सफाई परीक्षा में सामने आयीं खामियां, कटेंगे हमारे नंबर!

सफाई परीक्षा में सामने आयीं खामियां, कटेंगे हमारे नंबर!
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Dikshant Sharma | Publish: Jan, 05 2017 07:25:00 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

बदहाल शौचालय और अतिक्रमण सबसे बड़ी समस्या नजर आई।

लखनऊ। राजधानी की सफाई परीक्षा जारी है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत लखनऊ में स्वच्छता का सर्वेक्षण करने टीम ने गुरूवार को इस्माइल गंज, चिनहट, अमौसी और मड़ियांव में सर्वेक्षण किया।

सूत्रों ने बताया कि गुरुवार को अलग अलग जगह टीम ने शौचालयों की स्थित जानी और घरों से कूड़ा कलेक्शन की प्रक्रिया भी देखी। आपको बतादें 2011 के सर्वे के अनुसार लगभग 44 हज़ार घर ऐसे हैं जिनमे शौचालय नहीं है और इस साल निगम ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही स्कीम के तहत लगभग 1 हज़ार शौचालय बनवाए हैं। वहीं कूड़ा निस्तारण और शिवरी प्लांट ठप पड़ा है। अब ऐसे में केंद्र प्रतिनिधि लखनऊ को कितने अंक देंगे ये कहना मुश्किल पर ये ज़ाहिर है कि ज़्यादा अंक मिलना मुश्किल है।

दो दिन के सर्वेक्षण में अधिकारियों को बदहाल शौचालय और अतिक्रमण सबसे बड़ी समस्या नजर आई। उन्होंने निगम अधिकारियों से यह भी जानना चाह कि अतिक्रमण पर कितना जुर्माना पड़ता है और क्या कार्रवाई होती है। सवालों से पड़ताल भी की कि जुर्माना होता भी है या सबकुछ कागजों में ही होता है। इसका अलावा मलिन बस्तियों का दौरा कर देखा कि कितने घरों में शौचालय है और कूड़े निस्तारण के लिए अधिकारी क्या कर रहे हैं।

दो हजार में से मिलेंगे नंबर
पूरा सर्वेक्षण कुल 2000 अंको का होगा। जिसमें 900 अंक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत झाड़ू, कूड़ा एकत्रीकरण, परिवहन, प्रसंस्करण और निस्तारण, खुले में शौच से मुक्त, क्षमता संवर्धन इत्यादि बिन्दुओं पर दिये जायेगे। 500 अंक स्वतंत्र स्थलीय निरीक्षण से और सिटिजन फीडबैक से 600 अंक दिये जायेंगे।

डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन पर संकट के बादल 
शहर के कूड़ा उठान और निस्तारण की जिम्मेदार कम्पनी ज्योति इन्वायरोटैक कम्पनी लिमिटेड की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। कानपुर रोड पर स्थित कालोनियों में बीते दिसम्बर से कूड़ा उठाने वाले नहीं पहुंचे हैं। इससे गंदगी की भरमार क्षेत्र में है और स्थानीय लोगों में गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है। हालांकि सर्वेक्षण को देखते हुए निगम अधिकारी अपने स्तर पर यहां सफाई बरतने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन प्लांट चालु स्थिति में न होने के चलते अधिकतर नंबर कटना स्वाभाविक है।
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