केले की खेती के लिए वरदान टिश्यू कल्चर अब बना गया दुश्मन

पनामा विल्ट फैला रहा है रोग, सीआईएसएच खोज रहा है इलाज
यूपी-बिहार के किसानों को करोड़ों रुपए की लगी चोट

By: Mahendra Pratap

Published: 17 Jun 2020, 03:05 PM IST

लखनऊ. केले की खेती को किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बनाने वाला टिश्यू कल्चर आज खुद का दुश्मन हो गया है। यूपी व बिहार में तमाम जगह टिश्यू कल्चर से घातक रोग पनामा विल्ट फैल रहा है। जिससे केले के किसानों की करोड़ों रुपए की फसल नष्ट हो गई है। केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच) अब इसका इलाज ढूंढ़ने में जुटा हुआ हैं। शीघ्र ही इस रोग से केले को मुक्त कर लिया जाएगा। ये आम इंसान को कोई नुकसान नहीं पहुंचते हैंं, यह सिर्फ फसलों पर लगने वाला रोग है।

टिश्यू कल्चर की तकनीक से ही केले की व्यावसायिक खेती संभव हो पाई है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में 55342 हेक्टेयर में केले की खेती होती थी। जिसका आंकड़ा अब और बढ़ गया है।

केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच) लखनऊ के निदेशक शैलेन्द्र राजन के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की करोड़ों रुपए की जी–9, मालभोग और कई अन्य किस्म की केले की फसल इस बीमारी से नष्ट हो रही है। अधिकतर स्थानों पर सिंचाई के पानी के साथ इस बीमारी के जीवाणु एक स्थान से दूसरे स्थान पर फैल गए और किसानों को कई वर्षों बाद ज्ञात हुआ कि उनके खेत में यह भयानक बीमारी घर कर चुकी है। अब यह महामारी के रूप में फैल रही है। नहर एवं बाढ़ के पानी ने इस बीमारी को फैलाने में मुख्य भूमिका निभाई है। जहां पर यह बीमारी नहीं थी, वहां पर भी टिश्यू कल्चर पौधे से इस रोग के फैलने की संभावना बढ़ गई है।

डॉ. राजन ने बताया कि उत्तर प्रदेश और बिहार के केला उत्पादकों के लिए टिश्यू कल्चर पौधे एक वरदान के समान हैं। टिश्यू कल्चर के बिना कम समय में नए बाग लगाने की संभावनाएं बहुत कम है। उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रतिवर्ष करोड़ों टिश्यू कल्चर पौधों की आवश्यकता होती है इसलिए कई कम्पनियों के लिए यह एक लाभकारी व्यवसाय है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों ने उत्तर प्रदेश एवं बिहार में पाया गया कि यह बीमारी टिश्यू कल्चर हार्डेनिंग नर्सरी से पौधों के कारण नये क्षेत्रों में फैली है। किसानों से जानकारी प्राप्त करने के बाद पता चला कि उन्हें रोगग्रस्त क्षेत्रों से पौधे की आपूर्ति की गयी थी। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान शोध कर रहा है कि इसका और बेहतर इलाज क्या हो सकता है। इसके अतिरिक्त इस बीमारी से बचाव के लिए किसानों को प्रशिक्षण भी दे रहा है।

Mahendra Pratap
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