pratap

Published: 22 May 2020, 04:42 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के लिए आने वाला भारी आर्थिक संकट (Economic Crisis) और कठिन फैसलों का रहेगा। चल रहे लॉकडाउन से यूपी में रोजाना 3200 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। यह निश्चिततौर पर आंकड़े आपको चौंका देंगे। यूपी के अर्थिक नुकसान पर गिड्स के पूर्व निदेशक ने प्रोफेसर अजीत कुमार सिंह ने अपने पेपर में कहाकि अप्रैल-मई में 1.90 लाख करोड़ रुपए की चपत का अनुमान है। यह प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद का 10 फीसद है।

राजधानी लखनऊ के गिरी इंस्टिट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (Giri Institute of Development Studies GIDS) (गिड्स) के पूर्व निदेशक प्रोफेसर अजीत कुमार सिंह का आकलन है कि प्रदेश में औद्योगिक उत्पादन, व्यापार, परिवहन और निर्माण क्षेत्र पर लॉकडाउन का बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा हालांकि अनाज उत्पादन इस वर्ष अच्छा हुआ है फिर भी किसानों को नुकसान हुआ है। सब्जी व फल जैसे उत्पाद बाजार तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। दूध, मांस और मछली बेचने वालों की आय बहुत कम हुई है।

उत्तर प्रदेश की आय में 25 फीसद का योगदान करने वाले कृषि एवं उससे जुड़े क्षेत्रों का नुकसान लगभग 30 फ़ीसदी रहेगा। औद्योगिक उत्पादन एवं निर्माण क्षेत्र के मूल्य संवर्धन में 80 फीसद की गिरावट अनुमानित है। बिजली एवं गैस क्षेत्र में गिरावट कम होगी पर सेवाओं के क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। प्रोफेसर अजीत कुमार सिंह ने कहाकि आने वाला वक्त प्रदेश में गंभीर आर्थिक संकट और कठिन फैसलों का होगा। लॉकडाउन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रतिदिन 32 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

आय में आएगी भारी कमी :- प्रोफेसर सिंह का अनुमान है कि अप्रैल-मई में लॉकडाउन से यूपी को 1.90 लाख करोड़ की चपत लग सकती है यह प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद का 10 फीसद है। राज्य में अपने संसाधन से प्राप्त आय में 25 फीसद की कमी आएगी। वर्ष 2019-20 के संशोधित आंकड़ों के आधार पर यह 41000 करोड़ रुपए होगी। साथ ही केंद्र से मिलने वाली राशि में लगभग 34000 करोड़ रुपए की गिरावट आएगी।

खर्च में कटौती लागू करने का सुझाव :- प्रोफेसर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने कुछ शर्तों के साथ बाजार ऋण को राज्य घरेलू उत्पाद के 3 फीसद से 5 फीसद तक बढ़ाने को मंजूरी दी है। इससे अतिरिक्त ऋणों के रूप में 40 हजार रुपए जुटाए जा सकते हैं 10 फीसद अतिरिक्त टैक्स लगाकर 15 हजार रुपए जुटाए जा सकते हैं। प्रोफेसर सिंह का सुझाव है कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में खर्च में कटौती लागू करनी चाहिए।

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