राम मंदिर निर्माण पर बड़ी घोषणा, मकर संक्रांति सेेे विश्व का सबसे बड़ा प्रचार अभियान चलाएगी ट्रस्ट

-रामलला मंदिर निर्माण के लिए एकत्र करेगी धन
-वर्तमान पीढ़ी को राम मंदिर के इतिहास की सच्चाइयों से कराएगी अवगत

By: Mahendra Pratap

Published: 18 Dec 2020, 05:02 PM IST

लखनऊ. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मकर संक्रांति (15 जनवरी) सेेे विश्व का सबसे बड़ा प्रचार अभियान चलाएगी। जहां वह रामलला मंदिर निर्माण के धन एकत्र करेगी वहीं भारत की वर्तमान पीढ़ी को इस मंदिर के इतिहास की सच्चाइयों से अवगत कराएगी। 10, 100 और 1000 रुपए के कूपन के जरिए आर्थिक मदद लिया जाएगा। साथ ही करोड़ों घरों में भगवान के दिव्य मंदिर की तस्वीर भी पहुंचाई जाएगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव व विश्व हिंदू परिषद उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहाकि आगामी मकर संक्रांति (15 जनवरी) से माघ-पूर्णिमा तक विहिप कार्यकर्ता देश के चार लाख गांवों के 11 करोड़ परिवार से संपर्क कर और उन्हें श्रीराम जन्मभूमि से सीधे जोड़कर रामत्व का प्रसार और धन एकत्र करेंगे।

सर्वोच्च अदालत के आदेश पर ट्रस्ट का गठन :- अब तक रामलला मंदिर की हुई प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए चंपत राय ने कहाकि, सर्वोच्च अदालत के निर्देश पर भारत सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि के लिए “श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र” नाम से ट्रस्ट गठित किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में पूजन करके मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को गति प्रदान की है। मंदिर के वास्तु की जिम्मेदारी अहमदाबाद के चंद्रकान्त सोमपुरा उठा रहे हैं। लार्सन एंड टुब्रो कम्पनी को मंदिर निर्माण का कार्य दिया गया है, जबकि निर्माता कंपनी के सलाहकार के रूप में ट्रस्ट ने टाटा कंसल्टेंट इंजीनियर्स को चुना है।

रामलला मंदिर का अद्भुत नक्शा :- रामलला मंदिर के नक्शे के बारे में चंपत राय ने बताते हुए कहाकि, तीन मंज़िला मंदिर पत्थरों से बनेगा। प्रत्येक मंज़िल की ऊंचाई 20 फ़ीट होगी, मंदिर की लंबाई 360 फ़ीट तथा चौड़ाई 235 फ़ीट है, भूतल से 16.5 फ़ीट ऊंचा मंदिर का फ़र्श बनेगा, भूतल से गर्भ गृह के शिखर की ऊंचाई 161 फीट होगी।

राम मंदिर के नींव पर सफाई :- नींव का काम रुक जाने के बारे में सफाई देते हुए चंपत राय ने कहाकि, धरती के नीचे 200 फीट गहराई तक मृदा परीक्षण तथा भविष्य के सम्भावित भूकम्प के प्रभाव का अध्ययन हुआ है। ज़मीन के नीचे 200 फीट तक भुरभुरी बालू पायी गयी हैंं। गर्भगृह के पश्चिम में कुछ दूरी पर ही सरयू नदी का प्रवाह है। इस भौगोलिक परिस्थिति में 1000 वर्ष आयु वाले पत्थरों के मन्दिर का भार सहन कर सकने वाली मज़बूत व टिकाऊ नींव की ड्राइंग पर आईआईटी बंबई, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी चेन्नई, आईआईटी गुवाहाटी, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की, लार्सन टूब्रो व टाटा के इंजीनियर आपस में परामर्श कर रहे हैं बहुत शीघ्र नींव का प्रारूप तैयार होकर नींव निर्माण कार्य प्रारम्भ होगा।

सच्चाइयांं बताएंगे :- चंपत राय ने कहाकि, भारत वर्ष की वर्तमान पीढ़ी को इस मंदिर के इतिहास की सच्चाइयों से अवगत कराने की योजना बनी है। देश की कम से कम आधी आबादी को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की ऐतिहासिक सच्चाई से अवगत कराने के लिये देश के प्रत्येक कोने में घर घर जाकर संपर्क करेंगे। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, अंडमान निकोबार, रणकच्छ, त्रिपुरा सभी कोनों पर जाएंगे, राम जन्मभूमि के बारे में पढ़ने के लिए साहित्य दिया जाएगा।

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