पुलिस की नजरों से बचकर भागे-भागे फिर रहे दो आईपीएस अफसर

-जगह-जगह ढूंढ़ रही है पुलिस, हर संभावित ठिकानों पर छापेमारी
-महीनों से लापता हैं दोनों आइपीएएस, भ्रष्टाचार के हैं संगीन आरोप
-दोनों के फोन बंद, आवास पर ताला, अफसर हुए गुम

By: Mahendra Pratap

Published: 19 Oct 2020, 04:58 PM IST

पत्रिका एक्सक्लूसिव

लखनऊ. भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों से जुड़ा शायद यह यूपी का पहला मामला है। वे पुलिस अफसर जिनकी नजर कभी अपराधियों पर रहती थी वे अब खुद पुलिस की नजर में हैं। भ्रष्टाचार के मामले में यूपी कैडर के दो आइपीएस अफसरों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। अब यह दोनों पुलिस विभाग के लिए वांटेड हो गए हैं। यह दोनों आइपीएस अफसर फरारा हैं। इनके फोन बंद हैं। सरकारी आवासों पर ताले लटक रहे हैं। पुलिस अब इन्हें सर्विलांस की मदद से संभावित स्थानों पर छापेमारी और दबिश डाल रही है ताकि इनकी गिरफ्तारी की जा सके। ये दोनों ही अलग-अलग मामलों में अभियुक्त हैं, और अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हैं।

अरविंद सेन 2003 बैच के आइपीएस

जिन दो आइपीएस अफसरों पर भ्रष्टाचार का दाग लगा है इनमें से एक आइपीएस हैं अरविन्द सेन। यह वर्ष 2003 बैच के आईपीएस हैं। यह डीआईजी पद पर तैनात थे। भ्रष्टाचार के आरोप में यूपी सरकार ने अरविन्द सेन को 22 अगस्त को निलंबित किया था। अरविन्द सेन पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में 13 जून को मुकदमा दर्ज हुआ था। इन पर पशुपालन विभाग में टेंडर के नाम पर ठगी और भ्रष्टाचार मामले का आरोप है। यह एसटीएफ की जांच में भी दोषी पाए गए हैं। अग्रिम जमानत के लिए दायर उनकी अर्जी कोर्ट से रद हो गयी है। गिरफ्तारी के डर से सेन का मोबाइल फोन बंद है। यह अंडरग्राउंड हैं। इन्हें ढूंढऩे के लिए पुलिस टीम बनाई गई। जिसकी प्रभारी एसीपी गोमतीनगर श्वेता सिंह है। सेन की गिरफ्तारी के लिए लखनऊ, अम्बेडकरनगर और फैजाबाद के आवासों पर पुलिस लगातार दबिश और छापेमारी कर रही है। गौरतलब है कि अरविन्द सेन पूर्व सांसद स्व. मित्रसेन यादव के पुत्र हैं और फैजाबाद निवासी हैं।

ऐसे फंसे अरविंद सेन

पशुपालन विभाग उप्र में ठेका दिलाने के नाम पर हुए फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी मामले मेें सेन का नाम शामिल है। जांच में पता चला कि घोटाले में सरगऩा आशीष राय ने सेन को इंदौर के व्यापारी को धमकी देने के लिए 2 बार में 20 लाख रुपए का भुगतान किया था। भुगतान की जांच कर रही टीम को सबूत भी मिले हैं। मामला उजागर होने के वक्त सेन डीआइजी पीएसी आगरा थे। सेन वर्ष 2019 में सीबीसीआइडी में एसपी थे। इस दौरान आशीष व उसके साथी पीडि़त व्यापारी मंजीत सिंह भाटिया को लेकर उनके पास गए थे। वहां सेन ने व्यापारी को टेंडर की जांच करने की बात कही थी। टेंडर में खामियोंं को लेकर व्यापारी को धमकाया था और जेल भेजने की धमकी दी थी। इस मामले में ठेका दिलाने के लिए इंदौर के व्यापारी से 10 करोड़ रुपए हड़प लिए गए थे।

2014 बैच के आइपीएस हैं मणिलाल पाटीदार

भ्रष्टाचार में फंसे दूसरे अफसर हैं मणिलाल पाटीदार। पाटीदार वर्ष 2014 बैच के आईपीएस हैं। और निलंबन से पहले महोबा के एसपी थे। योगी सरकार ने मणिलाल को नौ सितंबर को निलंबित किया था। 10 सितंबर को मुकदमा दर्ज हुआ। लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने पाटीदार के खिलाफ वारंट जारी किया है। जबकि, गिरफ्तारी के लिए आईजी रेंज के स्तर से एसआईटी गठित है। पुलिस टीमें दिल्ली से लेकर राजस्थान तक दबिश दे रही हैं।

व्यापारी से मांगी थी घूस

महोबा के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी के वायरल वीडियो से विवादों में आए मणिलाल जांच के बाद कई गंभीर आरोपों में लिप्त पाए गए हैं। एसआईटी ने उन्हें भ्रष्टाचार एवं इंद्रकांत को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी माना है। मइंद्रकांत ने एसपी पाटीदार के जरिए घूस मांगने का वीडियो वायरल किया था। जांच में यह सही पाए जाने के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हुआ। कारोबारी की मौत के बाद महोबा के तत्कालीन एसपी रहे पाटीदार सहित चार पर हत्या का मुकदमा भी दर्ज है।

क्या कहते हैं अफसर

एसीपी श्वेता सिंह का कहना है कि जल्द ही अरविंद सेन पुलिस टीम के हाथ नहीं लगते हैं तो कोर्ट से गैर जमानती वारंट लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस टीमें सर्विलांस की मदद से अरविंद सेन की लोकेशन ट्रेस कर रहीं हैं। इनके साथ ही इस मामले में सिपाही दिलबहार सिंह, समीक्षा अधिकारी उमेश सिंह, अरुण राय समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी होनी है। सभी का गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है।

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