लावारिश पड़ी हैं 1 लाख करोड़ रुपए की शत्रु संपत्तियां, यूपी में सर्वाधिक 5 हजार 936 इमारतें

-भारत-पाक विभाजन के दौरान पाकिस्तान जाने वालों की सपंत्तियों पर अवैध कब्जेदार
-यूपी के बाद पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक शुत्र संपत्तियां मौजूद
-जनवरी 2020 में बने मंत्री समूह को 9,400 शत्रु संपत्तियों का करना था निपटारा
-एक साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस, कोरोना की वजह से ठप पड़ा है काम

By: Mahendra Pratap

Updated: 26 Dec 2020, 05:40 PM IST

महेंद्र प्रताप सिंह
पत्रिका एक्सक्लूसिव

लखनऊ. देश में एक लाख करोड़ की करीब 12 हज़ार 426 संपत्तियोंं का कोई लेनदार नहीं है। कुछ मुकदमें में उलझी हैं तो कुछ लावारिश पड़ी हैं। इन पर अवैध कब्जे हो गए हैं। इनमें सबसे अधिक 5 हजार 936 इमारतें यूपी में हैं। राजधानी लखनऊ के हजरतगंज जैसे पॉश इलाके की करोड़ों संपत्तियों के विरासत का सवाल आजादी के समय से अटका पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जनवरी 2020 में गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में गठित मंत्री समूह को करीब 9400 संपत्तियों का निपटारा करना था। सालभर होने के आए कारोना की वजह से इस संबंध में कोई पहल नहीं हो सकी है।
भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद बहुत सारे लोग भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए। लेकिन, इनकी इमारतें देश में जहां-तहां यूं ही पड़ी रह गयीं। 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद भारत सरकार ने इनमी प्रॅापटी एक्ट 1968 पारित कर भारत छोड़कर गए नवाबों, जागीरदारों और अन्य लोगों की जंमीने, लॉकर्स, सेफ डिपॉजिट्स, कंपनियों में शेयर आदि को अपने कब्जे में लेकर कस्टोडियन नियुक्त कर दिया। तब से यह कस्टोडियन इन सभी इमारतों (शत्रु संपत्ति ) का रख-रखाव कर रहे हैं। जनवरी 2020 में लोकसभा को दी गयी जानकारी के अनुसार भारत में कुल 12 हज़ार 426 संपत्तियां इस एक्ट के तहत थीं। जिनकी कीमत 1 लाख करोड़ आंकी गयी थी।

2050 संपत्तियों का मालिकाना हक सरकार के पास

कुछ साल पहले शत्रु संपत्ति अध्यादेश 2016 को राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली थी। इसके बाद करीब 2050 संपत्तियों का मालिकाना हक भारत सरकार के पास चला गया है। इन पर जो काबिज हैं वे न तो इसे बेच पाएंगे न ही किसी को दे पाएंगे। संशोधित अध्यादेश के तहत मालिकाना हक 1968 से माना जाएगा, जब ये कानून बना था।

यूपी में सबसे ज्यादा 'शत्रु संपत्ति'

देश में सबसे ज्यादा शत्रु संपत्ति का हिस्सा उप्र में सीतापुर के स्थित राजा महमूदाबाद का था। इनके पिता मोहम्मद आमिर अहमद खान 1947 में भारत छोड़कर इराक चले गए थे। बाद में उन्होंने 1957 में पाकिस्तानी नागरिकता ले ली थी। उनकी संपत्तियों में लखनऊ के हजरतगंज में बटलर पैलेस, महमूदाबाद हवेली, लॉरी बिल्डिंग और कोर्ट आदि शामिल हैं। यह करीब 200,000 वर्ग फुट में फैली है।

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राजा महमूदाबाद ने दी थी प्रावधानों को चुनौती

नए अध्यादेश के बाद राजा महमूदाबाद की लखनऊ, सीतापुर और नैनीताल स्थित करोड़ों की संपत्ति पर एक बार फिर मालिकाना हक कस्टोडियन (संरक्षक) का हो गया। इसके बाद महमूदाबाद के वर्तमान राजा मोहम्मद अमीर मोहम्मद खान ने अध्यादेश को कोर्ट में चुनौती दी। यह वे लोग थे जो भारत छोड़कर नहीं गए थे। लंबी लड़ाई के बाद उनके वंशज सुप्रीम कोर्ट से जीत गए। हालांकि, अभी तक उन्हें किसी भी संपत्ति का कब्जा नहीं मिला है। राजा महमूदाबाद के वारिसों को अब भी अपनी संपत्ति के मिलने का इंतजार है।

राजा महमूदाबाद की कहां कितनी संपत्ति

लखनऊ-बटलर पैलेस, महमूदाबाद हाउस और हजऱतगंज में कई दुकानें
सीतापुर-डीएम,एसएसपी और सीएमओ आवास
-ऐसी संपत्तियों की कुल संख्या 936
-संपत्तियों की कीमत- तकरीबन 50 हजार करोड़

कहां कितनी शत्रु देश की संपत्तियां
प्रदेश संपत्तियां
उप्र 5936
प. बंगाल 4301
दिल्ली 659
गुजरात 152
मप्र 94
राजस्थान 13
छत्तीसगढ़ 11

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