प्रियंका की सक्रियता ने अखिलेश-माया को किया सोनिया से दूर

-विपक्षी दलों के साथ चर्चा में शामिल नहीं होंगे सपा-बसपा
-बस विवाद में बसपा प्रमुख कर रही हैं बीजेपी का समर्थन

By: Mahendra Pratap

Updated: 22 May 2020, 01:54 PM IST

पत्रिका पोलटिकल स्टोरी
लखनऊ. कोरोना काल में देश का विपक्ष एकजुट हो रहा है। मौजूदा हालात के मद्देनजर कांग्रेस ने सोनिया गांधी की अध्यक्षता में शुक्रवार को तीन बजे समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है। लेकिन, इस बैठक में यूपी के प्रमुख विपक्षी दल सपा और बसपा के शामिल होने पर संशय है। माना जा रहा है कि यूपी में जिस तरह से प्रियंका गांधी सक्रिय हैं उसके मद्देनजर अखिलेश यादव और मायावती की कांग्रेस से नजदीकी संभव नहीं है। हाल के दिनों में कोरोना पीडि़तों के लिए बस भेजने को लेकर जो बवाल मचा है उसमें बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को भी घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। ऐसे में इस बात की संभावना कहीं से नहीं दिखती कि सोनिया के नेतृत्व में आयोजित बेव प्रेस काफ्रेंस यूपी के प्रमुख विपक्षी दल भाग लेंगे। हालांकि इस वेबीनार में राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष अजित सिंह के शामिल होने की सूचना की पुष्टि हो चुकी है।

कांग्रेस द्वारा बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक के मुख्य एजेंडे में सरकार द्वारा कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए उठाए गए कदमों, प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा, उनकी समस्याएं व सरकार द्वारा उनका सही तरह से निराकरण न कर पाना, मोदी सरकार के 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की असलियत जैसे तमाम मुद्दों पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा होनी है। इस बैठक में कोरोना संकट के बहाने मोदी सरकार को घेरने की संयुक्त रणनीति पर मंथन किया जाएगा। लेकिन, उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी विपक्षी दल की बैठक में भाग लेने से विपक्ष की एकता बिना यूपी के आए मजबूत नहीं हो सकती।

मायावती करती रही हैं मुखर विरोध :- कांग्रेस और योगी सरकार के बीच बस पॉलिटिक्स के बीच जो कुछ भी चल रहा उसका बसपा प्रमुख मायावती ही विरोध करती रहीं हैं। यूपी के पूर्व सीएम मायावती ने ट्वीट करके कांग्रेस को जमकर खरी-खोटी सुनाई है। उन्होंने गहलोत सरकार की नीयत पर खुलकर प्रहार किए हैं। मायावती ने राजस्थान पर घिनौनी राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने ट्वीट किया, 'राजस्थान की कांग्रेसी सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवा-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपए और देने की जो मांग की है वह उसकी कंगाली और अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुख:द है।'

इतना ही नहीं मायावती ने दूसरा ट्वीट करके कांग्रेस के कृत्य को अमानवीय बताया। उन्होंने लिखा, 'कांग्रेसी राजस्थान सरकार एक तरफ कोटा से यूपी के छात्रों को अपनी कुछ बसों से वापस भेजने के लिए मनमाना किराया वसूल रही है तो दूसरी तरफ अब प्रवासी मजदूरों को यूपी में उनके घर भेजने के लिए बसों की बात करके जो राजनीतिक खेल खेल कर रही है यह कितना उचित और कितना मानवीय?'

इससे पहले मायावती ने ट्वीट किया था कि कांग्रेस बस की राजनीति करने के बजाए श्रमिकों को ट्रेनों से भेजे। उन्होंने लिखा था कि कांग्रेस को श्रमिक प्रवासियों को बसों से ही घर भेजने में मदद करने पर अडऩे की बजाए, इनका टिकट लेकर ट्रेनों से ही इन्हें इनके घर भेजने में इनकी मदद करनी चाहिए तो यह ज्यादा उचित और सही होगा।

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