यूपी के कई जिलों में जमकर बरसे बादल, ओलावृष्टि की संभावना, किसान माथा पकड़कर बैठे

चैत्र नवरात्र में प्रदेश के कई जिलों में तेज हवा सहित बारिश
खेतों में कटने के लिए खड़ी फसल बर्बाद, किसान तबाह
अचानक मौसम के बदले मिजाज से तापमान में आई गिरावट

By: Mahendra Pratap

Published: 27 Mar 2020, 03:53 PM IST

लखनऊ. मौसम का पूर्वानुमान पूरी तरह से सही साबित हुआ। शुक्रवार अलसुबह से ही मौसम ने अपना मूड़ बना रखा था, आसमान में बादल घुमड़ घुमड़ कर रहे थे। तेज हवाएं पूरे जोर शोर के साथ चल रहीं थी। राजधानी लखनऊ को छोड़ पश्चिमी और पूर्वी यूपी के कई जिलों में सुबह से ही तेज हवाओं संग बारिश होनी शुरू हो गई थी। लखनऊ, कानपुर, सीतापुर में हवाएं तो सुबह से चल रही थी, कई बार इन शहरों बिजली भी गई, कई बार हल्की बौछार भी हुई पर 12 बजे के बाद बादलों ने जमकर बरसना शुरू कर दिया। वांसतिक नवरात्र का आज तीसरा दिन था। मां चंद्राघंटा की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्र में वैसे तो सुहावना और गर्म मौसम रहता है पर साल 2020 में मौसम ने 15 जनवरी के बाद से इन ढाई महीनों में तेज हवाएं, भारी बारिश और ओलावृष्टि कर अपना नया रुप दिखाया। मार्च में हुई बारिश ने किसानों का रुआंसा कर दिया था। आज की बारिश ने किसानों के नुकसान को और बढ़ा दिया।

पश्चिमी यूपी से लेकर रूहेलखंड, बुंदेलखंड और अवध के तमाम जिलों में आज फिर से मौसम का मिजाज बदल गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में लगभग 15 जिलों में अगले कुछ घंटों में बारिश के साथ बिजली कड़कने और तेज हवाओं के चलने की संभावना व्यक्त की गई थी। यह पूर्वानुमान आज सही साबित हो गया। पश्चिमी विक्षोभ की वजह से बिगड़े मौसम ने मेरठ, बागपत बिजनौर, बदायूं, बरेली, शाहजहांपुर, कानपुर देहात, औरैया, कानपुर शहर, लखीमपुर खीरी, झांसी, महोबा, बांदा, जालौन में मौसम आज सुबह से बिगड़ गया। भारी बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं भी चलीं।

मौसम विभाग के निदेशक जेपी गुप्ता के अनुसार, मौसम में यह परिवर्तन जम्मू कश्मीर पर बने पश्चिमी विक्षोभ के चलते हुआ है। शुक्रवार को राजधानी सहित प्रदेश के कुछ इलाकों में बदली छाई रहेगी। बीच-बीच में बौछारें भी पड़ सकती हैं। हालांकि, शनिवार से मौसम फिर साफ हो जाने का अनुमान है। प्रदेश के कुछ जिलों में कहीं-कहीं फिर से ओले पड़ सकते हैं।

राजधानी लखनऊ में भी आधी रात के बाद से मौसम बदल गया। सुबह से धूप नहीं निकली है और शहर के कुछ इलाकों में हल्की बूंदा-बांदी हुई। पिछले हफ्ते भर से हो रही तेज धूप से मौसम में जो गर्माहट थी अचानक बदले मौसम ने उसमें कमी ला दी। सीतापुर में भी अचानक मौसम के बदले मिजाज से तापमान में गिरावट आई है।

किसान पर यह बेमौसम बारिश भारी पड़ रही है। फरवरी-मार्च के अप्रत्याशित मौसम की मार से किसान यूं ही परेशान हैं। सरसों, आलू, मटर और चना की फसलें या तो खेत में हैं या खलिहान में। गेहूं की फसल तैयार खेतों में खड़ी है। ऐसे में यह बारिश किसानों का दर्द और बढ़ाएंगी।

लगातार आपदा ने तोड़ी कमर :- पिछले कई वर्षो से किसान आपदा से जूझ रहा है। वर्ष 2019 में खरीफ की फसल के दौरान पहले सूखा ने धान, मक्का आदि की फसल को प्रभावित किया, फिर सितंबर-अक्टूबर माह में हुई भारी वर्षा व बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी। मक्का की फसल 50 प्रतिशत तक खेतों में बर्बाद हुई तो धान का उत्पादन 30 प्रतिशत तक कम रहा।

रबी को ओलावृष्टि व तूफान से नुकसान :- किसान को उम्मीद थी कि खरीफ में हुए नुकसान की भरपाई रबी में अच्छे उत्पादन से करेगा लेकिन फरवरी माह में पूरे प्रदेश में चक्रवाती तूफान के साथ हुई बरसात और ओलावृष्टि ने आलू, सरसो, मटर, चना की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया तो जौ और गेंहू को जमीदोज कर दिया। कृषि वैज्ञानिक मान रहे है कि फसल गिरने के कारण दाने हल्के पड़ जाएंगे इससे 35-40 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

लखनऊ के उप कृषि निदेशक सीपी श्रीवास्तव ने बेमौसम बारिश पर 20 दिन पहले कहा था इस बार जलवायु परिवर्तन के असर के चलते बारिश के साथ ओले भी पड़ रहे हैं। आगे ऐसा न हो कृषि विभाग के अधिकारी जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचने के लिए किसानों को अपने खेत की मेड़ों पर ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की सलाह दे रहे हैं।

मौसम से फसलों को हुए नुकसान के लिए किसान को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जरिए मुआवजा दिलाकर भरपाई करने का दावा किया जा रहा है।

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