एससी-एसटी अपराध के पीड़ितों को जल्द मुआवजे के लिए पोर्टल शीघ्र, यूपी है दूसरा राज्य, पहले का नाम जानकर रह जाएंगे हैरान

यूपी सरकार शीघ्र ही एक पोर्टल लॉन्च करने जा रही है। इस पोर्टल की मदद से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ऐक्ट के तहत अपराध के पीड़ितों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

By: Mahendra Pratap

Published: 18 Oct 2020, 03:38 PM IST

लखनऊ. देशभर में अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराध के मामले उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक संख्या में दर्ज किए गए हैं। अपराध होने के बाद सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जाता है। यह मुआवजा पीड़ित या उसके परिजनों तक पहुंचने में एक लम्बी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है। जिस वजह से देर हो जाती है। इस परेशानी को दूर करने के लिए यूपी सरकार शीघ्र ही एक पोर्टल लॉन्च करने जा रही है। इस पोर्टल की मदद से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ऐक्ट के तहत अपराध के पीड़ितों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। ऐसा ही एक पोर्टल राजस्थान में काम कर रहा है। यूपी देश का दूसरा राज्य होगा जहां इस पोर्टल की व्यवस्था की जा रही है।

चर्चा की वजह से हाथरस मामले में मिला तेज गति से मुआवजा :- अभी हाथरस मामला चर्चा में है। मीडिया की वजह से यह मामला जनता, सरकार और विपक्षी दलों की निगाहों में चढ़ गया। जिस वजह से हाथरस मामले में परिवार को मुआवजा 8.25 लाख रुपए सिर्फ तीन दिन में ही मिल गए। उसके साथ सीएम योगी की तरफ से पीड़िता के परिजन को 25 लाख की अनुग्रह राशि, घर और एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी गई। लेकिन ज्यादातर मामलों में मुआवजा मिलने में देरी ही होती है।

मुआवजे की प्रक्रिया :-मौजूद वक्त में इस तरह के केस में जांच करने वाले अधिकारी सर्किल ऑफिसर डिटेल को ऊपर भेजते हैं, जिससे मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हो सके। हत्या जैसे अपराधों में पीड़ित को 8.25 लाख रुपए का मुआवजा मिलता है। इसमें से आधी रकम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद और बाकी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के बाद आती है। दूसरी तरफ रेप या गैंगरेप जैसे अपराधों में मेडिकल रिपोर्ट की पुष्टि के बाद ही आधी राशि आ जाती है। चार्जशीट के बाद 25 प्रतिशत और बाकी की राशि केस के निपटारे के बाद आती है।

अब नहीं होगी देरी :- इस परेशानी से बचने के लिए सीएम योगी ने गंभीरता दिखाई और तेजी से मुआवजा परिजनों को मिले इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने का निर्देश दिया। ऑनलाइन पोर्टल से यह प्रक्रिया तेज हो जाएगी। अधिकारी हर एक लेवल पर नजर रख सकेंगे और जरूरी निर्देश दे सकेंगे।'

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