असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी में रखा कदम, विधानसभा चुनाव से पहले तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट तेज

-एआईएमआईएम, प्रसपा, बसपा, सुभासपा और 'आप' का हो सकता है गठबंधन

By: Mahendra Pratap

Updated: 16 Dec 2020, 05:09 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के लिए बड़ी पार्टियां भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अपनी रणनीति के तहत गांव-गांव जाकर अपने वोट बैंक को दुरुस्त कर रहीं हैं। दूसरी तरफ प्रदेश की छोटी पार्टियां अपने अस्तित्व बचाने और अपनी पहचान मजबूत करने के लिए एक नए समीकरण की तलाश में हैं। इनमें से एक पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन है। जिसके अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी बिहार में पार्टी के अच्छे रिजल्ट को देखते हुए यूपी में भी जमीन तलाश रहे हैं। इसी क्रम में ओवैसी ने बुधवार को सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात की। उधर आम आदमी पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने भी यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की है। और छोटे दलों के साथ गठबंधन की भी हामी भरी है। प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव खुद कुछ इस तरह के गठबंधन के हिमायती हैं। ओमप्रकाश राजभर ने तो कुछ छोटी पार्टियों को मिलकर भागीदारी संकल्प मोर्चा तैयार कर लिया है। असदुद्दीन ओवैसी को बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती को भेजे प्रस्ताव के लिए 'हां' का इंतजार है। इस प्रकार ऐसा माना जा रहा है कि प्रदेश विधानसभा चुनाव को मजबूती के साथ लड़ने के लिए एक नये गठबंधन मतलब तीसरे मोर्चे की तैयारी चल रही है। यह तीसरा मोर्चा भले ही सीधे-सीधे भाजपा, कांग्रेस और सपा का मुकाबला न कर सके पर उनके समीकरण को बिगड़ जरूर देगा। दलित-मुस्लिम का कार्ड खेलना चाहती हैं।

असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी में रखा कदम, विधानसभा चुनाव से पहले तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट तेज

गठबंधन खेलेगा जातिवादी कार्ड :- बिहार में पांच विधानसभा सीट जीतने से उत्साहित एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी यूपी में छोटे दलों के साथ गठबंधन करके जातिवादी कार्ड खेलना चाहती हैं। बुधवार को असदुद्दीन ओवैसी ने एक होटल में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात की। इस बैठक में भाजपा पर तंज कसते हुए ओवैसी ने कहा, ‘मैं नाम बदलने नहीं, दिलों को जीतने आया हूं।’ अब अगर राजभर की बात करें तो पूरे देश में राजभर 4 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 12 फीसदी हैं। पूर्वांचल में राजभर मतदाताओं की संख्या 12 से 22 फीसदी तक है। एक अनुमान के अनुसार पूर्वांचल की दो दर्जन लोकसभा सीटों पर राजभर वोट 50 हजार से ढाई लाख तक हैं। घोसी, बलिया, चंदौली, सलेमपुर, गाजीपुर, देवरिया, आजमगढ़, लालगंज, अंबेडकरनगर, मछलीशहर, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही राजभर बहुल माने जाते हैं।

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प्रसपा की यादव मतदाताओं में पकड़ :- प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया (प्रसपा) के अध्यक्ष शिवपाल यादव ने भी ऐलान कर रखा है कि वह धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ गठबंधन कर सकते है। समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद भी शिवपाल यादव का यादव मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ है। और वह कई विधानसभा सीटों के समीकरण को बिगड़ सकते हैं। मुस्लिम-यादव गठजोड़ उनकी पुरानी पार्टी रणनीति रही है।

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मुस्लिम-दलित समीकरण बसपा के लिए रहा फलदाई :- बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती की इस वक्त यूपी विधानसभा में 19 सीटें हैं। लोकसभा में भी दोबार से खाता नहीं खुला, उपचुनाव में भी पार्टी औंधे मुंह गिरी। अपनी हालात सुधारने के लिए वह आजकल भाजपा के चारों ओर घूम रही हैं। पर माना जा रहा है कि भाजपा मायावती से कोई गठबंधन नहीं करने वाली है। उधर असदुद्दीन ओवैसी की तरफ से गठबंधन का प्रस्ताव जा चुका है। सिर्फ मायावती के हां का इंतजार है। वैसे भी मुस्लिम-दलित समीकरण बसपा को कई बार फलदाई साबित हुआ है।

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आप भी गठबंधन का हिमायती :- आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के यूपी विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने और छोटे दलों के संग गठबंधन करने के ऐलान के बाद इस संभावना को बल मिलता है कि यूपी में एक तीसरे मोर्चे की तैयारी चल रही है।

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