पीला सोना लुट गया, हरे सोने को बचाने की चिंता

कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से पाँच लाख से अधिक परिवारों की आजीविका का आधार पीला सोना लुट गया।अब इन ग़रीबों को हरे सोने को बचाने की चिंता सता रही है। बुंदेलखंड और विंध्याचल रेंज के जंगलों में पहली बार तेंदूपत्ता की तुड़ाई न होने से जंगलों में मानव की चहलकदमी थम गयी।

By: Mahendra Pratap

Published: 21 Apr 2020, 06:03 PM IST

महेंद्र प्रताप सिंह
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से पाँच लाख से अधिक परिवारों की आजीविका का आधार पीला सोना लुट गया।अब इन ग़रीबों को हरे सोने को बचाने की चिंता सता रही है। बुंदेलखंड और विंध्याचल रेंज के जंगलों में पहली बार तेंदूपत्ता की तुड़ाई न होने से जंगलों में मानव की चहलकदमी थम गयी। इसकी वजह से ग्रामीण पीला सोना यानी महुआ का फ़ूल चुनने से वंचित रह गये। जंगल में पड़े इन फूलों को खाकर भालू और हिरन जैसे तमाम वन्य जीवों की आदत बिगड़ गयी। इसकी तलाश मे यह जंगलों से गांवों की ओर रुख कर रहे है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों और यहां के जंगलों में महुआ का पेड़ बहुतायत में मिलता है। 15 मार्च से लेकर 15 अप्रैल तक इसमें पीले रंग के रसभरे फूल आते हैं। पौष्टिक तत्वों से भरपूर यह फूल ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के आधार हैं। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से इस बार ग्रामीण इन फूलों को नहीं चुन पाए। जंगलों में फूल चुनने का ठेका होने के बावजूद इन्हें चुनने कोई नहीं पहुंचा।

महुआ से बनती है देशी शराब :- महुआ से ग्रामीण देशी शराब भी बनाते हैं। इसके रस में मादकता भरी मिठास होती है। जो हल्का-हल्का नशा करती है। इसे खाकर भालू और हिरन इसके लती हो गए हैं। अब महुआ के फूल गिरना बंद हो रहे हैं। तब अब महुआ की खूशबू इन वन्य जीवों को जंगल से गांवों की तरफ खींच रही है। इस वजह से वन्य जीवों और इंसानों के बीच हमले बढ़ गए हैं।

पहली बार नहीं हुई तेंदू पत्ता की तोड़ाई :- लॉकडाउन की वजह से चित्रकूट,विध्यांचल और बुंदेलखंड के जंगलों में पहली बार तेंदू पत्ता की तोड़ाई नहीं हुई है। तेंदूपत्ता जंगलों में पेड़ से गिर गया है। अब इन्हें बटोरना आसान नहीं है। हालांकि, अब तेंदूपत्ता की तुड़ाई के लिए लॉकडाउन में आंशिक छूट मिली है लेकिन मजदूरों के न मिलने से ठेकेदार परेशान हैं। पत्ता तोड़ाई का मई जून पीक सीज़न होता है। ग्रामीण परेशान हैं हालत न सुधरी तो हरा सोना भी लुट जाएगा। उधर, तेंदूपत्ता न मिलने से बीड़ी निर्माता कंपनियां भी परेशान हैं। बीड़ी निर्माता संघ के राम पूजन कहते हैं, विध्यांचल और बुंदेलखंड इलाके में कम से कम 5 लाख लोगों की आजीविका सीधे तौर पर तेंदूपत्ता और बीड़ी निर्माण से जुड़ी है। इनमें से अधिकतर महुआ बीनने का भी ठेका लेते थे। अब इनके समक्ष रोजी रोटी का संकट है।

पीला सोना लुट गया, हरे सोने को बचाने की चिंता

क्या कहते हैं जिम्मेदार:- लॉकडाउन की वजह से जंगलों में इंसानों की आवाजाही बंद है। अब थोड़ी छूट मिली है। महुआ का पूरी तरह नुक़सान हो चुका है।25 फ़ीसद का नुक़सान तेंदु पत्ता में हुआ है। मई,जून में भी यही हाल रहा ग़रीब बर्बाद हो जाएँगे।
हरिकेश पटेल, अध्यक्ष, तेंदुपत्ता संग्रह समिति चित्रकूट

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